
राखी सावंत के खिलाफ झांसी कोर्ट ने जारी किया गैर-जमानती वारंट
बॉलीवुड अभिनेत्री राखी सावंत के खिलाफ झांसी की अदालत ने 2010 के 'राखी का इंसाफ' शो से जुड़े आत्महत्या मामले में गैर-जमानती वारंट जारी किया है। राखी को अब अदालत में पेश होकर जमानत की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

नई दिल्ली | 17 अक्टूबर 2026
झांसी। बॉलीवुड अभिनेत्री और टेलीविजन कलाकार राखी सावंत की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। उत्तर प्रदेश की झांसी अदालत ने वर्ष 2010 के चर्चित टेलीविजन कार्यक्रम राखी का इंसाफ से जुड़े एक पुराने मामले में उनके खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह मामला झांसी के एक युवक की आत्महत्या और कार्यक्रम के दौरान उसके कथित अपमान से संबंधित है।
17 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत के आदेश के बाद राखी सावंत को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर जमानत की कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। गैर-जमानती वारंट जारी होने से उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, अभी उन्हें जेल की सजा नहीं सुनाई गई है और यह भी तय नहीं है कि उन्हें कितने दिनों तक हिरासत में रहना पड़ेगा।
क्या है 2010 का पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2010 में प्रसारित टेलीविजन रियलिटी शो राखी का इंसाफ से शुरू हुआ था। इस कार्यक्रम में राखी सावंत लोगों के निजी और पारिवारिक विवादों पर चर्चा करती थीं। शो के एक एपिसोड में झांसी के रहने वाले एक युवक ने हिस्सा लिया था। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान युवक के साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ और सार्वजनिक रूप से उसकी बेइज्जती की गई।
इसके बाद युवक की आत्महत्या का मामला सामने आया। उसके परिजनों ने आरोप लगाया कि टेलीविजन कार्यक्रम में हुए कथित अपमान से वह मानसिक रूप से परेशान हो गया था। हालांकि, किसी व्यक्ति की आत्महत्या और टेलीविजन कार्यक्रम के बीच आपराधिक जिम्मेदारी का संबंध स्थापित करने के लिए कानूनी साक्ष्य आवश्यक हैं। केवल अपमान का आरोप अपने आप आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित नहीं करता।
इस मामले को लेकर पहले भी कानूनी कार्यवाही हुई थी। वर्ष 2010 में अदालत ने कार्यक्रम में इस्तेमाल की गई भाषा और प्रस्तुति पर सवाल उठाए थे।
झांसी कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट क्यों जारी किया?
ताजा रिपोर्ट्स में बताया गया है कि झांसी की अदालत ने राखी सावंत के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है और अब उन्हें अदालत में उपस्थित होकर जमानत की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। गैर-जमानती वारंट सामान्य गिरफ्तारी वारंट की तुलना में अधिक गंभीर अदालती प्रक्रिया है। ऐसे आदेश के बाद संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार करके सक्षम अदालत के सामने पेश किया जा सकता है।
हालांकि, उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में वारंट जारी करने का विस्तृत न्यायिक आधार, पूर्व में जारी समन की स्थिति और संबंधित अदालत का संपूर्ण आदेश स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह दावा करना कि राखी सावंत बार-बार समन की अवहेलना कर रही थीं और केवल इसी कारण वारंट जारी हुआ, फिलहाल पुष्ट नहीं है।
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी पहुंचा था मामला
इस मामले में एक महत्वपूर्ण पुराना न्यायिक दस्तावेज भी उपलब्ध है। 10 दिसंबर 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार, मृत युवक का नाम लक्ष्मण अहिरवार था। उनकी मां सावित्री देवी ने 12 नवंबर 2010 को झांसी के प्रेमनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले में भारतीय दंड संहिता की तत्कालीन धाराओं 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 504 (जानबूझकर अपमान) और 120बी (आपराधिक साजिश) का उल्लेख था। उस समय राखी सावंत ने एफआईआर और गिरफ्तारी के विरुद्ध इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
झांसी अदालत से जारी गैर-जमानती वारंट ने राखी सावंत की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब 16 साल पुराने मामले में अब उनकी अदालत में पेशी और जमानत की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यह मामला एक युवक की मौत और टेलीविजन कार्यक्रम में कथित अपमान से जुड़ा है। हालांकि, आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि और राखी सावंत की आपराधिक जिम्मेदारी का फैसला अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।



