
उत्तराखंड चुनाव 2027: राहुल-प्रियंका और खरगे संभालेंगे मोर्चा !
दो नवंबर को दिल्ली में हुई बैठक के बाद कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व को भाजपा सरकार की नीतियों और जनसमस्याओं के खिलाफ एक महीने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस रणनीति का उद्देश्य संगठन को बूथ स्तर सक्रिय , स्थानीय नेतृत्व को जिम्मेदारियां और जनता के बीच लगातार उपस्थिति बनाये रखना है.

देहरादून, 5 नवंबर 2026। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। लगातार दो विधानसभा चुनावों में पराजय झेल चुकी कांग्रेस अब सत्ता में वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत लगाने की तैयारी में है। पार्टी हाईकमान ने प्रदेश संगठन को एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरने का संदेश दिया है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की उत्तराखंड में बड़ी जनसभाएं कराने की तैयारी चल रही है।
कांग्रेस की चुनावी रणनीति: पहाड़ से मैदान तक जनसभाओं की तैयारी
कांग्रेस का लक्ष्य उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना है। राष्ट्रीय नेताओं की जनसभाओं के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के साथ भाजपा सरकार के खिलाफ जनमत तैयार करने की कोशिश की जाएगी।पार्टी की प्रस्तावित रणनीति में नौ बड़ी रैलियों की चर्चा है, जिनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की तीन-तीन जनसभाएं शामिल बताई जा रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी की पिथौरागढ़ जिले के धारचूला और प्रियंका गांधी की पौड़ी जिले में जनसभा प्रस्तावित है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इन कार्यक्रमों को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व से चर्चा की जानकारी दी थी।
खरगे की रणनीति: संगठन मजबूत करो, जनता के बीच जाओ
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उत्तराखंड के नेताओं को चुनावी तैयारियों में तेजी लाने और आपसी मतभेद दूर करने का संदेश दिया है।दो नवंबर को दिल्ली में हुई बैठक के बाद कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व को भाजपा सरकार की नीतियों और जनसमस्याओं के खिलाफ एक महीने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।इस रणनीति का उद्देश्य संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना, स्थानीय नेतृत्व को जिम्मेदारियां सौंपना और जनता के बीच लगातार उपस्थिति बनाए रखना है।
बेरोजगारी, पलायन और महिला सुरक्षा बनेंगे प्रमुख मुद्दे
कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार को स्थानीय समस्याओं के आधार पर घेरने की तैयारी कर रही है।पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, शिक्षा व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को पार्टी प्रमुखता से उठाना चाहती है।अंकिता भंडारी हत्याकांड, भूमि संबंधी विवादों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी कांग्रेस सरकार तथा संबंधित संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती रही है।पार्टी की कोशिश इन मुद्दों को जनसभाओं के साथ गांवों, कस्बों और विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचाने की है।
भाजपा के सामने कितनी बड़ी चुनौती?
उत्तराखंड विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 36 विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 47 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को 19 सीटों से संतोष करना पड़ा था।ऐसे में कांग्रेस के सामने केवल भाजपा सरकार की आलोचना करना ही पर्याप्त नहीं होगा। पार्टी को अपने संगठनात्मक मतभेद दूर करने, प्रभावी स्थानीय नेतृत्व तैयार करने और मतदाताओं के सामने विश्वसनीय विकल्प प्रस्तुत करने की चुनौती भी होगी।दूसरी ओर, भाजपा अपने शासनकाल की उपलब्धियों, विकास परियोजनाओं और संगठनात्मक मजबूती के सहारे सत्ता बरकरार रखने की कोशिश करेगी।
क्या राहुल-प्रियंका और खरगे बदल पाएंगे चुनावी तस्वीर?
राष्ट्रीय नेताओं की जनसभाओं से कांग्रेस के चुनाव अभियान को राजनीतिक गति मिल सकती है। हालांकि, चुनाव परिणाम केवल भीड़ जुटाने से तय नहीं होते। उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय मुद्दे, बूथ प्रबंधन और मतदाताओं का विश्वास निर्णायक भूमिका निभाते हैं।उत्तराखंड में 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए सत्ता वापसी की बड़ी परीक्षा होगा, जबकि भाजपा के सामने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की चुनौती होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की सक्रियता उत्तराखंड में कांग्रेस की राजनीतिक किस्मत बदल पाएगी, या भाजपा एक बार फिर सत्ता में वापसी करने में सफल होगी?
उत्तराखंड चुनाव 2027: कांग्रेस की सत्ता वापसी की राह में गुटबाजी सबसे बड़ी चुनौती, क्या दिग्गज नेताओं में बन पाएगी एकजुटता?
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी कांग्रेस के सामने भाजपा के साथ-साथ अपनी आंतरिक गुटबाजी से निपटने की भी बड़ी चुनौती है। कांग्रेस हाईकमान प्रदेश में सत्ता वापसी की रणनीति बना रहा है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के बीच राजनीतिक वर्चस्व, संगठनात्मक प्रभाव और टिकट वितरण को लेकर संभावित मतभेद पार्टी की चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर सकते हैं।
हरीश रावत से प्रीतम सिंह तक, कई बड़े नेताओं का प्रभाव
उत्तराखंड कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत जैसे अनुभवी नेता सक्रिय हैं।इन नेताओं का अलग-अलग क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव है। हालांकि, समर्थकों की दावेदारी और नेतृत्व को लेकर प्रतिस्पर्धा पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से कांग्रेस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल व्यक्तिगत प्रभाव को सामूहिक चुनावी ताकत में बदलने का है।
दिल्ली की बैठक में एकजुटता पर जोर
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में उत्तराखंड के नेताओं को एकजुट होकर चुनाव लड़ने का संदेश दिया गया।हाईकमान की रणनीति बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, पेपर लीक और पलायन जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरने की है।
हरीश रावत की गैरमौजूदगी से उठे सवाल
दो नवंबर को दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर तालमेल को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, केवल बैठक में गैरमौजूदगी को गुटबाजी का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती
वर्ष 2022 में भाजपा ने 47 और कांग्रेस ने 19 विधानसभा सीटें जीती थीं। अब कांग्रेस को सत्ता वापसी के लिए संगठन मजबूत करने के साथ मतदाताओं का भरोसा भी जीतना होगा।2027 में कांग्रेस की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि हरीश रावत, गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य और अन्य वरिष्ठ नेता व्यक्तिगत राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर कितनी एकजुटता दिखाते हैं।




