LIVE 24 TV · 1/25

चुनाव आयोग का बड़ा प्रशासनिक सुधार: अब बैठकों का एजेंडा पहले होगा साझा, फैसलों का भी रखना होगा रिकॉर्ड

ये फैसले ऐसे समय आए हैं, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये सुधार चुनाव आयोग पर जनता का भरोसा मजबूत कर पाएंगे?

LIVE 24 TV · 2/25

नई दिल्ली। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। 26 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली से

LIVE 24 TV · 3/25

जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए। ये कदम चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर जारी बहस के बीच महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब हर बैठक का एजेंडा पहले से साझा किया जाएगा। आयोग ने तय किया है कि सभी बैठकों की कार्यसूची पहले प्रसारित होगी और बैठक के

LIVE 24 TV · 4/25

बाद कार्यवाही का आधिकारिक विवरण यानी मिनट्स जारी किया जाएगा। इससे निर्णय प्रक्रिया का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने और आयोग के सदस्यों के बीच समन्वय बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालांकि, आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ये दस्तावेज आम जनता के लिए भी उपलब्ध होंगे

LIVE 24 TV · 5/25

या नहीं। अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर भी सख्ती की गई है। अब विदेश यात्रा के लिए आयोग की मंजूरी आवश्यक होगी। साथ ही अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट हर वर्ष 31 दिसंबर तक पूरी करने का निर्देश दिया गया है। डिजिटल व्यवस्था में सुधार के

LIVE 24 TV · 6/25

तहत ECINet प्रणाली की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला हुआ है। भविष्य में नए आईटी पोर्टल और तकनीकी बदलाव आयोग की मंजूरी के बाद ही लागू होंगे। चुनाव सुधारों की नींव रखने वाली दो बड़ी समितियां, जानिए कैसे बदली भारत की चुनावी व्यवस्था

LIVE 24 TV · 7/25

भारतीय लोकतंत्र में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। इनमें दिनेश गोस्वामी समिति (1990) और इंद्रजीत गुप्ता समिति (1998) की सिफारिशों ने चुनावी व्यवस्था को नई दिशा दी। इन समितियों का उद्देश्य

LIVE 24 TV · 8/25

चुनावों में धनबल, फर्जी मतदान और अनियमितताओं पर अंकुश लगाना था। दिनेश गोस्वामी समिति ने सुझाए बड़े बदलाव वर्ष 1990 में वी.पी. सिंह सरकार के कार्यकाल में गठित दिनेश गोस्वामी समिति ने चुनाव आयोग को तीन सदस्यीय बनाने, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM)

LIVE 24 TV · 9/25

अपनाने और मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र उपलब्ध कराने की सिफारिश की।समिति ने एक उम्मीदवार के दो से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध, जमानत राशि बढ़ाने और बूथ कैप्चरिंग रोकने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों का भी सुझाव दिया। इनमें से कई

LIVE 24 TV · 10/25

सिफारिशें बाद में चुनावी व्यवस्था का हिस्सा बनीं। इंद्रजीत गुप्ता समिति ने चुनावी खर्च पर उठाए सवाल वर्ष 1998 में गठित इंद्रजीत गुप्ता समिति ने चुनावों में बढ़ते धनबल को नियंत्रित करने के लिए सरकारी वित्त पोषण की सिफारिश की। समिति का प्रस्ताव था कि

LIVE 24 TV · 11/25

शुरुआत में राजनीतिक दलों को नकद राशि देने के बजाय ईंधन, संचार सुविधाएं, मतदाता सूची और प्रचार के लिए मीडिया समय जैसी सहायता दी जाए।यह सुविधा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों तक सीमित रखने और उनके खातों का ऑडिट अनिवार्य करने पर जोर दिया गया। समिति ने

LIVE 24 TV · 12/25

भविष्य में पूर्ण सरकारी वित्त पोषण की संभावना भी जताई थी। चुनाव सुधारों पर विधि आयोग की बड़ी सिफारिशें: गंभीर आरोप तय होने पर चुनाव लड़ने पर रोक, पेड न्यूज पर सजा का प्रस्ताव नई दिल्ली। भारतीय राजनीति को अपराध, धनबल और भ्रष्टाचार के प्रभाव से मुक्त

LIVE 24 TV · 13/25

करने के लिए भारतीय विधि आयोग ने अपनी 244वीं रिपोर्ट (2014) और 255वीं रिपोर्ट (2015) में कई महत्वपूर्ण चुनावी सुधारों की सिफारिश की थी। इनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना था। गंभीर आपराधिक मामलों में चुनाव लड़ने

LIVE 24 TV · 14/25

पर रोक की सिफारिश विधि आयोग ने प्रस्ताव दिया था कि जिन उम्मीदवारों पर पांच वर्ष या उससे अधिक की अधिकतम सजा वाले गंभीर अपराधों में अदालत द्वारा आरोप तय किए जा चुके हैं, उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाए। हालांकि, राजनीतिक प्रतिशोध से बचने के

LIVE 24 TV · 15/25

लिए आयोग ने यह सुरक्षा उपाय भी सुझाया कि नामांकन पत्रों की जांच से पहले के एक वर्ष के भीतर तय आरोपों के आधार पर अयोग्यता लागू न हो। प्रस्तावित अयोग्यता की अवधि छह वर्ष या बरी होने तक, जो पहले हो, रखी गई थी।इसके अतिरिक्त, चुनावी हलफनामे में झूठी

LIVE 24 TV · 16/25

जानकारी देने पर न्यूनतम दो वर्ष की कैद और दोषसिद्धि पर चुनाव लड़ने से अयोग्यता का सुझाव दिया गया। संविधान के अनुच्छेद 324 से चुनाव आयोग को कितनी ताकत? भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का सबसे महत्वपूर्ण आधार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हैं। इस जिम्मेदारी को

LIVE 24 TV · 17/25

निभाने के लिए संविधान ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को विशेष अधिकार और संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की है। संविधान के भाग-15 में अनुच्छेद 324 से 329 तक चुनाव संबंधी प्रमुख प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। अनुच्छेद 324: चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्ति

LIVE 24 TV · 18/25

अनुच्छेद 324 के अनुसार लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण निर्वाचन आयोग के पास है। मतदाता सूचियों की तैयारी और चुनाव प्रक्रिया के संचालन में आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयोग में एक

LIVE 24 TV · 19/25

मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं। वर्ष 1993 से तीन सदस्यीय आयोग की व्यवस्था निरंतर लागू है। नियुक्ति और पद से हटाने के क्या हैं नियम? वर्ष 2023 के कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते

LIVE 24 TV · 20/25

हैं। चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। आयुक्तों का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, निर्धारित है। मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के

LIVE 24 TV · 21/25

न्यायाधीश की तरह विशेष संवैधानिक प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है। अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना नहीं हटाया जा सकता। चुनाव आयोग के पास कौन-कौन सी शक्तियां? निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करता है, आदर्श आचार संहिता

LIVE 24 TV · 22/25

के पालन की निगरानी करता है, राजनीतिक दलों को मान्यता देता है और चुनाव चिह्न आवंटित करता है।कानूनी प्रावधानों के तहत आयोग मतदान में गंभीर गड़बड़ी होने पर पुनर्मतदान का आदेश भी दे सकता है।हालांकि, निर्वाचन क्षेत्रों का सामान्य परिसीमन अलग परिसीमन आयोग

LIVE 24 TV · 23/25

करता है। निर्वाचन आयोग की शक्तियां भी संविधान और लागू कानूनों के अधीन हैं, असीमित नहीं। लोकतंत्र में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता क्यों जरूरी? संविधान के अनुच्छेद 325 और 326 क्रमशः भेदभावरहित मतदाता सूची तथा वयस्क मताधिकार की व्यवस्था को मजबूती देते हैं।

LIVE 24 TV · 24/25

वहीं अनुच्छेद 329 चुनावी विवादों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती देने का प्रावधान करता है। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सत्ता में कोई भी राजनीतिक दल हो, चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों। सबसे बड़ा सवाल यह

LIVE 24 TV · 25/25

है कि क्या केवल संवैधानिक अधिकार पर्याप्त हैं, या चुनाव आयोग की वास्तविक स्वतंत्रता, नियुक्ति प्रक्रिया और जवाबदेही को लेकर अतिरिक्त सुधारों की भी आवश्यकता है?

पूरी खबर पढ़ें