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AIIMS निदेशक को जाना पड़ा निजी अस्पताल! 7 साल बाद भी कैथ लैब क्यों नहीं?

गोरखपुर एम्स की डॉ. विभा दत्ता की अचानक तबीयत बिगड़ने से संस्थान में चिंता का माहौल बन गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बुधवार को डॉ. विभा दत्ता अपने आवास पर मौजूद थीं। इसी दौरान उन्हें अचानक चक्कर आया और उनकी तबीयत बिगड़ गई।

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AIIMS निदेशक को जाना पड़ा निजी अस्पताल! 7 साल बाद भी कैथ लैब क्यों नहीं?

LIVE 24 TV | विशेष रिपोर्ट | 30 अक्टूबर 2026

गोरखपुर, 30 अक्टूबर 2026। पूर्वांचल में बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) गोरखपुर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार मामला किसी आम मरीज का नहीं, बल्कि संस्थान की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता का है। बुधवार, 28 अक्टूबर को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें पहले एम्स की इमरजेंसी में ले जाया गया, लेकिन हृदय संबंधी जांच के लिए बाद में एक निजी अस्पताल भेजना पड़ा। इसकी प्रमुख वजह एम्स गोरखपुर में सात साल बाद भी कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध नहीं होना बताया जा रहा है।

हालांकि, बाद में डॉ. विभा दत्ता ने स्पष्ट किया कि उन्हें एहतियातन निजी अस्पताल ले जाया गया था। उनकी सभी जांच रिपोर्ट सामान्य थीं और निजी अस्पताल में भर्ती होने या किसी विशेष उपचार की जरूरत नहीं पड़ी।

आवास पर अचानक बिगड़ी तबीयत

गोरखपुर एम्स की डॉ. विभा दत्ता की अचानक तबीयत बिगड़ने से संस्थान में चिंता का माहौल बन गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बुधवार को डॉ. विभा दत्ता अपने आवास पर मौजूद थीं। इसी दौरान उन्हें अचानक चक्कर आया और उनकी तबीयत बिगड़ गई। शुरुआती खबरों में उनके बेहोश होने की बात भी सामने आई। स्थिति को देखते हुए तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई।

घटना की जानकारी मिलते ही एम्स गोरखपुर के चिकित्सक सक्रिय हो गए। डॉ. विभा दत्ता को तुरंत संस्थान की इमरजेंसी में पहुंचाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनकी स्वास्थ्य जांच शुरू की। चिकित्सकों ने सबसे पहले रक्तचाप और अन्य जरूरी स्वास्थ्य मापदंडों की जांच की। प्रारंभिक जांच में उनका रक्तचाप और कई अन्य रिपोर्ट सामान्य पाई गईं। हालांकि, अचानक चक्कर आने और तबीयत बिगड़ने के कारणों का तत्काल पता नहीं चल सका। डॉक्टरों ने किसी संभावित गंभीर हृदय संबंधी समस्या की आशंका को ध्यान में रखते हुए आगे की जांच कराने का निर्णय लिया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एम्स गोरखपुर में उस समय कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में चिकित्सकों ने एहतियात बरतते हुए डॉ. विभा दत्ता को बेहतर जांच और आवश्यक उपचार के लिए निजी अस्पताल रेफर करने का फैसला किया। उन्हें सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस के आवागमन का रास्ता साफ कराया गया। इसके बाद चिकित्सकों की निगरानी में उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाया गया, ताकि बिना देरी के आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

फिलहाल उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। शुरुआती जांच सामान्य आने के बावजूद डॉक्टरों ने अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक समझा। हृदय संबंधी किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि भी नहीं हुई है।

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निजी अस्पताल में जांच सामान्य, निदेशक ने खुद दी सफाई

गोरखपुर एम्स की निदेशक डॉ. विभा दत्ता की अचानक तबीयत बिगड़ने और उन्हें निजी अस्पताल ले जाए जाने की खबर सामने आने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई। हालांकि, 30 अक्टूबर को डॉ. विभा दत्ता ने खुद मीडिया के सामने आकर पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि उन्हें किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि नहीं हुई थी, बल्कि डॉक्टरों की सलाह पर एहतियात के तौर पर निजी अस्पताल ले जाया गया था।

आपको बता दें कि डॉ. विभा दत्ता कीं शुरुआती रिपोर्ट सामान्य थीं, लेकिन चिकित्सकों को आशंका थी कि कहीं हृदय से जुड़ी कोई ऐसी समस्या न हो, जिसके लिए कैथ लैब में जांच की जरूरत पड़ सकती है। एम्स गोरखपुर में कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें निजी अस्पताल भेजने का फैसला किया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उनकी जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया और सभी जरूरी मापदंड सामान्य पाए।

डॉ. दत्ता ने स्पष्ट किया कि निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती नहीं किया गया और न ही किसी विशेष उपचार की आवश्यकता पड़ी। जांच पूरी होने के बाद वह लगभग आधे घंटे में वापस लौट आईं। एम्स प्रशासन के मुताबिक, निदेशक की तबीयत अब पूरी तरह सामान्य है। गुरुवार को उन्होंने नियमित रूप से कार्यालय पहुंचकर प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। इसके अलावा आयुष विंग में मेडिकल ऑफिसर पद के लिए आयोजित साक्षात्कार प्रक्रिया में भी हिस्सा लिया।

इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट हुआ कि निजी अस्पताल जाने का निर्णय किसी गंभीर हृदय रोग की पुष्टि के कारण नहीं, बल्कि संभावित स्वास्थ्य जोखिम को ध्यान में रखकर लिया गया था। हालांकि, इस घटना ने एम्स गोरखपुर में कैथ लैब जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधा की अनुपलब्धता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

कैथ लैब का 70 प्रतिशत काम पूरा

विवाद के बीच एम्स प्रशासन की ओर से कैथ लैब की स्थापना को लेकर भी जानकारी सामने आई है। 30 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान में कैथ लैब स्थापित करने का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। आवश्यक मशीनों और उपकरणों की आपूर्ति की प्रक्रिया जारी है। डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि आधुनिक कैथ लैब की स्थापना के लिए महंगे चिकित्सा उपकरणों और विशेष व्यवस्थाओं की आवश्यकता होती है।

उनके अनुसार, इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से लगभग 14 से 15 करोड़ रुपये का विशेष बजट मांगा गया था, जिसे मंजूरी मिली है। एम्स की वित्तीय समिति के दस्तावेजों में भी बाइप्लेन कैथ लैब की खरीद के लिए करीब 12.70 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च वाले प्रस्ताव को मंजूरी देने का उल्लेख है। डॉ. दत्ता ने दिसंबर 2026 तक कैथ लैब शुरू होने की उम्मीद जताई है। हालांकि इसके संचालन की वास्तविक तारीख मशीनों की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और अन्य आवश्यक तैयारियां पूरी होने पर निर्भर करेगी। कैथ लैब शुरू होने के बाद संस्थान में हृदय रोगियों की उन्नत जांच और उपचार की सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा।

पूर्वांचल के मरीजों के लिए क्यों जरूरी है कैथ लैब?

गोरखपुर एम्स पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान है। यहां गोरखपुर के अलावा देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर और बिहार के सीमावर्ती जिलों से भी मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में एम्स गोरखपुर में कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध नहीं होना हृदय रोगियों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। कैथ लैब में हृदय की धमनियों की जांच के लिए कोरोनरी एंजियोग्राफी और जरूरत पड़ने पर एंजियोप्लास्टी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं की जाती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक के कुछ मामलों में समय पर उपचार मिलना बेहद जरूरी होता है। यदि किसी गंभीर मरीज को जांच या उपचार के लिए दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़े, तो अतिरिक्त समय लग सकता है। आपातकालीन परिस्थितियों में यह देरी मरीज की जान के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। गोरखपुर एम्स की निदेशक डॉ. विभा दत्ता को भी संभावित हृदय संबंधी समस्या की जांच के लिए निजी अस्पताल ले जाना पड़ा था। हालांकि, उनकी जांच सामान्य आई थी।

इस घटना ने संस्थान में आधुनिक हृदय चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता को फिर चर्चा में ला दिया है। कैथ लैब के साथ प्रशिक्षित हृदय रोग विशेषज्ञों, तकनीकी कर्मचारियों और चौबीसों घंटे आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता भी जरूरी है।

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