
‘आलू से सोना’ पर पीएम मोदी का राहुल पर तंज!
गुजरात के बनासकांठा में पीएम मोदी ने ‘आलू से सोना’ बयान पर राहुल गांधी पर बिना नाम लिए तंज कसा। उन्होंने किसानों की मेहनत, आधुनिक खेती और डेयरी उद्योग की उपलब्धियों की सराहना की।

LIVE 24 TV | विशेष रिपोर्ट | 30 अक्टूबर 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय गुजरात दौरे के तहत बनासकांठा पहुंचे। यहां भीलड़ी में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने किसानों की मेहनत और कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों की जमकर सराहना की।
पीएम मोदी ने कहा कि बनासकांठा का आलू आज दुनियाभर में प्रसिद्ध हो चुका है। उन्होंने बिना नाम लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि यहां कोई आकर यह दावा नहीं कर सकता कि वह आलू से सोना बनाएगा, क्योंकि बनासकांठा के किसान अपनी मेहनत से पहले ही ऐसा कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को वर्ष 2017 में राहुल गांधी के एक भाषण से जुड़े चर्चित 'आलू से सोना' विवाद पर राजनीतिक कटाक्ष माना जा रहा है। हालांकि उस पुराने भाषण में राहुल गांधी ने यह दावा प्रधानमंत्री मोदी से जोड़कर किया था। पीएम मोदी ने बताया कि नर्मदा का पानी पहुंचने और ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से बनासकांठा की खेती में बड़ा बदलाव आया है।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने, कृषि क्षेत्र में तकनीक के उपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने क्षेत्र में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।
राहुल गांधी के ‘आलू से सोना’ वाले बयान का असली विवाद क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर 2026 को गुजरात के बनासकांठा में आयोजित जनसभा के दौरान ‘आलू से सोना’ वाली टिप्पणी करके एक बार फिर पुराने राजनीतिक विवाद को चर्चा में ला दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बनासकांठा के किसान अपनी मेहनत से पहले ही आलू को सोने के समान मूल्यवान बना रहे हैं। उनकी इस टिप्पणी को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वर्ष 2017 के चर्चित भाषण पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, इस विवाद की शुरुआत 12 नवंबर 2017 को गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी। राहुल गांधी ने पाटन में आयोजित जनसभा में किसानों से किए गए वादों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा था। अपने भाषण में राहुल गांधी ने आलू से सोना बनाने वाली मशीन का उदाहरण दिया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि किसानों से ऐसी मशीन लगाने की बात कही गई थी, जिसमें एक तरफ से आलू डालने पर दूसरी तरफ से सोना निकलेगा।
उनके भाषण का करीब 20 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो को देखकर ऐसा प्रतीत होता था कि राहुल गांधी खुद आलू से सोना बनाने वाली मशीन लगाने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, पूरे भाषण का वीडियो सामने आने के बाद तस्वीर अलग दिखाई दी। राहुल गांधी वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी के कथित वादों पर व्यंग्य कर रहे थे। उन्होंने अपने भाषण में स्पष्ट कहा था कि ये उनके शब्द नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी के शब्द हैं।
तथ्य-जांच करने वाली संस्था ऑल्ट न्यूज और अन्य मीडिया संस्थानों ने जांच में पाया कि वायरल वीडियो को अधूरे संदर्भ में साझा किया गया था। राहुल गांधी ने स्वयं आलू से सोना बनाने का वादा नहीं किया था। लेकिन इस विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भी है। राहुल गांधी ने जिस कथित वादे को प्रधानमंत्री मोदी से जोड़ा था, उसका भी कोई विश्वसनीय सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया। यानी प्रधानमंत्री मोदी ने वास्तव में ऐसी मशीन लगाने का वादा किया था, यह दावा भी प्रमाणित नहीं है।
इसके बावजूद ‘आलू से सोना’ वाली टिप्पणी वर्षों से भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी का विषय बनी हुई है। भाजपा नेताओं ने इस बयान के जरिए राहुल गांधी पर कई बार निशाना साधा है। अब बनासकांठा में प्रधानमंत्री मोदी ने इसी पुराने विवाद का जिक्र करते हुए किसानों की उपलब्धियों को रेखांकित किया।
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पीएम मोदी ने जारी की किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी की। इसके तहत देशभर के 9.34 करोड़ से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में ₹18,690 करोड़ से ज्यादा की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने गुजरात में ₹14 हजार करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में सड़क, कृषि, डेयरी उद्योग, परिवहन और बुनियादी ढांचे से संबंधित महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं।
पीएम मोदी ने कृषि अवसंरचना को मजबूत बनाने के लिए 521 परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। साथ ही 12 बागवानी क्लस्टरों से जुड़ी गतिविधियों की शुरुआत की, जिनका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित करना है। प्रधानमंत्री ने दो नई रेल सेवाओं, अहमदाबाद (साबरमती)-वाराणसी एक्सप्रेस और मेहसाणा-बेचराजी-साबरमती मेमू ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने, आधुनिक खेती को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए लगातार काम कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए किसानों के कल्याण और आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के अन्नदाता विकसित भारत के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक हैं और सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी करते हुए देशभर के 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में ₹18,690 करोड़ से ज्यादा की राशि ट्रांसफर की।
उन्होंने बताया कि गुजरात के 50 लाख से अधिक किसानों को इस किस्त का लाभ मिला है। उनके बैंक खातों में ₹1,000 करोड़ से ज्यादा की राशि पहुंची है। वहीं, बनासकांठा जिले के लाखों किसानों के खातों में करीब ₹50 करोड़ भेजे गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2013-14 की तुलना में देश का कृषि बजट पांच गुना से अधिक बढ़ चुका है।
उन्होंने दावा किया कि बीते वर्षों में सरकार की नीतियों और योजनाओं के कारण किसानों को ₹50 लाख करोड़ से अधिक का आर्थिक लाभ या बचत हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार आधुनिक खेती, सिंचाई, कृषि तकनीक और किसानों की आर्थिक मजबूती के लिए प्रतिबद्ध है।

बनासकांठा में पीएम मोदी के भाषण की 5 बड़ी बातें
1. पानी और बिजली बचाने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 25 साल पहले बनासकांठा में बिजली और पानी की गंभीर समस्या थी। उस समय जब वे लोगों से पानी और बिजली बचाने की अपील करते थे, तो कई लोग उनका विरोध करते थे। उन्होंने कहा कि लगातार प्रयासों से आज परिस्थितियां बदल गई हैं, लेकिन भविष्य के लिए पानी और बिजली का संरक्षण अब भी जरूरी है।
2. गोबर से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार किसानों को गोबर और कृषि अवशेषों से अतिरिक्त आमदनी दिलाना चाहती है। इसके लिए बायोगैस, बायो-CNG और जैविक खाद बनाने का बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।
3. पशुओं का मुफ्त टीकाकरण, दूध उत्पादन में बढ़ोतरी का दावा
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के मुफ्त टीकाकरण अभियान से 8 करोड़ से अधिक किसानों के पशुओं को लाभ मिला है। इससे पशुपालकों के खर्च में कमी आई है। उन्होंने बताया कि 2013-14 में प्रति गाय या भैंस औसतन 5 लीटर से भी कम दूध उत्पादन होता था, जो अब बढ़कर लगभग 8 लीटर हो गया है।
4. कृषि बजट पांच गुना, किसानों के खातों में हजारों करोड़ रुपये
पीएम मोदी ने कहा कि वर्ष 2013-14 की तुलना में देश का कृषि बजट पांच गुना बढ़ चुका है। पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त के तहत देश के 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में करीब 18,690 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। गुजरात के 50 लाख से अधिक किसानों को लगभग 1,000 करोड़ रुपये और बनासकांठा के किसानों को करीब 50 करोड़ रुपये का लाभ मिला।
5. बनासकांठा से जुड़ी 25 साल पुरानी यादें ताजा कीं
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 25 वर्षों के सार्वजनिक सेवा सफर को याद करते हुए बनासकांठा से अपने पुराने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम बनासकांठा में आयोजित हुआ था। उन्होंने क्षेत्र की जनता से मिले स्नेह और समर्थन को याद करते हुए लोगों का आभार व्यक्त किया।
किसानों की मेहनत से कैसे बदली बनासकांठा की पहचान?
बनासकांठा गुजरात का प्रमुख कृषि और पशुपालन क्षेत्र है। यहां आलू उत्पादन के साथ डेयरी उद्योग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि नर्मदा का पानी मिलने और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों के विस्तार से बनासकांठा के कृषि क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन आया है। बेहतर सिंचाई व्यवस्था से किसानों के लिए खेती की संभावनाएं बढ़ी हैं। आलू जैसे उत्पादों का प्रसंस्करण करके फ्रेंच फ्राइज, चिप्स और अन्य खाद्य उत्पाद तैयार करना भी कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
इसका आर्थिक महत्व यह है कि किसानों की उपज केवल कच्चे उत्पाद के रूप में बेचने तक सीमित नहीं रहती। प्रसंस्करण, भंडारण और बाजार तक पहुंच बढ़ने से कृषि मूल्य श्रृंखला में अधिक आमदनी और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ किसानों को मिलने वाली कीमतों और उत्पादन लागत पर निर्भर करता है।
पीएम मोदी ने गुजरात को दी ₹14 हजार करोड़ से ज्यादा की सौगात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को गुजरात के बनासकांठा जिले में ₹14,000 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि, पशुपालन, डेयरी उद्योग, परिवहन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
प्रधानमंत्री ने बनासकांठा के भीलड़ी में 127 एकड़ में विकसित भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC) राष्ट्र को समर्पित किया। लगभग ₹325 करोड़ की लागत से तैयार इस केंद्र में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुओं की नस्ल सुधारने और दूध उत्पादन बढ़ाने पर काम किया जाएगा। यहां आईवीएफ और भ्रूण प्रत्यारोपण जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होगा। इससे पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पीएम मोदी ने बनास डेयरी के दो नए बायो-सीएनजी संयंत्रों की आधारशिला भी रखी। थराद और राधनपुर में बनने वाले इन संयंत्रों में प्रतिदिन क्रमशः 75 और 100 मीट्रिक टन गोबर का प्रसंस्करण किया जा सकेगा। इनसे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और गोबर के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने सनादर में आलू प्रसंस्करण संयंत्र के विस्तार का उद्घाटन किया। इस परियोजना से आलू के मूल्य संवर्धन और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में सहायता मिलने की उम्मीद है। कृषि अवसंरचना कोष के तहत लगभग ₹4,950 करोड़ की लागत वाली 521 परियोजनाएं भी राष्ट्र को समर्पित की गईं। इनमें कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, ग्रीनहाउस और खाद्य प्रसंस्करण सुविधाएं शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने 12 बागवानी क्लस्टरों में गतिविधियों की शुरुआत भी की। ये क्लस्टर लगभग 1.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होंगे और इनसे 1.3 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। उत्तरी गुजरात के दो क्लस्टर विशेष रूप से आलू उत्पादन पर केंद्रित होंगे। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से कृषि उत्पादों का भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन बेहतर होगा तथा किसानों और पशुपालकों के लिए आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा होंगे।
गुजरात में बनेंगे 4,030 नए आंगनवाड़ी केंद्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा में बच्चों के पोषण और शुरुआती शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। उन्होंने राज्य में 4,030 नए बाल-अनुकूल आंगनवाड़ी केंद्रों की आधारशिला रखी और तैयार हो चुके 361 केंद्रों का उद्घाटन किया। इस पहल पर लगभग 800 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार के अनुसार, इससे चार लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
नए आंगनवाड़ी केंद्रों का उद्देश्य छोटे बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है। यहां प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से संबंधित सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसी अवसर पर प्रधानमंत्री ने कृषि अवसंरचना कोष के अंतर्गत पूरी हुई 521 परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। इन परियोजनाओं पर करीब 4,950 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इनमें कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन, गोदाम, अनाज भंडारण के साइलो, पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस तथा प्राथमिक और द्वितीयक कृषि प्रसंस्करण सुविधाएं शामिल हैं।
इन परियोजनाओं से देशभर के किसानों को फसल के भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही कृषि उपज की बर्बादी घटाने, उत्पादों का मूल्य बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर भी जोर है।
बनासकांठा में अनोखी 'चारपाई सभा'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस आयोजित जनसभा में एक अनोखी व्यवस्था के कारण चर्चा में रहें। आमतौर पर राजनीतिक सभाओं में लोगों के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई जाती हैं, लेकिन इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चारपाइयों की व्यवस्था की गई थी। ग्रामीण अंदाज में आयोजित इस सभा में किसानों और अन्य लोगों ने चारपाई पर बैठकर प्रधानमंत्री का संबोधन सुना। प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से इस अनोखी व्यवस्था की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले लोगों को यह देखकर आश्चर्य होगा कि इतनी बड़ी जनसभा में लोग कुर्सियों के बजाय चारपाइयों पर बैठे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि बनासकांठा के लोगों ने गांवों की पुरानी परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अगर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अधिकारियों को पहले ही इस आयोजन की जानकारी दे दी जाती, तो यह कार्यक्रम विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज हो सकता था। प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर सभा में मौजूद लोगों ने उत्साह दिखाया। चारपाई पर बैठकर आयोजित इस जनसभा को ग्रामीण संस्कृति और परंपरागत सामाजिक मेलजोल से जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल, भारतीय गांवों में चारपाई केवल सोने या आराम करने का साधन नहीं रही है। गांवों में चौपाल, सामाजिक बैठकों और सामूहिक चर्चाओं के दौरान चारपाई का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर किसानों को देश के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कृषि, डेयरी उद्योग, आधुनिक तकनीक और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़ी सरकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। बनासकांठा की यह चारपाई सभा अपनी अनोखी बैठक व्यवस्था और प्रधानमंत्री की विश्व रिकॉर्ड वाली टिप्पणी के कारण चर्चा में रही। हालांकि इस आयोजन के नाम कोई आधिकारिक गिनीज विश्व रिकॉर्ड दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है।
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पीएम मोदी की अपील: ‘रन फॉर यूनिटी’ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें युवा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर देशवासियों से ‘रन फॉर यूनिटी’ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर को पूरा देश राष्ट्रीय एकता दिवस मनाएगा और इस अवसर पर देशभर में एकता दौड़ का आयोजन किया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि सरदार पटेल ने भारत को एकजुट करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। उनका जीवन देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय एकजुटता के लिए प्रेरणास्रोत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से ‘रन फॉर यूनिटी’ की शानदार तैयारियों की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे 31 अक्टूबर की सुबह आयोजित एकता दौड़ में उत्साहपूर्वक भाग लें। पीएम मोदी ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य देशवासियों में एकता, भाईचारे और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना है।
उन्होंने सभी नागरिकों से सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों को अपनाने और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। राष्ट्रीय एकता दिवस हर साल 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती पर मनाया जाता है। इस दिन देशभर में एकता दौड़ सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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