
रणजी ट्रॉफी में 400 रनों का महाविस्फोट! चिन्मय सुतार ने तोड़ा पृथ्वी शॉ का रिकॉर्ड, 78 साल बाद रचा इतिहास
करीब 78 साल बाद चिन्मय सुतार ने 400 रनों का आंकड़ा छूकर उस दुर्लभ उपलब्धि को दोहराया। हालांकि, निंबालकर का 443 रनों का रिकॉर्ड अब भी अटूट है। चिन्मय की पारी रणजी इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी बन गई है।

LIVE 24 TV | खेल समाचार | 19 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली। भारतीय घरेलू क्रिकेट की प्रतिष्ठित प्रतियोगिता रणजी ट्रॉफी में एक ऐसा ऐतिहासिक प्रदर्शन देखने को मिला है, जिसने क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। मिजोरम के 29 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने नागालैंड के विरुद्ध नाबाद 400 रनों की असाधारण पारी खेलकर नया इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि के साथ वह रणजी ट्रॉफी के इतिहास में 400 रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने पृथ्वी शॉ के 379 रनों के कीर्तिमान को भी पीछे छोड़ दिया है।
517 गेंदों में 400 रन, चौकों और छक्कों की बरसात
रणजी ट्रॉफी के 2026-27 सत्र के प्लेट वर्ग में मिजोरम और नागालैंड के बीच मुकाबला 18 अक्टूबर को नागालैंड के सोविमा स्थित क्रिकेट स्टेडियम में शुरू हुआ।
मुकाबले के दूसरे दिन, सोमवार 19 अक्टूबर को चिन्मय सुतार ने अपनी शानदार बल्लेबाजी से इतिहास रच दिया। उन्होंने 517 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 400 रन बनाए। इस ऐतिहासिक पारी में उनके बल्ले से 46 चौके और 7 छक्के निकले।
इस प्रकार उन्होंने 226 रन केवल चौकों और छक्कों से बनाए। उनकी इस शानदार पारी की बदौलत मिजोरम ने अपनी पहली पारी 9 विकेट पर 581 रन बनाकर समाप्त घोषित कर दी।
चिन्मय की इस पारी में धैर्य, एकाग्रता, तकनीकी दक्षता और आक्रामक बल्लेबाजी का अद्भुत संगम देखने को मिला।
78 वर्षों बाद दोहराया गया ऐतिहासिक कारनामा
रणजी ट्रॉफी के इतिहास में इससे पहले वर्ष 1948-49 के सत्र में महाराष्ट्र के महान बल्लेबाज भाऊसाहेब निंबालकर ने काठियावाड़ के विरुद्ध नाबाद 443 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी।
यह उपलब्धि आज भी रणजी ट्रॉफी के इतिहास में किसी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है।
लगभग 78 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद चिन्मय सुतार ने 400 रनों का आंकड़ा छूकर इतिहास के उस गौरवशाली अध्याय को फिर जीवंत कर दिया है।
हालांकि, भाऊसाहेब निंबालकर का 443 रनों का कीर्तिमान अब भी सुरक्षित है, लेकिन चिन्मय सुतार की 400 रनों की पारी रणजी ट्रॉफी के इतिहास का दूसरा सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बन गई है।
पृथ्वी शॉ का 379 रनों का कीर्तिमान टूटा
भारतीय क्रिकेट के चर्चित बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने जनवरी 2023 में मुंबई की ओर से खेलते हुए असम के विरुद्ध 379 रनों की शानदार पारी खेली थी।
उनकी यह पारी रणजी ट्रॉफी के इतिहास में दूसरे सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर के रूप में दर्ज थी।
अब चिन्मय सुतार ने नाबाद 400 रन बनाकर पृथ्वी शॉ को इस सूची में पीछे छोड़ दिया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि घरेलू क्रिकेट में एक पारी के दौरान इतने अधिक रन बनाने के लिए बल्लेबाज को लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने के साथ लगातार अपनी एकाग्रता और शारीरिक क्षमता बनाए रखनी पड़ती है।
कौन हैं 400 रन बनाने वाले चिन्मय सुतार?
चिन्मय सुतार का जन्म 3 मई 1997 को मुंबई में हुआ था। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और लंबे समय से घरेलू क्रिकेट से जुड़े रहे हैं।
उनके पिता राजेश सुतार भी क्रिकेट से जुड़े रहे हैं और मुंबई में क्रिकेट प्रशिक्षक के रूप में कार्य कर चुके हैं।
चिन्मय भारतीय अंडर-23 उभरती टीम का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। मुंबई के घरेलू क्रिकेट से जुड़े रहने के बाद उन्होंने 2026-27 के सत्र से पहले मिजोरम की टीम का रुख किया।
उनकी सफलता की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने अपने दूसरे ही प्रथम श्रेणी मुकाबले में 400 रन बनाने का असाधारण कारनामा कर दिखाया।
इससे पहले अपने प्रथम श्रेणी पदार्पण मुकाबले में वह 99 रन बनाकर आउट हो गए थे और अपना पहला शतक पूरा करने से केवल एक रन दूर रह गए थे।
लेकिन इस बार उन्होंने न केवल अपना पहला शतक पूरा किया, बल्कि उसे 400 रनों की ऐतिहासिक पारी में बदल दिया।
भारतीय घरेलू क्रिकेट के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि
चिन्मय सुतार का यह प्रदर्शन केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय घरेलू क्रिकेट में मौजूद प्रतिभाओं की अपार संभावनाओं का भी प्रमाण है।
मिजोरम जैसी अपेक्षाकृत कम चर्चित क्रिकेट टीम के खिलाड़ी का इतना बड़ा कीर्तिमान स्थापित करना इस बात को दर्शाता है कि अवसर और निरंतर परिश्रम मिलने पर खिलाड़ी असाधारण सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
चिन्मय की यह पारी उन युवा क्रिकेटरों के लिए भी प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों और सीमित अवसरों के बावजूद क्रिकेट में अपना भविष्य बनाने का सपना देखते हैं।
रणजी ट्रॉफी के इतिहास में अब चिन्मय सुतार का नाम भाऊसाहेब निंबालकर जैसे ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाज के साथ दर्ज हो गया है।
उनकी यह उपलब्धि भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।



