
चक्रवात ‘मुरासु’ का खतरा: आंध्र तट से टकराने की आशंका, 8 राज्यों में बारिश का अलर्ट
चक्रवात ‘मुरासु’ को लेकर आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में चिंता बढ़ गई है। तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए नेल्लोर, कावली, ओंगोल, प्रकाशम और आसपास के समुद्री इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत बताई जा रही है।

LIVE 24 TV | मौसम समाचार | 2 नवंबर 2026
नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ अब गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल चुका है। सोमवार, 2 नवंबर की सुबह यह तूफान तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 200 किलोमीटर पूर्व-उत्तरपूर्व में पहुंच गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात तेजी से आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। इसके सोमवार देर रात से मंगलवार तड़के के बीच आंध्र प्रदेश के ओंगोल के आसपास तट से टकराने की आशंका है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तट से टकराने के दौरान हवाओं की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जबकि तेज झोंकों के साथ यह 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा के तटीय इलाकों में तेज बारिश, आंधी और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा बना हुआ है।
इसके साथ ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना समेत देश के कई हिस्सों में मौसम बदलने के आसार हैं। दूसरी तरफ उत्तर भारत में सर्दी की आहट महसूस होने लगी है। उत्तर प्रदेश के देवरिया और कुशीनगर सहित कई शहरों में सोमवार सुबह कोहरा देखने को मिला। बिहार में भी धुंध के कारण दृश्यता प्रभावित हुई है।
मौसम विभाग की 2 नवंबर सुबह 5:30 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, चक्रवात मुरासु बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में सक्रिय था। इसका केंद्र 13.9 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 81.8 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। पिछले छह घंटों के दौरान यह चक्रवात लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ा था। मौसम विभाग का अनुमान है कि तूफान अब उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट को पार करेगा।
IMD के अनुसार, 2 नवंबर रात 11:30 बजे से 3 नवंबर सुबह 4 बजे के बीच नेल्लोर और नरसापुर के मध्य ओंगोल के करीब इसका लैंडफॉल हो सकता है। हालांकि चक्रवात की वास्तविक स्थिति और समय में बदलाव संभव है।
आंध्र प्रदेश में चक्रवात ‘मुरासु’ का खतरा
चक्रवात ‘मुरासु’ को लेकर आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में चिंता बढ़ गई है। तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए नेल्लोर, कावली, ओंगोल, प्रकाशम और आसपास के समुद्री इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत बताई जा रही है। तेज हवाओं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों के कारण तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से निचले इलाकों, समुद्र किनारे स्थित बस्तियों और कमजोर मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए खतरा अधिक हो सकता है।
चक्रवात के तट के करीब पहुंचने या टकराने की स्थिति में तेज हवाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। कमजोर मकानों की छतों, बिजली के खंभों, पेड़ों, मोबाइल टावरों और अस्थायी निर्माणों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। कई स्थानों पर पेड़ गिरने से सड़कें अवरुद्ध हो सकती हैं, जबकि बिजली के तार टूटने से विद्युत आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहेगा।
लगातार भारी बारिश होने पर शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। निचले इलाकों में पानी जमा होने से घरों, दुकानों और सड़कों को नुकसान पहुंच सकता है। स्थानीय परिवहन सेवाओं के साथ स्कूलों, बाजारों और अन्य दैनिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।
चक्रवात के दौरान समुद्र में तेज हवाओं और ऊंची लहरों के कारण मछुआरों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण चिंता बन जाती है। खराब मौसम में समुद्र में जाने से बचना और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना आवश्यक है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों या प्रशासन द्वारा निर्धारित राहत केंद्रों में शरण लेना बेहतर होगा।
आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियां लोगों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। संभावित प्रभावित इलाकों में मौसम की निगरानी, सुरक्षित निकासी, राहत केंद्रों और आवश्यक सेवाओं की तैयारियां बेहद जरूरी हैं। चक्रवात का वास्तविक प्रभाव उसकी दिशा, तीव्रता और तट से टकराने के समय की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए लोगों को अफवाहों से बचते हुए भारतीय मौसम विभाग और जिला प्रशासन के ताजा निर्देशों का पालन करना चाहिए।
भारतीय मौसम विभाग के 2 नवंबर 2026 के बुलेटिन के अनुसार, चक्रवात ‘मुरासु’ के 2 नवंबर की रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच ओंगोल के पास आंध्र प्रदेश तट को पार करने की आशंका है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण बिजली आपूर्ति, सड़क यातायात तथा स्थानीय परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। किसानों की खड़ी फसलों, बागवानी और तटीय क्षेत्रों में मछली पकड़ने से जुड़ी गतिविधियों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और संभावित नुकसान को कम करना है। प्रशासनिक चेतावनियों के अनुसार समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचना और अनावश्यक यात्रा से बचना जरूरी है। वास्तविक नुकसान की स्थिति चक्रवात के गुजरने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मध्य प्रदेश में 5 नवंबर तक आंधी-बारिश के आसार
चक्रवात ‘मुरासु’ के संभावित प्रभाव और सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण मध्य प्रदेश में एक बार फिर मौसम बदलने के संकेत मिल रहे हैं। राज्य के कई हिस्सों में 5 नवंबर तक बादल छाने, गरज-चमक के साथ बारिश होने और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। इससे तापमान में गिरावट के साथ ठंड का असर भी बढ़ सकता है।
मौसम संबंधी पूर्वानुमान के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश में 1 से 5 नवंबर के बीच कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में 3 से 5 नवंबर के दौरान मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। कई इलाकों में बादलों की आवाजाही बढ़ने के साथ अचानक बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश में हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर हवा के झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल सकते हैं। गरज-चमक के दौरान लोगों को खुले स्थानों, बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी जा रही है।
बेमौसम बारिश से प्रदेश के किसानों की चिंता बढ़ सकती है। खेतों में खड़ी फसलों और कटाई के बाद खुले में रखी कृषि उपज को नुकसान पहुंचने का खतरा है। बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ने से कटाई, परिवहन और भंडारण संबंधी कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें और मौसम की स्थिति के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाएं।

छत्तीसगढ़ में 3 और 4 नवंबर को भारी बारिश की चेतावनी
चक्रवात मुरासु के कारण छत्तीसगढ़ में भी मौसम का मिजाज बदलने वाला है। राज्य के कई हिस्सों में 2 नवंबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। विशेष रूप से 3 और 4 नवंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इस दौरान गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जबकि तेज झोंकों की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और निचले क्षेत्रों में पानी जमा होने की आशंका है। खराब मौसम का असर ग्रामीण सड़कों और बिजली आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। प्रशासन को मौसम संबंधी चेतावनियों के आधार पर आवश्यक सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
ओडिशा में 2 से 4 नवंबर तक बारिश
आंध्र प्रदेश से सटे ओडिशा में भी चक्रवात ‘मुरासु’ के संभावित प्रभाव को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। मौसम संबंधी पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य में 2 से 4 नवंबर के बीच कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। विशेष रूप से दक्षिणी ओडिशा के जिलों में मौसम अधिक खराब हो सकता है। तेज हवाओं, गरज-चमक और भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
दक्षिणी ओडिशा में 3 और 4 नवंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। लगातार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव, सड़कों पर पानी जमा होने और यातायात बाधित होने का खतरा बढ़ सकता है। तेज हवाओं के कारण पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौसम विभाग के भुवनेश्वर तटीय बुलेटिन में ओडिशा के बंदरगाहों पर स्थानीय चेतावनी संकेत संख्या तीन बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि इसकी पुष्टि ताजा आधिकारिक बुलेटिन से की जानी चाहिए।
समुद्र में खराब मौसम और ऊंची लहरों की आशंका को देखते हुए मछुआरों तथा तटीय गतिविधियों से जुड़े लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने तथा अनावश्यक समुद्री यात्रा से बचने की जरूरत है।
तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक में भी बारिश का खतरा
मुरासु का प्रभाव आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। तमिलनाडु के चेन्नई, तिरुवल्लूर, चेंगलपट्टू और कांचीपुरम सहित कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। तेलंगाना में खम्मम, नलगोंडा, सूर्यापेट, महबूबनगर, नागरकुरनूल और वानापर्थी समेत कई जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है।
कर्नाटक के दक्षिणी आंतरिक क्षेत्रों में 2 और 3 नवंबर को बारिश हो सकती है। तटीय कर्नाटक में 3 नवंबर और उत्तरी आंतरिक क्षेत्रों में 3 से 4 नवंबर के दौरान भारी बारिश के आसार हैं। केरल के कुछ इलाकों में भी 4 नवंबर तक भारी बारिश हो सकती है। महाराष्ट्र के कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा क्षेत्रों में 5 नवंबर तक रुक-रुककर वर्षा होने का अनुमान है।
यूपी के 10 शहरों में कोहरा, सुबह दृश्यता प्रभावित
एक तरफ दक्षिण भारत में चक्रवात का खतरा है, तो दूसरी ओर उत्तर भारत में सुबह के समय कोहरा लोगों की मुश्किलें बढ़ाने लगा है। सोमवार सुबह उत्तर प्रदेश के देवरिया और कुशीनगर सहित करीब 10 शहरों में कोहरा छाने की खबरें सामने आई हैं। कई स्थानों पर सुबह दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को सावधानी के साथ यात्रा करनी पड़ी।
मौसम विभाग ने 1 और 2 नवंबर को उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्के से मध्यम कोहरे की संभावना जताई थी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं हल्की बारिश की भी संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, नवंबर के शुरुआती दिनों में रात का तापमान कम होने और वातावरण में नमी रहने से सुबह के समय कोहरा बनने की परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों, नदी किनारे और खुले क्षेत्रों में इसका असर अधिक दिखाई दे सकता है। हालांकि कोहरे के कारण यातायात प्रभावित होने की स्थिति हर शहर में अलग-अलग हो सकती है।
बिहार में भी कोहरे का असर
बिहार में भी नवंबर की शुरुआत के साथ सुबह हल्की ठंड और धुंध का असर दिखाई देने लगा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सोमवार सुबह सुपौल में कोहरे के कारण दृश्यता करीब 60 मीटर तक गिरने की खबर सामने आई। हालांकि इस विशेष दृश्यता आंकड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
मौसम विभाग के सुपौल संबंधी आंकड़ों के अनुसार, 1 नवंबर की सुबह सापेक्ष आर्द्रता 90 प्रतिशत दर्ज की गई थी। 2 नवंबर के लिए आंशिक रूप से बादल छाए रहने का पूर्वानुमान दिया गया है। सुबह के समय कोहरा होने पर राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
उत्तराखंड में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना
उत्तराखंड में भी 2 नवंबर को मौसम बदलने की संभावना बनी हुई है। उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग सहित कुछ पर्वतीय जिलों में बारिश के आसार हैं। अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान अनुकूल रहने पर हल्की बर्फबारी हो सकती है।
बारिश और बर्फबारी होने से पर्वतीय मार्गों पर फिसलन बढ़ सकती है। ऐसे में यात्रियों, पर्यटकों और पहाड़ी मार्गों पर वाहन चलाने वालों को मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करनी चाहिए। मौसम विभाग के व्यापक पूर्वानुमान में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में 1 तथा 2 नवंबर को छिटपुट बारिश की संभावना जताई गई है।
एक सप्ताह में बंगाल की खाड़ी में दूसरा चक्रवात
बंगाल की खाड़ी में पिछले एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा चक्रवाती तूफान है। इससे पहले 28 अक्टूबर को चक्रवात ‘अर्नब’ आंध्र प्रदेश के तट से टकराया था। उस तूफान के कारण आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिली थीं।
अब मुरासु के सक्रिय होने से एक बार फिर दक्षिण और मध्य भारत में खराब मौसम की आशंका बढ़ गई है। लगातार चक्रवाती गतिविधियों के कारण तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों और कृषि क्षेत्र के लिए मौसम पूर्वानुमान अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
आखिर क्यों बनते हैं बंगाल की खाड़ी में इतने ताकतवर चक्रवात?
बंगाल की खाड़ी दुनिया के उन समुद्री क्षेत्रों में शामिल है, जहां चक्रवाती तूफानों के बनने और शक्तिशाली होने के लिए अनुकूल परिस्थितियां अक्सर मौजूद रहती हैं। समुद्र की सतह का अधिक तापमान, वातावरण में पर्याप्त नमी और हवाओं की अनुकूल स्थिति चक्रवातों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यही कारण है कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवाती तूफान कई बार भारत के पूर्वी तटीय राज्यों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर देते हैं।
चक्रवात बनने की प्रक्रिया समुद्र के गर्म पानी से शुरू होती है। जब समुद्र की सतह का तापमान लगभग 26.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होता है और गर्म पानी पर्याप्त गहराई तक मौजूद रहता है, तब समुद्र से बड़ी मात्रा में जलवाष्प वातावरण में पहुंचती है। गर्म और नम हवा ऊपर उठने लगती है, जिससे समुद्र की सतह के आसपास कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है। ऊपर उठने वाली जलवाष्प के संघनित होने से ऊर्जा निकलती है, जो तूफान को और अधिक शक्तिशाली बनाने में मदद करती है।
इसके बाद पृथ्वी के घूमने के कारण उत्पन्न कोरिऑलिस बल हवाओं को घुमावदार गति देने में भूमिका निभाता है। यदि वातावरण की अलग-अलग ऊंचाइयों पर हवाओं की दिशा और गति में बहुत अधिक अंतर नहीं होता, तो चक्रवाती प्रणाली अधिक संगठित होकर शक्तिशाली तूफान का रूप ले सकती है।
बंगाल की खाड़ी की भौगोलिक बनावट भी चक्रवातों के खतरे को बढ़ाती है। खाड़ी का उत्तरी हिस्सा अपेक्षाकृत संकरा है और कई तटीय क्षेत्र निचले तथा घनी आबादी वाले हैं। ऐसे में शक्तिशाली चक्रवात के दौरान समुद्र का पानी सामान्य स्तर से ऊपर उठकर तटीय इलाकों में प्रवेश कर सकता है। इसे तूफानी ज्वार या स्टॉर्म सर्ज कहा जाता है।
चक्रवात की तीव्रता बढ़ने के साथ उसके केंद्र के आसपास हवाओं की गति भी बढ़ सकती है। तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और ऊंची समुद्री लहरों के कारण मकानों, बिजली व्यवस्था, सड़कों, कृषि क्षेत्रों और मछली पकड़ने वाली नौकाओं को भारी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। चक्रवात ‘मुरासु’ इसका ताजा उदाहरण है। भारतीय मौसम विभाग के 2 नवंबर 2026 के बुलेटिन में इसे गंभीर चक्रवाती तूफान बताया गया है। इसके आंध्र प्रदेश तट के पास पहुंचने पर तेज हवाओं और भारी बारिश का खतरा जताया गया है।
इससे स्पष्ट होता है कि बंगाल की खाड़ी में विकसित होने वाली चक्रवाती प्रणालियों की लगातार निगरानी क्यों जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र के तापमान, नमी और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव चक्रवात की तीव्रता को प्रभावित करते हैं। इसलिए समय पर मौसम चेतावनी, तटीय क्षेत्रों से सुरक्षित निकासी और आपदा प्रबंधन की तैयारी जान-माल के नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

चक्रवात के दौरान लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
चक्रवात मुरासु के खतरे को देखते हुए तटीय और भारी बारिश की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
तेज आंधी के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर निर्माणों से दूर रहें।
समुद्र में जाने से बचें और मछुआरे स्थानीय प्रशासन की चेतावनी का पालन करें।
मोबाइल फोन चार्ज रखें तथा जरूरी दवाइयां, पानी और टॉर्च तैयार रखें।
जलभराव वाली सड़कों और तेज बहाव वाले नालों को पार करने से बचें।
बिजली गिरने की आशंका होने पर खुले मैदानों और ऊंचे स्थानों से दूर रहें।
जरूरत पड़ने पर स्थानीय आपदा नियंत्रण कक्ष या आपातकालीन हेल्पलाइन 112 से संपर्क करें।
आज रात आंध्र प्रदेश के लिए अहम
चक्रवात मुरासु के कारण 2 नवंबर की रात और 3 नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। मौसम विभाग के अनुसार, तूफान ओंगोल के आसपास तट पार कर सकता है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है।
आंध्र प्रदेश के साथ तमिलनाडु, तेलंगाना और ओडिशा में भारी बारिश का खतरा है, जबकि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल के कई हिस्सों में भी मौसम प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश और बिहार में सुबह के कोहरे का असर सामने आ रहा है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और संभावित बर्फबारी से मौसम में ठंडक बढ़ सकती है। फिलहाल सबसे जरूरी है कि लोग मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।



