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बांग्लादेश में फिर गूंजे भारत विरोधी नारे, तारिक सरकार के खिलाफ हजारों सड़कों पर!

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में महंगाई, बिजली कटौती और ईंधन की कमी को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ। नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता नाहिद इस्लाम ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए गृह और ऊर्जा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की।

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बांग्लादेश में फिर गूंजे भारत विरोधी नारे, तारिक सरकार के खिलाफ हजारों सड़कों पर!

LIVE 24 TV | नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026

ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार के खिलाफ शुक्रवार, 30 अक्टूबर को राजधानी ढाका में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। देश में लगातार बढ़ती महंगाई, बिजली संकट, पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की कमी से नाराज प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने किया था, जिसका नेतृत्व पार्टी के प्रमुख नेता नाहिद इस्लाम ने किया। ढाका के शाहबाग इलाके में राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने आयोजित रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए।

प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा बांग्लादेश की घरेलू आर्थिक और प्रशासनिक समस्याएं थीं, लेकिन इसी दौरान भारत विरोधी नारेबाजी भी शुरू हो गई। नाहिद इस्लाम ने मंच से 'दिल्ली ना ढाका?' का नारा लगाया, जिसके जवाब में भीड़ ने 'ढाका-ढाका' कहा।

इस नारेबाजी के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश की सरकार देश के हितों की रक्षा करने और भारत के कथित प्रभाव का मुकाबला करने में विफल रही है।

ढाका के राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने जुटे हजारों प्रदर्शनकारी

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में तारिक रहमान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की खबरों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के हजारों समर्थकों के ढाका के शाहबाग इलाके में स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने एकत्र होने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की आर्थिक नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

पार्टी ने आरोप लगाया कि देश में बढ़ती महंगाई, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेजी, बिजली की अनियमित आपूर्ति और गैस की किल्लत से आम नागरिकों की परेशानियां बढ़ रही हैं। इन समस्याओं का असर विशेष रूप से मध्यम वर्ग और कम आय वाले परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ने की बात कही गई।

प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि तारिक रहमान सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने आर्थिक संकट से निपटने के लिए प्रभावी नीतियां लागू करने और सरकारी विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। रैली में पार्टी नेताओं ने कुछ मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि सरकार को जनता की शिकायतों को गंभीरता से लेकर तत्काल समाधान की दिशा में काम करना चाहिए। इस प्रदर्शन ने बांग्लादेश में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक मतभेदों को फिर चर्चा में ला दिया है।

'दिल्ली नहीं, ढाका' के नारों से गरमाई राजनीति

ढाका के शाहबाग स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने आयोजित रैली में हजारों कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। इस दौरान नाहिद इस्लाम ने आरोप लगाया कि भारत बांग्लादेश के आंतरिक मामलों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के महत्वपूर्ण फैसलों में किसी बाहरी शक्ति का अनुचित हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

नाहिद इस्लाम ने भारत पर बांग्लादेश के खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार ऐसी गतिविधियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने भारत के साथ प्रस्तावित कॉरिडोर व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकार देश के हितों से समझौता कर सकती है। इसके अलावा गंगा जल बंटवारा समझौते का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को अपने अधिकारों के लिए मजबूती से आवाज उठानी चाहिए।

रैली में महंगाई, बिजली संकट, गैस की कमी और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर भी सरकार की आलोचना की गई। नाहिद इस्लाम ने गृह मंत्री और ऊर्जा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी। हालांकि, भारत के खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं और इनके समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आए हैं। उपलब्ध प्रमुख रिपोर्टों में इस रैली में 'दिल्ली नहीं, ढाका' का सटीक नारा लगाए जाने की भी स्पष्ट पुष्टि नहीं मिली है। इस विरोध प्रदर्शन ने बांग्लादेश की घरेलू राजनीति के साथ भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

गृह और ऊर्जा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के खिलाफ विपक्षी नेशनल सिटिजन पार्टी ने अपना विरोध तेज कर दिया है। राजधानी ढाका के शाहबाग स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने आयोजित प्रदर्शन में पार्टी ने गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू के तत्काल इस्तीफे की मांग की।

NCP प्रमुख नाहिद इस्लाम ने आरोप लगाया कि दोनों मंत्री अपने-अपने विभागों की जिम्मेदारियां निभाने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जबकि बिजली और गैस की कमी से आम नागरिकों और कारोबारियों की परेशानियां बढ़ रही हैं।

नाहिद इस्लाम ने गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद पर अपराध नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। वहीं, ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू पर बढ़ती ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति संकट को लेकर सवाल उठाए। रैली के दौरान नाहिद इस्लाम ने चेतावनी दी कि यदि दोनों मंत्रियों ने इस्तीफा नहीं दिया, तो पार्टी देशभर में विरोध प्रदर्शनों का विस्तार करेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान का घेराव करने के लिए प्रदर्शन मार्च निकालने की भी चेतावनी दी।

NCP ने प्रदर्शन में चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें दोनों मंत्रियों के इस्तीफे के अलावा संवैधानिक सुधार परिषद का गठन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ बताए जा रहे कानूनों को समाप्त करना और जुलाई आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं के मामलों में जल्द न्याय सुनिश्चित करना शामिल है।

पार्टी ने पुलिस महानिरीक्षक को हटाने की मांग भी उठाई। इस प्रदर्शन से बांग्लादेश में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने के संकेत मिले हैं। हालांकि, मंत्रियों के खिलाफ लगाए गए आरोप NCP नेतृत्व के दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र जांच में प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

गंगा जल समझौते पर भारत को लेकर क्या बोले नाहिद इस्लाम?

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा समझौता एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के प्रमुख नाहिद इस्लाम ने भारत के साथ गंगा जल समझौते के नवीनीकरण को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि बांग्लादेश को उसके अधिकार के अनुसार पानी नहीं मिला, तो देश में दोबारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

ढाका के शाहबाग में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए नाहिद इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार से मांग की कि भारत के साथ होने वाली बातचीत में देश की उचित जल हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए। नाहिद इस्लाम ने चेतावनी दी कि अगर दिसंबर में समाप्त होने वाले गंगा जल समझौते का निष्पक्ष तरीके से नवीनीकरण नहीं किया गया, तो बांग्लादेश के लोग फिर सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार गंगा के पानी में अपने उचित हिस्से से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

दरअसल, भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा समझौता 12 दिसंबर 1996 को हुआ था। इसकी अवधि 30 वर्ष निर्धारित की गई थी, जो 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाली है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच पश्चिम बंगाल स्थित फरक्का बैराज पर गंगा नदी के पानी का बंटवारा किया जाता है। समझौते के अनुसार, हर वर्ष 1 जनवरी से 31 मई तक शुष्क मौसम में उपलब्ध पानी का बंटवारा निर्धारित फार्मूले के आधार पर किया जाता है। इसके लिए दस-दस दिन की अवधि में पानी की उपलब्धता और हिस्सेदारी का आकलन होता है।

बांग्लादेश में गंगा नदी को पद्मा कहा जाता है। वहां नदी का पानी कृषि, सिंचाई, मत्स्य पालन, पर्यावरण संरक्षण और लाखों लोगों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से शुष्क मौसम में पानी की उपलब्धता कम होने से खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी कारण बांग्लादेश के राजनीतिक दल नए समझौते में देश के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

नाहिद इस्लाम ने भारत के साथ संभावित ट्रांजिट कॉरिडोर का मुद्दा भी उठाया और तारिक रहमान सरकार पर देश के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, किसी अनुचित समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।

नाहिद इस्लाम ने तारिक रहमान पर लगाए गंभीर आरोप

रैली में नाहिद इस्लाम ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान पर भी तीखा राजनीतिक हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तारिक रहमान के सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, राजनीतिक हिंसा और कब्जे की घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।

नाहिद ने प्रधानमंत्री पर लोकतांत्रिक मूल्यों से दूर जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि बांग्लादेश की जनता ने पहले भी सत्तावादी शासन के खिलाफ आंदोलन किया है और जरूरत पड़ने पर दोबारा आवाज उठाएगी। उन्होंने यह दावा भी किया कि वर्तमान सरकार जनता की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सकी है।

हालांकि, प्रधानमंत्री और उनकी सरकार पर लगाए गए ये आरोप विपक्षी नेता के राजनीतिक बयान हैं। इनके आधार पर सरकार के खिलाफ किसी कानूनी दोष या अपराध की पुष्टि नहीं होती। नाहिद इस्लाम ने अपने समर्थकों से आंदोलन जारी रखने और सरकार पर लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाने की अपील की।

कौन हैं नाहिद इस्लाम, जिनके नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन?

नाहिद इस्लाम बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वह वर्ष 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं। उस आंदोलन के बाद बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव हुए और शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी।

छात्र आंदोलन से उभरे नेताओं ने बाद में नेशनल सिटिजन पार्टी का गठन किया। इस पार्टी ने युवाओं की राजनीतिक भागीदारी, प्रशासनिक सुधार और सत्ता की जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। नाहिद इस्लाम पहले भी भारत की भूमिका और बांग्लादेश की विदेश नीति को लेकर विवादास्पद बयान दे चुके हैं। अब तारिक रहमान सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करके वह घरेलू आर्थिक समस्याओं को भी अपनी पार्टी के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल कर रहे हैं।

NCP सांसद हसनत अब्दुल्ला भी रैली में हुए शामिल

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के विरोध प्रदर्शन में पार्टी के सांसद हसनत अब्दुल्ला भी शामिल हुए। ढाका के शाहबाग स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने आयोजित इस रैली में हजारों कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। हालांकि, हसनत अब्दुल्ला ने इस रैली को संबोधित नहीं किया।

हसनत अब्दुल्ला इससे पहले भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर दिए गए विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं। उन्होंने पूर्व में भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने संबंधी टिप्पणी की थी, जिस पर सवाल उठे थे। दरअसल, सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित एक संकरा भूभाग है, जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है। यह क्षेत्र भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है। रैली में भारत को लेकर हुई नारेबाजी और हसनत अब्दुल्ला की मौजूदगी ने इस प्रदर्शन की ओर ध्यान आकर्षित किया। रैली में NCP प्रमुख नाहिद इस्लाम ने भारत-बांग्लादेश संबंधों, गंगा जल बंटवारे और देश की संप्रभुता से जुड़े मुद्दे उठाए।

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बढ़ी भारत विरोधी बयानबाजी

बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद देश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। इन परिवर्तनों का असर भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर भी पड़ा। अब प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में एक बार फिर भारत विरोधी नारे सुनाई देने से दोनों देशों के रिश्तों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

दरअसल, 5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन और व्यापक जनविरोध के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पद से इस्तीफा दे दिया था और भारत आ गई थीं। इसके बाद 8 अगस्त को नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ। इस राजनीतिक परिवर्तन के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में सीमा सुरक्षा, अल्पसंख्यकों की स्थिति, शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर मतभेद सामने आए।

मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक और छात्र संगठनों ने भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी की। नेशनल सिटिजन पार्टी के नेताओं ने भी भारत के कथित हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया। हालांकि, भारत के खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। फरवरी 2026 में बांग्लादेश में आम चुनाव हुए। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बहुमत हासिल किया और 17 फरवरी 2026 को तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। नई सरकार के गठन के बाद भारत के साथ संबंधों में सुधार की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हुई।

हालांकि, शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को ढाका के शाहबाग स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने आयोजित NCP की रैली में एक बार फिर भारत विरोधी नारे लगाए गए। पार्टी प्रमुख नाहिद इस्लाम ने तारिक रहमान सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए उस पर जनता की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा देश में बढ़ती महंगाई, बिजली संकट, गैस की कमी और कानून-व्यवस्था की स्थिति थी। NCP ने गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू के इस्तीफे की मांग भी उठाई।

नाहिद इस्लाम ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करती, तो देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज किए जाएंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के घेराव की भी चेतावनी दी। इस रैली में भारत विरोधी नारेबाजी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि बांग्लादेश की घरेलू राजनीति में भारत के साथ संबंध अब भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बने हुए हैं।

क्या भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पड़ सकता है असर?

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भारत विरोधी नारों और प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के खिलाफ हुए प्रदर्शन ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। नेशनल सिटिजन पार्टी की रैली में भारत को लेकर दिए गए बयानों के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या इसका असर भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ सकता है।

दरअसल, भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, सीमा सुरक्षा, परिवहन, निवेश और नदी जल बंटवारे जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग होता है। दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। बांग्लादेश भारत से बिजली और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति भी प्राप्त करता है। ऐसे में द्विपक्षीय संबंधों में किसी भी तरह का तनाव दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

प्रदर्शन के दौरान NCP प्रमुख नाहिद इस्लाम ने भारत के साथ प्रस्तावित ट्रांजिट कॉरिडोर और गंगा जल बंटवारे के मुद्दे पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि तारिक रहमान सरकार बांग्लादेश के हितों की पर्याप्त रक्षा नहीं कर रही है। भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में हुआ गंगा जल बंटवारा समझौता 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। इस समझौते के नवीनीकरण को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत विशेष महत्व रखती है। बांग्लादेश में विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार से देश की उचित जल हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के नजरिए से देखें तो विपक्षी दलों के ऐसे प्रदर्शनों से सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, किसी रैली में लगाए गए नारों या नेताओं के बयानों को दोनों देशों की आधिकारिक विदेश नीति में बदलाव का संकेत नहीं माना जा सकता। 31 अक्टूबर तक भारत सरकार की ओर से इस विशेष प्रदर्शन पर किसी नई आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तारिक रहमान सरकार घरेलू राजनीतिक दबाव के बीच भारत के साथ व्यापारिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों में संतुलन बनाए रख पाएगी?

भारत और बांग्लादेश के बीच कैसे हैं संबंध?

भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध ऐतिहासिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार, बिजली आपूर्ति, सीमा सुरक्षा, परिवहन और नदी जल बंटवारे जैसे क्षेत्रों में सहयोग होता रहा है। हालांकि, अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कुछ तनाव भी देखने को मिला।

फिलहाल भारत-बांग्लादेश संबंधों को राजनीतिक रूप से तनावपूर्ण, लेकिन आर्थिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कहा जा सकता है। तनाव के प्रमुख कारणों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में मौजूदगी, बांग्लादेश में भारत विरोधी राजनीतिक बयान, सीमा सुरक्षा और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

दूसरी ओर, दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने के प्रयास भी जारी हैं। सितंबर और अक्टूबर 2026 में व्यापार तथा राजनयिक स्तर पर बातचीत आगे बढ़ी है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत में संभावित भारत यात्रा पर भी चर्चा चल रही है। एक अहम मुद्दा 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाला गंगा जल बंटवारा समझौता है, जिस पर दोनों देशों को आगे की व्यवस्था तय करनी है।

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