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JDU में बड़ा सियासी भूचाल! अनंत सिंह और पत्नी नीलम देवी 6 साल के लिए पार्टी से बाहर, आखिर किस बात पर भड़का नीतीश कुमार का नेतृत्व?

बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी, पूर्व विधायक नीलम देवी को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

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JDU में बड़ा सियासी भूचाल! अनंत सिंह और पत्नी नीलम देवी 6 साल के लिए पार्टी से बाहर, आखिर किस बात पर भड़का नीतीश कुमार का नेतृत्व?

LIVE 24 TV | विशेष रिपोर्ट | 24 अक्टूबर 2026

पटना: बिहार में विधान परिषद चुनाव के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख दल जनता दल यूनाइटेड ने अपने ही विधायक अनंत कुमार सिंह के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।

इसके साथ ही अनंत सिंह की पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया है। जेडीयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। पार्टी का कहना है कि संगठन के निर्देशों की अवहेलना और दल विरोधी गतिविधियों के कारण कार्रवाई करना आवश्यक हो गया था।

अनंत सिंह को क्यों निकाला गया? सामने आईं चार बड़ी वजहें

जेडीयू की ओर से जारी आदेश और उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई के पीछे कई कारण बताए गए हैं।

  1. पार्टी के निर्देशों की अवहेलना: अनंत सिंह पर पिछले कुछ दिनों से संगठन के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप है।

  2. नेतृत्व पर आपत्तिजनक टिप्पणियां: पार्टी ने आरोप लगाया कि उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के प्रति अमर्यादित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

  3. जेडीयू उम्मीदवार का विरोध: पटना स्नातक विधान परिषद चुनाव में उन्होंने पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया।

  4. दूसरी पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन: अनंत सिंह ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह का खुलकर समर्थन किया।

जेडीयू ने इन गतिविधियों को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी आचरण की श्रेणी में रखते हुए कार्रवाई की है।

नीरज कुमार के विरोध से शुरू हुआ पूरा विवाद

इस राजनीतिक विवाद की शुरुआत बिहार विधान परिषद के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से हुई।जेडीयू ने इस सीट पर अपने वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन मोकामा विधायक अनंत सिंह उनकी उम्मीदवारी से नाराज थे।

अनंत सिंह का आरोप था कि मोकामा विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार ने उनके खिलाफ काम किया था। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में शिकायत किए जाने के बावजूद पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की। जब जेडीयू ने नीरज कुमार को दोबारा उम्मीदवार बनाया, तो अनंत सिंह ने उनका विरोध करने का फैसला किया।

मामला तब और बढ़ गया जब 1 अक्टूबर 2026 को अनंत सिंह जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह की नामांकन यात्रा में शामिल हुए और उनका समर्थन सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद यह विवाद केवल दो नेताओं की व्यक्तिगत नाराजगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी अनुशासन और आधिकारिक उम्मीदवार के प्रति निष्ठा का मामला बन गया।

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अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता भी जाएगी?

अनंत सिंह के निष्कासन के साथ जेडीयू ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पार्टी ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा की है।

हालांकि, पार्टी से निष्कासन और विधानसभा सदस्यता समाप्त होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।केवल पार्टी से निकाले जाने के कारण विधायक की विधानसभा सदस्यता अपने आप समाप्त नहीं होती। दसवीं अनुसूची के अंतर्गत अयोग्यता के लिए निर्धारित संवैधानिक आधार और प्रक्रिया लागू होती है।

इसलिए अनंत सिंह फिलहाल विधानसभा की ओर से अयोग्य घोषित किए जाने की पुष्टि के बिना विधायक बने रहेंगे। उनकी सदस्यता पर अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

पत्नी नीलम देवी को भी क्यों किया गया निष्कासित?

जेडीयू ने नीलम देवी पर भी दल विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाया है। पार्टी के आदेश के अनुसार, उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त करते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित किया गया है।

हालांकि, नीलम देवी के संबंध में उपलब्ध रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उन्होंने किस विशेष कार्यक्रम, प्रचार अभियान या राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा लिया था जिसके आधार पर उन्हें निष्कासित किया गया। नीलम देवी पहले मोकामा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वे अनंत सिंह के राजनीतिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। जेडीयू का यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक ही परिवार के दो प्रमुख राजनीतिक चेहरों के खिलाफ एक साथ कार्रवाई हुई है।

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विधान परिषद चुनाव के नतीजों से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 23 अक्टूबर 2026 को मतदान हुआ था। इस सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार, जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह और राष्ट्रीय जनता दल के दिलीप कुमार सहित अन्य उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। मतदान के बाद 27 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है। ऐसे में नतीजे आने से पहले जेडीयू की कार्रवाई ने बिहार के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।

पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे इस विवाद के बीच नीरज कुमार ने भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए थे।

क्या अनंत सिंह पहले भी जेडीयू से अलग हो चुके हैं?

मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह लंबे समय से प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर विभिन्न दलों और विवादों से जुड़ा रहा है। वे पहले भी जेडीयू का हिस्सा रह चुके हैं। वर्ष 2015 में पार्टी से अलग होने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ा था। बाद में वे राष्ट्रीय जनता दल से भी जुड़े।

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान वे दोबारा जेडीयू के उम्मीदवार बने। लेकिन 2026 के विधान परिषद चुनाव में अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी का विरोध करने के बाद उनके और जेडीयू नेतृत्व के संबंध फिर बिगड़ गए।

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी के छह साल के निष्कासन तक पहुंच गया है। जेडीयू ने दोनों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाए हैं। अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर भी संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अनंत सिंह इस कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और बिहार विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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