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अरुणाचल सीमा पर आखिर क्या चल रहा है? ITBP DG के खुलासे से हलचल, चीन की बढ़ती सैन्य ताकत पर बड़ा बयान!

ITBP महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने 24 अक्टूबर को मनाए जाने वाले बल के 65वें स्थापना दिवस से पहले अलवर स्थित ITBP केंद्र में जवानों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा, आधुनिक हथियारों, ड्रोन तकनीक और नई युद्ध रणनीतियों की आवश्यकता पर विस्तार से बात की।

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अरुणाचल सीमा पर आखिर क्या चल रहा है? ITBP DG के खुलासे से हलचल, चीन की बढ़ती सैन्य ताकत पर बड़ा बयान!

LIVE 24 TV | विशेष रिपोर्ट | 23 अक्टूबर 2026

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने बताया है कि अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सुरक्षा बलों के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में पारंपरिक युद्ध पद्धतियों से उसका मुकाबला करना कठिन होता जा रहा है।

22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में आयोजित एक कार्यक्रम में दिए गए इस बयान के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा और केंद्र सरकार की चीन नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीमा की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

ITBP महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने 24 अक्टूबर को मनाए जाने वाले बल के 65वें स्थापना दिवस से पहले अलवर स्थित ITBP केंद्र में जवानों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा, आधुनिक हथियारों, ड्रोन तकनीक और नई युद्ध रणनीतियों की आवश्यकता पर विस्तार से बात की।

कपूर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवानों के साथ आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इन परिस्थितियों में ITBP की नई शौर्य कमांडो इकाइयों ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय बातचीत के बावजूद पूर्वी सीमा के कुछ इलाकों में गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

अरुणाचल में कहां और कैसे शुरू हुआ विवाद?

रिपोर्टों के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में टक्सिंग के निकट असाफिला क्षेत्र में जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह से भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। बताया गया है कि चीनी सैनिकों ने इस क्षेत्र में अपने तंबू लगाए थे। यह इलाका संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यहां वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को लेकर दोनों देशों की धारणाओं में अंतर है।

इस विवाद के बीच 6 सितंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के वाचा-दमाई सीमा बैठक केंद्र पर दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। पूर्वी क्षेत्र में कोर कमांडर स्तर की यह महत्वपूर्ण बैठक सीमा पर तनाव कम करने के प्रयासों का हिस्सा थी। हालांकि बातचीत के बाद भी कुछ स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति जारी रहने की जानकारी सामने आई है।

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चीन की सैन्य ताकत पर ITBP प्रमुख ने क्या कहा?

शत्रुजीत सिंह कपूर ने कहा कि चीन एक शक्तिशाली पड़ोसी है और उसने अपनी सेना PLA के आधुनिकीकरण पर भारी निवेश किया है। उन्होंने चीन से लगती सीमा को भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण सुरक्षा क्षेत्रों में से एक बताया। उनका कहना था कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, निगरानी तकनीक और विशेष प्रशिक्षण अब महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल बड़ी सेना और पारंपरिक हथियार आधुनिक युद्ध में सफलता की गारंटी नहीं हैं। उनके अनुसार नई तकनीक का प्रभावी उपयोग अपेक्षाकृत कम संसाधन वाले देशों को भी शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी का सामना करने में सक्षम बना सकता है।

तीन दौर की बातचीत के बाद भी सीमा पर तनाव बरकरार

भारत-चीन सीमा पर बढ़ते तनाव को लेकर ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि जुलाई से अब तक दोनों देशों के बीच तीन उच्चस्तरीय वार्ताएं हो चुकी हैं। इनमें WMCC की बैठक, विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता और कोर कमांडर स्तर की बातचीत शामिल है। इसके बावजूद अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना जारी है।

सितंबर में भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल हुए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई, लेकिन सीमा पर तनाव की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी।

शत्रुजीत कपूर ने आधुनिक युद्ध की बदलती रणनीति पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक ने पारंपरिक युद्ध के तौर-तरीकों को बदल दिया है। चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता को देखते हुए ITBP ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक को मजबूत कर रही है। इसके साथ ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास जवानों और सैन्य संसाधनों की सुरक्षा के लिए भूमिगत बंकर और शेल्टर बनाए जा रहे हैं।

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चीन से मुकाबले के लिए ITBP की बड़ी तैयारी

ITBP प्रमुख ने बताया कि बल ने अपनी सभी सीमावर्ती इकाइयों में ड्रोन प्लाटून गठित की हैं। सरकार से मिले लगभग 400 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण फंड का 70 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन संबंधी क्षमताओं पर खर्च किया गया है।

इसके अतिरिक्त लगभग 4,000 करोड़ रुपये की व्यापक आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है। इसमें करीब 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए निर्धारित हैं। सीमावर्ती इलाकों में भूमिगत बंकर विकसित करने, पुराने हथियार बदलने और दुर्गम क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक वाहन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

गलवान जैसी घटनाओं से निपटने के लिए 'शौर्य कमांडो'

ITBP ने जवानों के लिए विशेष 'स्ट्राइक' प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया है। इसका उद्देश्य गलवान जैसी परिस्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित करना है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 10 हजार जवानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और लगभग 330 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। वर्ष 2027 के अंत तक पूरे बल को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।

नई शौर्य कमांडो इकाइयों को प्रत्येक सीमावर्ती बटालियन में शामिल करने की योजना है। यह तैयारी जून 2020 के गलवान संघर्ष के अनुभवों से भी जुड़ी है, जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे।

कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला, चुप्पी साधने का लगाया आरोप

भारत-चीन सीमा पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की घटनाओं को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार सीमा पर लगातार हो रही घटनाओं को लेकर देश को स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 19 जून 2020 के बयान का जिक्र करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री द्वारा चीन को दी गई क्लीन चिट की कीमत भारत आज भी चुका रहा है।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि चीन के प्रति सरकार की नीतियों और रुख के बीच ITBP महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ हालिया आमने-सामने की घटनाओं में भारतीय जवानों के प्रदर्शन की सराहना की है।

वहीं, कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी केंद्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ITBP महानिदेशक के अनुसार, सीमा पर ऐसी घटनाएं जुलाई से हो रही हैं, लेकिन देश को इनके बारे में अक्टूबर में जानकारी मिली। माथेर ने सवाल किया कि इतने संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दे पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री ने अब तक सार्वजनिक बयान क्यों नहीं दिया।

अरुणाचल प्रदेश में मैकमोहन लाइन विवाद क्या है?

इस विवाद की शुरुआत 1914 के शिमला सम्मेलन से हुई थी। ब्रिटिश अधिकारी सर हेनरी मैकमोहन ने ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच सीमा निर्धारित की थी, जिसे मैकमोहन लाइन कहा जाता है। चीन ने इस समझौते को मान्यता देने से इनकार कर दिया था।

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अरुणाचल प्रदेश पर चीन का दावा क्या है?

चीन अरुणाचल प्रदेश के लगभग 90 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर दावा करता है। वह इसे 'जांगनान' यानी दक्षिणी तिब्बत कहता है। चीन का तर्क है कि तवांग सहित कई क्षेत्रों के तिब्बत से ऐतिहासिक और धार्मिक संबंध रहे हैं।

भारत का क्या कहना है?

भारत सरकार चीन के दावों को पूरी तरह खारिज करती है। विदेश मंत्रालय कई बार स्पष्ट कर चुका है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा। चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों के नाम बदलने से उनकी वास्तविक स्थिति नहीं बदलती।

1962 के युद्ध से आज तक विवाद

1962 के भारत-चीन युद्ध में चीनी सेना अरुणाचल के कई इलाकों में आगे बढ़ी थी, लेकिन युद्धविराम के बाद पीछे हट गई। इसके बावजूद सीमा विवाद का स्थायी समाधान नहीं हो सका।अब ITBP प्रमुख के बयान के बाद सीमा सुरक्षा और भारत-चीन वार्ता की प्रगति पर बहस तेज है। हालांकि, आमने-सामने की स्थिति का अर्थ अनिवार्य रूप से हिंसक झड़प या युद्ध नहीं है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अरुणाचल में आमने-सामने की स्थिति का उल्लेख स्वयं ITBP प्रमुख ने किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बातचीत के बावजूद कुछ सीमावर्ती मतभेद अभी कायम हैं। हालांकि इसे नए युद्ध या भारतीय क्षेत्र पर कब्जे की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए।

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