समाचार

क्राइम ब्रांच के सामने पेश क्यों नहीं हुए CJP के सौरव-आशुतोष? दोनों केस ट्रांसफर, दीपके के बयान से बढ़ा सस्पेंस!

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से रिहा होने के अगले ही दिन दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए। दोनों ने पूछताछ के लिए अतिरिक्त समय मांगा है।

8 मिनट में पढ़ें
क्राइम ब्रांच के सामने पेश क्यों नहीं हुए CJP के सौरव-आशुतोष? दोनों केस ट्रांसफर, दीपके के बयान से बढ़ा सस्पेंस!

LIVE 24 TV | विशेष रिपोर्ट | 22 अक्टूबर 2026

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो प्रमुख नेता सौरव दास और आशुतोष रांका एक बार फिर चर्चा में हैं। दोनों नेताओं को गुरुवार, 22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के राजौरी गार्डन स्थित कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। हालांकि, दोनों निर्धारित समय पर पेश नहीं हुए और जांच में शामिल होने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, क्राइम ब्रांच दोनों को नया नोटिस जारी कर सकती है। उल्लेखनीय है कि दोनों नेता बुधवार, 21 अक्टूबर की रात ही तिहाड़ जेल से रिहा हुए थे।

सौरव और आशुतोष जंतर-मंतर पर क्यों पकड़े गए थे?

इस विवाद की शुरुआत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन प्रक्रिया के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शनों से हुई। CJP ने मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला देते हुए अक्टूबर में जंतर-मंतर को अधिसूचित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था।

इसके बावजूद 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका अन्य समर्थकों के साथ वहां पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने बंद गेट और अवरोधकों को पार कर जंतर-मंतर परिसर में प्रवेश किया तथा राष्ट्रीय ध्वज फहराया। पुलिस ने इसे सरकारी आदेशों और पहले दिए गए शांति बनाए रखने के आश्वासन का उल्लंघन बताया। दोनों को हिरासत में लिया गया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

सौरव-आशुतोष के खिलाफ दोनों मामले क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर

दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर की घटनाओं को लेकर दर्ज दोनों प्राथमिकी की जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। एक मामला कनॉट प्लेस थाने में और दूसरा पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में दर्ज किया गया था। इन मामलों में सरकारी आदेशों की कथित अवहेलना, अनधिकृत प्रवेश, पुलिस कार्रवाई में बाधा और आपराधिक साजिश संबंधी आरोपों की जांच की जा रही है।

पहले अनधिकृत प्रवेश से संबंधित मुकदमा क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था। इसके बाद 20 अक्टूबर को दूसरे मामले की जांच भी उसी इकाई को स्थानांतरित कर दी गई। जांच एजेंसी अब घटनास्थल के साक्ष्यों, प्रदर्शन में शामिल व्यक्तियों की भूमिका और कथित कानूनी उल्लंघनों की पड़ताल करेगी। हालांकि, मुकदमे क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं है। दोनों नेताओं के विरुद्ध आरोपों का अंतिम निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा।

आशुतोष-रांका-व-सौरव-दास-रिहा-extractpics.jpg

सात दिन की हिरासत के बाद मिली जमानत

सौरव दास और आशुतोष रांका 14 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में थे। प्रारंभ में उन्हें पांच दिन के लिए हिरासत में भेजा गया था। बाद में 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाई गई। 21 अक्टूबर को दिल्ली की विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत में मामले की दोबारा सुनवाई हुई। दिल्ली पुलिस ने दोनों की हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया। सौरव और आशुतोष ने लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और जब तक जंतर-मंतर की मौजूदा अधिसूचना संबंधी स्थिति बनी रहेगी, वहां विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे निर्धारित है।

अभिजीत दीपके बोले—सौरव और आशुतोष मुझसे बड़े नेता

दोनों नेताओं की रिहाई पर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने खुशी जताई। दीपके ने 21 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि सौरव और आशुतोष उनसे न केवल बेहतर, बल्कि कहीं बड़े नेता हैं।

उन्होंने दोनों के नेतृत्व का सम्मान करते हुए उनके निर्देशों का पालन करने और साथ खड़े रहने की बात कही। दीपके ने अपने संदेश में कहा कि वे दोनों नेताओं के लिए हर तरह से समर्पित हैं। उनके इस बयान को संगठन के भीतर एकजुटता और समर्थन के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

कॉकरोच जनता पार्टी की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं?

CJP ने 25 सितंबर 2026 की प्रेस वार्ता में मुख्य चुनाव आयुक्त और निर्वाचन व्यवस्था से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दे उठाए थे।

1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा: संगठन ने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए उनके खिलाफ कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की। ये CJP के आरोप हैं, जिन्हें न्यायिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

2. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक: संगठन ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को तत्काल रोकने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग की। उसने आगामी चुनावों को भी रोकने की मांग उठाई थी।

3. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी कानून में बदलाव: CJP ने वर्ष 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी कानून को निरस्त करके नया कानून बनाने की मांग की। संगठन का कहना है कि नई व्यवस्था में नागरिक समाज की भागीदारी होनी चाहिए, जिससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा मजबूत हो सके।

SIR के खिलाफ 23 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जाएगी। आयोजकों के अनुसार, इस विरोध अभियान में अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर, अभिनेता प्रकाश राज और अभिजीत दीपके सहित कई सामाजिक एवं नागरिक संगठनों से जुड़े लोग भाग लेंगे।

बताया गया है कि पिछले सप्ताह गठित ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ मंच का उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ विभिन्न संगठनों और नागरिक समूहों को एकजुट करना है।

गठबंधन के गठन से पहले दिल्ली में आयोजित एक आपात बैठक में 200 से अधिक संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने का दावा किया गया था। इस मंच से किसान यूनियनों, मजदूर संगठनों, महिला संगठनों, युवा समूहों और नागरिक अधिकार संगठनों को जोड़ने की पहल की गई है।

आयोजकों ने देशभर के नागरिकों से अपील की है कि वे 23 अक्टूबर को अपने-अपने शहरों और क्षेत्रों में शांतिपूर्ण मार्च, धरने और विरोध प्रदर्शनों में भाग लें।

INDIA ब्लॉक की आज शाम ऑनलाइन बैठक

विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के नेताओं की आज शाम ऑनलाइन बैठक प्रस्तावित है। बैठक में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं, विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।

विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर संयुक्त आंदोलन की रणनीति तैयार कर सकते हैं।

विपक्षी गठबंधन की पांच प्रमुख मांगें

1. मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा- विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। साथ ही मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और हस्तक्षेप के आरोपों की निष्पक्ष जांच तथा जांच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग की मांग की जा रही है।

2. मतदाता सूची में पूरी पारदर्शिता- मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से संबंधित जानकारी बूथ एवं विधानसभा स्तर पर सार्वजनिक की जाए। किसी भी पात्र मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे उचित नोटिस और अपील का अवसर दिया जाए।

3. SIR प्रक्रिया और मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल- विपक्ष ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कारण बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने की आशंका जताई है। मांग है कि मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और आगामी चुनावों में SIR से पहले की मतदाता सूची को आधार बनाने पर विचार किया जाए।

4. EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान- विपक्षी दलों की ओर से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठाई जा रही है। इसके साथ ही पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है।

5. विपक्षी दलों की एकजुटता और चुनाव आयोग की जवाबदेही- INDIA ब्लॉक के सभी घटक दलों से चुनावी पारदर्शिता, निष्पक्षता और संस्थागत जवाबदेही के मुद्दे पर एकजुट रहने की अपील की गई है। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाताओं के अधिकारों और जनता के विश्वास की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत के बावजूद उनके खिलाफ दर्ज दोनों मुकदमों की जांच जारी है। क्राइम ब्रांच नया नोटिस जारी कर सकती है। दूसरी ओर, 23 अक्टूबर को निर्धारित सुनवाई भी महत्वपूर्ण होगी।

इस विवाद ने एक बार फिर दो सवाल सामने रखे हैं—नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार की सीमाएं क्या हैं और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस किस हद तक प्रतिबंध लागू कर सकती है?

संबंधित खबरें

LIVE 24 TV की और खबरें →