
उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान तनाव, पथराव के बाद पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले; भारी पुलिस बल तैनात
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पथराव करने वाले लोगों की पहचान सीसीटीवी कैमरों, मोबाइल वीडियो और अन्य उपलब्ध रिकॉर्डिंग की सहायता से की जा रही है। कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही गई .

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान शाही मस्जिद परिसर के बाहर बने एक ढांचे को हटाने की कार्रवाई के समय तनाव की स्थिति बन गई। विरोध के बीच कुछ लोगों द्वारा पुलिस और नगर निगम की टीम पर पथराव किए जाने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया। घटना के बाद तोपखाना, छत्री चौक और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों और शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए चलाए जा रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान का हिस्सा है। वहीं मस्जिद प्रबंधन और कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस हिस्से को हटाया जा रहा था, उसके संबंध में उनके पास संपत्ति और वक्फ से जुड़े दस्तावेज हैं तथा प्रशासन को कार्रवाई से पहले इनकी पूरी जांच करनी चाहिए थी।
सड़क चौड़ीकरण के दौरान शुरू हुआ विवाद
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए कई प्रमुख सड़कों और मार्गों को चौड़ा करने का काम चल रहा है। पुराने शहर के कई इलाकों में सड़कें संकरी होने के कारण यातायात की समस्या बनी रहती है। प्रशासन की योजना प्रमुख मार्गों को लगभग 60 से 80 फीट तक चौड़ा करने की है।
इसी योजना के तहत तोपखाना क्षेत्र में सड़क की सीमा में आने वाले निर्माणों और कथित अतिक्रमणों को पहले चिह्नित किया गया था। प्रशासन की टीम सोमवार सुबह नगर निगम के कर्मचारियों, बुलडोजर, पोकलेन मशीनों और पुलिस बल के साथ क्षेत्र में पहुंची।
नगर निगम द्वारा शाही मस्जिद परिसर के बाहर सड़क की सीमा में बताए जा रहे चबूतरे और अस्थायी ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। इसकी जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जमा होने लगे और कार्रवाई का विरोध शुरू हो गया।
मस्जिद समिति ने जताई आपत्ति
स्थानीय लोगों और मस्जिद प्रबंधन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना था कि हटाया जा रहा हिस्सा मस्जिद परिसर से संबंधित है और उसके स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच पूरी होने तक कार्रवाई रोकी जानी चाहिए।
प्रशासन की ओर से अधिकारियों ने लोगों को समझाने की कोशिश की। अधिकारियों के अनुसार केवल वही हिस्सा हटाया जा रहा था जो सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आ रहा था। प्रशासन ने यह भी कहा कि मस्जिद के मुख्य भवन को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाने की योजना नहीं थी।
इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी और मौके पर लोगों की संख्या बढ़ती गई।
अचानक शुरू हुआ पथराव
तनाव उस समय बढ़ गया जब नगर निगम की मशीनों ने बाहरी हिस्से को हटाना शुरू किया। इसी दौरान भीड़ में शामिल कुछ लोगों की ओर से पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारियों पर पत्थर फेंके जाने लगे।
पथराव के कारण मौके पर अफरा-तफरी फैल गई। कुछ वाहनों के शीशे टूटने की बात भी सामने आई। पुलिसकर्मियों तथा कुछ अन्य लोगों को हल्की चोटें लगने की जानकारी दी गई है।
स्थिति बिगड़ती देख आसपास के दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। बाजारों में कुछ समय के लिए लोगों की आवाजाही भी कम हो गई।
पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
पुलिस ने पहले भीड़ को पीछे हटने और शांति बनाए रखने की चेतावनी दी। इसके बाद भी पथराव जारी रहने पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। पुलिस ने सीमित बल प्रयोग करते हुए लोगों को घटनास्थल से हटाया।
वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। दंगा नियंत्रण वाहन और अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया। लगभग दो घंटे की कोशिश के बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।
घटना के बाद क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। संवेदनशील गलियों और मुख्य चौराहों पर पुलिसकर्मी लगातार निगरानी कर रहे हैं।
प्रशासन ने कहा—धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई नहीं
प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण की यह कार्रवाई किसी विशेष धार्मिक स्थल या समुदाय को ध्यान में रखकर नहीं की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार सड़क सीमा में आने वाले आवासीय, व्यावसायिक और अन्य निर्माणों पर समान प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
नगर निगम का कहना है कि प्रभावित लोगों को पहले से सूचना और नोटिस दिए गए थे। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि शाही मस्जिद के मुख्य भवन को हटाने या नुकसान पहुंचाने की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पथराव करने वाले लोगों की पहचान सीसीटीवी कैमरों, मोबाइल वीडियो और अन्य उपलब्ध रिकॉर्डिंग की सहायता से की जा रही है। कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही गई है।
मस्जिद प्रबंधन ने मांगा था समय
दूसरी ओर शाही मस्जिद प्रबंधन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि मस्जिद पुरानी और ऐतिहासिक है। उनका दावा है कि संबंधित जमीन और ढांचे से जुड़े दस्तावेज प्रशासन के सामने प्रस्तुत किए गए थे और उनकी जांच होने तक कुछ समय मांगा गया था।
मस्जिद समिति ने पथराव की घटना से दूरी बनाते हुए कहा है कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है। समिति का कहना है कि विवाद का समाधान बातचीत और दस्तावेजों की जांच के माध्यम से किया जाना चाहिए।
ड्रोन और कैमरों से निगरानी
तनाव को देखते हुए पुराने उज्जैन के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस की टुकड़ियों द्वारा तोपखाना, छत्री चौक, दौलतगंज और आसपास के क्षेत्रों में गश्त की जा रही है।
पुलिस ड्रोन कैमरों की सहायता से भी संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक या भड़काऊ सामग्री पर नजर रखने के लिए साइबर सेल को सक्रिय किया गया है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि वाली तस्वीरें, वीडियो और संदेश साझा न करें। धार्मिक या सामाजिक तनाव बढ़ाने वाली सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
उज्जैन का पुराना शहर घनी आबादी, संकरी सड़कों और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन के दौरान यहां लाखों श्रद्धालुओं के आने से यातायात और भीड़ प्रबंधन बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी कारण प्रशासन कई मार्गों को चौड़ा करने की योजना पर काम कर रहा है।
लेकिन ऐसे क्षेत्रों में सड़क चौड़ीकरण के दौरान धार्मिक, ऐतिहासिक और निजी संपत्तियों से जुड़े विवाद भी सामने आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन को संबंधित पक्षों के साथ पहले से व्यापक बातचीत करनी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात है और स्थानीय धर्मगुरुओं तथा नागरिक प्रतिनिधियों के साथ शांति बनाए रखने के लिए बातचीत की जा रही है। प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों दोनों ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करने की अपील की है।




