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'वोट बचाओ नहीं, घुसपैठिया बचाओ रैली थी'- अमित शाह का विपक्ष पर हमला

दिल्ली में विपक्ष की महारैली के दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की रैली पर सवाल उठाए।

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'वोट बचाओ नहीं, घुसपैठिया बचाओ रैली थी'- अमित शाह का विपक्ष पर हमला

LIVE 24 TV | राष्ट्रीय राजनीति | 2 नवंबर 2026

नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित विपक्षी INDIA गठबंधन की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली के बाद देश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), अवैध घुसपैठ और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उनकी राजनीति पर सवाल उठाए हैं।

अमित शाह पहले भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'वोटर अधिकार यात्रा' को 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' बता चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि विपक्ष मतदाता सूची से अवैध प्रवासियों के नाम हटाने का विरोध कर रहा है और ऐसे लोगों को अपना वोट बैंक मानता है।

हालांकि, 1–2 नवंबर 2026 की उपलब्ध रिपोर्टों में दिल्ली की ताजा रैली के लिए अमित शाह द्वारा 'घुसपैठिया बचाओ रैली' शब्द कहे जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। उनकी यह टिप्पणी पहले के राजनीतिक बयानों में दर्ज है। दिल्ली की महारैली पर उनके ताजा हमले में राहुल गांधी, 1984 के सिख विरोधी दंगों और विपक्ष की राजनीतिक रणनीति को प्रमुखता से उठाया गया है।

चंडीगढ़ से अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला

दिल्ली में विपक्ष की महारैली के दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की रैली पर सवाल उठाए। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 1 नवंबर को महारैली आयोजित करके 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की भावनाओं का सम्मान नहीं किया।

उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन सिख विरोधी हिंसा की दर्दनाक यादों से जुड़ा है और इसी तारीख को विपक्ष का राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करना पीड़ित परिवारों के पुराने घावों को फिर से कुरेदने जैसा है। अमित शाह ने राहुल गांधी की प्रधानमंत्री बनने की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी चाहे जितने राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित कर लें, प्रधानमंत्री बनने की उनकी बारी नहीं आएगी।

गृह मंत्री ने विपक्ष की राजनीति को नकारात्मक बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल राजनीतिक विरोध के नाम पर देश में अव्यवस्था पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।

अमित शाह लंबे समय से मतदाता सूची में अवैध प्रवासियों के नाम शामिल होने की आशंका को लेकर विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं। सितंबर और नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा को 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' बताया था।

उनका आरोप था कि कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल अवैध रूप से भारत में रहने वाले लोगों को राजनीतिक संरक्षण देना चाहते हैं, क्योंकि वे उन्हें अपने संभावित मतदाता मानते हैं। अमित शाह ने यह भी कहा था कि भारत की मतदाता सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम होने चाहिए और अवैध प्रवासियों को मतदान का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।

हालांकि विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसका विरोध अवैध मतदान के समर्थन में नहीं, बल्कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की आशंका को लेकर है। यही मतभेद अब SIR विवाद और दिल्ली की महारैली के बाद राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गया है।

कांग्रेस से अमित शाह ने पूछे कई सवाल, EVM और भ्रष्टाचार पर साधा निशाना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), चुनाव आयोग और चुनावी नतीजों को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव जीतने पर लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा जताती है, लेकिन हार मिलने पर उन्हीं संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने लगती है।

अमित शाह ने कांग्रेस से पूछा कि अगर EVM और चुनावी व्यवस्था में गड़बड़ी है, तो केरल, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस या उसके सहयोगियों को जीत कैसे मिली? तमिलनाडु में कांग्रेस समर्थित गठबंधन को सफलता कैसे मिली? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर EVM इतनी ही खराब है, तो चुनाव जीतने के बाद नेताओं को शपथ भी नहीं लेनी चाहिए।

शाह ने विपक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव जीतने पर विपक्ष जनता के फैसले को स्वीकार करता है, लेकिन हारने पर चुनाव आयोग और EVM को जिम्मेदार ठहराने लगता है। उन्होंने कांग्रेस की आलोचना करते हुए हिंदी की कहावत 'नाच न जाने, आंगन टेढ़ा' का भी इस्तेमाल किया। इसके अलावा गृह मंत्री ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्व यूपीए सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान लगभग 12 लाख करोड़ रुपये के घपले-घोटाले हुए। हालांकि यह अमित शाह का राजनीतिक आरोप है, कोई स्वतंत्र रूप से स्थापित कुल भ्रष्टाचार राशि नहीं।

शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए दावा किया कि देश की जनता कांग्रेस की राजनीति को नकार चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस अपने पिछले शासन के रिकॉर्ड के आधार पर दोबारा सत्ता मांग सकती है? वहीं विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। इस बयानबाजी से चुनाव आयोग, EVM और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस और तेज हो गई है।

दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष ने क्यों की महारैली?

रविवार, 1 नवंबर को राजधानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली आयोजित की। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। रैली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। विपक्षी नेताओं का कहना था कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए और किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण उसका नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से नहीं हटाया जाना चाहिए। इसके साथ ही विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए।

दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के कारण लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अपना आंदोलन जारी रखेगा। राहुल गांधी ने दावा किया कि भविष्य में कथित चुनावी अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई और कहा कि चुनावी व्यवस्था में जनता का विश्वास बहाल करना जरूरी है। हालांकि राहुल गांधी की ओर से लगाए गए ये राजनीतिक आरोप हैं। इनसे किसी व्यक्ति के विरुद्ध अपराध या चुनावी हेरफेर का दोष सिद्ध नहीं होता।

SIR को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच क्यों बढ़ा विवाद?

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) मतदाता सूचियों की जांच और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज नामों की पात्रता की जांच करना, मृत व्यक्तियों के नाम हटाना, स्थान बदल चुके मतदाताओं के रिकॉर्ड अद्यतन करना और दोहराई गई प्रविष्टियों को ठीक करना है।

चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाने और चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है। दूसरी ओर विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज संबंधी कठिनाइयों और अन्य कारणों से पात्र नागरिकों के नाम भी हटाए जा सकते हैं।

रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्टों के अनुसार, पिछले वर्ष से जारी पुनरीक्षण प्रक्रिया में 13 करोड़ से अधिक नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। हालांकि इन सभी नामों को अवैध प्रवासियों का नाम बताना गलत होगा। इनमें मृत, स्थानांतरित, दोहराई गई या अन्य श्रेणियों की प्रविष्टियां भी शामिल हो सकती हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि गलत तरीके से नाम हटाए जाने की स्थिति में पात्र मतदाताओं के लिए दोबारा पंजीकरण और आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था मौजूद है।

अवैध घुसपैठ और मतदान के अधिकार में क्या संबंध है?

अमित शाह की ओर से उठाए गए अवैध घुसपैठ के मुद्दे को समझने के लिए भारत के मतदान संबंधी कानूनी प्रावधानों पर ध्यान देना जरूरी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अनुसार, मतदान के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। पात्रता की अन्य शर्तें भी लागू होती हैं। इसका अर्थ है कि कोई विदेशी नागरिक केवल भारत में निवास करने के आधार पर मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं कर सकता।

लेकिन किसी व्यक्ति के मतदाता सूची में नाम होने या न होने से अकेले उसकी नागरिकता के संबंध में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अमित शाह का राजनीतिक तर्क है कि मतदाता सूचियों को अवैध प्रविष्टियों से मुक्त रखना जरूरी है। विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि कोई भी पात्र भारतीय मतदाता अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित न हो। इस प्रकार विवाद दो अलग चिंताओं से जुड़ा है—मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा।

1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा क्यों उठाया?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की महारैली को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने रैली की तारीख पर सवाल उठाते हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद दिलाई और कांग्रेस पर सिख समुदाय की भावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

दरअसल, 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा भड़क उठी थी। इस हिंसा में हजारों लोगों की जान गई थी। विशेष रूप से 1 नवंबर की तारीख पीड़ित परिवारों के लिए दर्दनाक स्मृतियों से जुड़ी हुई है।

अमित शाह ने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस से 1 से 3 नवंबर के बीच रैली आयोजित नहीं करने की अपील की थी, लेकिन विपक्ष ने कार्यक्रम की तारीख नहीं बदली। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा करके कांग्रेस ने दंगा पीड़ितों के पुराने जख्मों को फिर हरा कर दिया। शाह ने राहुल गांधी के 'मोहब्बत की दुकान' वाले नारे पर भी सवाल उठाए।

हालांकि, विपक्ष की महारैली का घोषित उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं का विरोध करना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाना था। इस तरह रैली की तारीख को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया।

दिल्ली की महारैली के बाद बीजेपी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी विपक्ष पर सवाल उठाए। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनावी पराजयों के बाद निराशा में देश की संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।

बीजेपी के नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र को बचाने के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठाना उचित नहीं है। पार्टी ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के जवाब में 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' अभियान चलाने की योजना भी बनाई है। वहीं विपक्ष का तर्क है कि चुनाव आयोग से सवाल पूछना और उसके फैसलों की समीक्षा की मांग करना भी लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है।

क्या दिल्ली की महारैली से बढ़ेगा राजनीतिक टकराव?

दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन और उसके बाद बीजेपी नेताओं के बयानों ने मतदाता सूची तथा चुनाव आयोग को लेकर जारी बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने संबंधी शिकायतों का समाधान किस प्रकार किया जाता है। चुनाव आयोग की ओर से शिकायतों की जांच और पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

दूसरी ओर, विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आगे क्या रणनीति अपनाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। क्या विपक्ष इस मुद्दे पर संसद से सड़क तक आंदोलन जारी रखेगा या कानूनी विकल्पों पर जोर देगा, यह देखना होगा। वहीं बीजेपी अपने संगठनात्मक अभियानों और पदयात्राओं के माध्यम से जनता के बीच अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रही है। पार्टी विपक्ष पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है।

फिलहाल स्पष्ट है कि SIR विवाद राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। हालांकि इन आंदोलनों और अभियानों का आगामी चुनावों पर वास्तविक प्रभाव क्या होगा, इसका आकलन अभी करना जल्दबाजी होगी।

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