
UP चुनाव 2027 से पहले BJP का बड़ा दांव, 3 नवंबर से दिग्गजों की पदयात्रा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 5 नवंबर को पश्चिमी क्षेत्र के गाजियाबाद में प्रस्तावित पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां शहरी मतदाता, किसान, व्यापारी और विभिन्न सामाजिक समुदाय विधानसभा चुनावों में अहम भूमिका निभाते है

LIVE 24 TV | उत्तर प्रदेश | 2 नवंबर 2026
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। प्रदेश में विपक्ष के बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और चुनावी प्रक्रियाओं पर उठ रहे सवालों के बीच बीजेपी ने 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' अभियान के तहत बड़े स्तर पर पदयात्राएं निकालने की तैयारी की है। यह अभियान 3 नवंबर से शुरू होकर 5 नवंबर तक चलेगा। इसके तहत प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में पदयात्राओं का आयोजन किया जाएगा।
इन पदयात्राओं में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान और दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा ब्रजेश पाठक जैसे वरिष्ठ नेता भाग लेंगे। पार्टी का उद्देश्य विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ संगठन को सक्रिय करना और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न सामाजिक वर्गों से संपर्क बढ़ाना है।
बीजेपी ने प्रत्येक पदयात्रा में लगभग 25 हजार या उससे अधिक लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा है। इस हिसाब से छह बड़ी पदयात्राओं में कुल मिलाकर कम से कम डेढ़ लाख लोगों को जोड़ने की योजना है। इसके अलावा लगभग 200 युवा सम्मेलनों और किसानों के साथ सामूहिक भोज जैसे कार्यक्रमों की भी तैयारी की जा रही है।
3 नवंबर से शुरू होगा अभियान
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी 3 से 5 नवंबर तक प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत पदयात्राएं निकालेगी। इन कार्यक्रमों में केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
अभियान की शुरुआत 3 नवंबर को लखनऊ और बरेली से होगी। अवध क्षेत्र के लखनऊ में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, जबकि ब्रज क्षेत्र के बरेली में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। 4 नवंबर को गोरखपुर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रयागराज में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और कानपुर में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पदयात्रा में शामिल होंगे। वहीं, 5 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद में पश्चिम क्षेत्र की पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे।
भाजपा ने प्रत्येक पदयात्रा में कम से कम 25 हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा है। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, जनता से संवाद बढ़ाने और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का कहना है कि अभियान में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दों पर जनता के बीच अपनी बात रखी जाएगी।
गाजियाबाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संभालेंगे कमान
बीजेपी की रणनीति के तहत गाजियाबाद में होने वाली पदयात्रा के माध्यम से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के साथ राज्य सरकार के कामकाज और पार्टी के राजनीतिक संदेश को जनता तक पहुंचाया जाएगा।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी से कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जुटने की उम्मीद की जा रही है। इस पदयात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसके जरिए बीजेपी विपक्ष के उस अभियान का जवाब देना चाहती है, जिसमें चुनाव आयोग, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
गोरखपुर में नितिन नवीन की पदयात्रा, 40 हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य
4 नवंबर को गोरखपुर क्षेत्र में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अगुवाई में पदयात्रा आयोजित की जाएगी। गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय बीजेपी नेतृत्व ने गोरखपुर में होने वाले कार्यक्रम के लिए कम से कम 40 हजार कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा है।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी शामिल होने की जानकारी स्थानीय पार्टी नेतृत्व ने दी है। गोरखपुर की पदयात्रा में पार्टी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों के कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की तैयारी है। बीजेपी का प्रयास है कि पदयात्रा केवल राजनीतिक प्रदर्शन तक सीमित न रहे, बल्कि संगठन की सक्रियता और चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बढ़ाने का माध्यम भी बने।
लखनऊ में शिवराज सिंह चौहान और बरेली में जेपी नड्डा की पदयात्रा
अभियान की शुरुआत 3 नवंबर को दो महत्वपूर्ण शहरों से होगी। राजधानी लखनऊ में अवध क्षेत्र की पदयात्रा का नेतृत्व केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। अवध क्षेत्र में बीजेपी का संगठनात्मक नेटवर्क व्यापक है और इस इलाके के कई विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की आगामी चुनावी तैयारियों पर विशेष ध्यान रहेगा।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी किसानों और ग्रामीण मतदाताओं से संवाद की पार्टी की व्यापक रणनीति से भी जुड़ी हुई है। दूसरी ओर, बरेली में ब्रज क्षेत्र की पदयात्रा का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा करेंगे।
बरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जोड़कर बड़े आयोजन की तैयारी की जा रही है। बीजेपी का प्रयास इन कार्यक्रमों के जरिए अपनी क्षेत्रीय इकाइयों को चुनावी गतिविधियों के लिए अधिक सक्रिय करना है।
प्रयागराज में केशव मौर्य, कानपुर में ब्रजेश पाठक करेंगे नेतृत्व
4 नवंबर को प्रयागराज में काशी क्षेत्र की पदयात्रा का नेतृत्व उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य करेंगे। प्रयागराज में होने वाले कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शामिल करने की तैयारी की गई है। इसी दिन कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की पदयात्रा कानपुर में प्रस्तावित है, जिसमें उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसमें औद्योगिक शहरों के साथ ग्रामीण और कृषि आधारित इलाके भी आते हैं। इस क्षेत्र में रोजगार, उद्योग, किसानों की समस्याएं, बुनियादी ढांचा और विकास जैसे मुद्दे विधानसभा चुनावों में चर्चा का विषय बन सकते हैं। बीजेपी की कोशिश पदयात्राओं के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने और आगामी चुनाव को लेकर संगठनात्मक समन्वय मजबूत करने की रहेगी।
SIR पर उठाए सवालों का जवाब देने की तैयारी
बीजेपी के इस अभियान के पीछे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कारण विपक्ष की ओर से चुनावी व्यवस्था पर उठाए जा रहे सवाल भी हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया तथा मतदाता सूचियों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में गड़बड़ियों की आशंका है और इससे वैध मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं बीजेपी इन आरोपों को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बता रही है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता में अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रहा है। इसी राजनीतिक टकराव के बीच 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली हुई, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई।
अब बीजेपी 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्राओं के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और चुनावी प्रक्रियाओं पर अपना पक्ष सामने रखने की तैयारी में है। हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ी और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की सत्यता का निर्धारण राजनीतिक बयानों से अलग आधिकारिक दस्तावेजों, जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर ही किया जा सकता है।
प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने तैयार की रणनीति
बीजेपी के प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में अभियान की तैयारियों को लेकर बैठक की थी। इस बैठक में पदयात्राओं की रूपरेखा, संगठनात्मक जिम्मेदारियों और जनभागीदारी बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई। धर्मपाल सिंह ने पार्टी नेताओं से कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर आयोजित करने और समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने के लिए काम करने को कहा।
अभियान के प्रदेश संयोजक दिलीप पटेल सहित अन्य पदाधिकारियों को भी अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पार्टी ने युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, क्षेत्रीय संगठनों, मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े कार्यकर्ताओं को कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में लगाने की योजना बनाई है। बीजेपी की ओर से संतों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, चिकित्सकों, व्यापारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों को भी पदयात्राओं में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि इन वर्गों की भागीदारी से अभियान को कार्यकर्ताओं के बाहर भी व्यापक पहुंच मिल सकती है।
200 युवा सम्मेलनों की तैयारी
बीजेपी ने पदयात्राओं के साथ-साथ युवाओं और किसानों से सीधे संपर्क बढ़ाने के लिए भी कार्यक्रम तैयार किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी उत्तर प्रदेश में लगभग 200 युवा सम्मेलन आयोजित करने की योजना बना रही है। इसके अलावा किसानों के साथ सामूहिक भोज के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। युवा सम्मेलनों के जरिए पार्टी नए मतदाताओं, छात्रों और युवाओं तक अपनी बात पहुंचाना चाहती है।
वहीं किसानों के साथ होने वाले कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन की पहुंच को मजबूत करने का माध्यम बन सकते हैं। पार्टी इन कार्यक्रमों के जरिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के साथ विपक्ष की राजनीतिक आलोचनाओं का जवाब भी दे सकती है। इन आयोजनों को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले लगातार जनसंपर्क बनाए रखने की व्यापक योजना के रूप में देखा जा रहा है।
बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की तैयारी
बीजेपी ने बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के अलावा बूथ और मंडल स्तर पर भी संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाने की योजना बनाई है। प्रदेश में पार्टी के 1,918 संगठनात्मक मंडल हैं। प्रत्येक मंडल में 25 सक्रिय कार्यकर्ताओं की पहचान करने की तैयारी है। इस हिसाब से लगभग 48 हजार कार्यकर्ताओं का एक सक्रिय संगठनात्मक नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य बनता है।
इसके साथ ही पार्टी नए मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया की जानकारी देने पर भी ध्यान दे रही है। विशेष रूप से युवाओं और महिला मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाने तथा पात्र नागरिकों को फॉर्म-6 के माध्यम से मतदाता पंजीकरण की जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है। हालांकि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम शामिल करने का अंतिम निर्णय निर्वाचन अधिकारियों द्वारा निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार ही किया जाता है।
35 हजार की भीड़ जुटाने की तैयारी, नेताओं के 'नाइट स्टे' का भी प्लान
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक तैयारियों को तेज कर दिया है। पार्टी की रणनीति प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में बड़ी पदयात्राएं निकालकर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और अधिक से अधिक मतदाताओं तक पहुंचने की है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने प्रत्येक पदयात्रा में करीब 30 से 35 हजार लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। इन कार्यक्रमों में केंद्रीय और प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रहेगी।
भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि पार्टी प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत बड़ी पदयात्राएं आयोजित करेगी। प्रत्येक पदयात्रा में लगभग 30 हजार या उससे अधिक कार्यकर्ताओं को शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कार्यक्रमों में कार्यकर्ता पार्टी के नारों और संदेशों वाले बैनर लेकर शामिल होंगे।
धर्मपाल सिंह ने चुनावी तैयारियों में तीन प्रमुख बातों पर जोर दिया है। इनमें अधिक से अधिक मतदाताओं से सीधा संपर्क, कार्यकर्ताओं की उचित जिम्मेदारी तय करना और बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता बढ़ाना शामिल है। उनका कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
सूत्रों के अनुसार, बड़े नेताओं की मौजूदगी के जरिए भाजपा अलग-अलग क्षेत्रों के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। पार्टी का प्रयास है कि पदयात्राओं के माध्यम से कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच संवाद बढ़ाया जाए। इन पदयात्राओं की तैयारियों और आयोजन की लगातार निगरानी करने की भी योजना है। स्थानीय पदाधिकारियों को कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने, कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्थाएं संभालने और संगठनात्मक समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी दी जाएगी। राजनीतिक दृष्टि से इन पदयात्राओं को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के व्यापक जनसंपर्क और संगठनात्मक अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों में अधिक से अधिक रात्रि प्रवास करें और स्थानीय जनता से सीधा संवाद स्थापित करें। इस दौरान लोगों की समस्याओं और सुझावों को सुनने के साथ ही संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन भी किया जाएगा। पार्टी ने क्षेत्रीय अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों को महिला मोर्चा, युवा मोर्चा सहित अन्य संगठनात्मक इकाइयों की गतिविधियों को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके जरिए भाजपा का उद्देश्य बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाना और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जनसंपर्क अभियान को व्यापक बनाना है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले पदयात्राएं क्यों महत्वपूर्ण?
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में 403 विधानसभा सीटें हैं और यहां की राजनीतिक परिस्थितियों का राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है। बीजेपी के लिए आगामी चुनाव में राज्य सरकार के कामकाज, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं के साथ संवाद महत्वपूर्ण विषय रहेंगे।
पदयात्राओं की रणनीति के कई राजनीतिक पहलू हैं।
पहला, पार्टी प्रदेश के सभी प्रमुख संगठनात्मक क्षेत्रों में एक साथ अपनी गतिविधियां बढ़ाना चाहती है।
दूसरा, राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी से कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय मजबूत करने का प्रयास होगा।
तीसरा, विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे लोकतंत्र, चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर बीजेपी अपना पक्ष सीधे जनता के सामने रखना चाहती है।
चौथा, पार्टी सामाजिक संगठनों, युवाओं, किसानों और शहरी मतदाताओं से संवाद बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
राजनीतिक दृष्टि से यह अभियान चुनावी तैयारियों की शुरुआती बड़ी गतिविधियों में से एक माना जा सकता है। हालांकि इन पदयात्राओं का वास्तविक चुनावी प्रभाव भविष्य में मतदाताओं की प्रतिक्रिया और राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
क्या विपक्ष के खिलाफ बीजेपी का अभियान तेज होगा?
उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी पहले से जारी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव राज्य सरकार की नीतियों, रोजगार, कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं समेत विभिन्न मुद्दों को उठाते रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनावी प्रक्रियाओं और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है।
बीजेपी विपक्ष के इन आरोपों का मुकाबला अपने संगठनात्मक कार्यक्रमों और राजनीतिक संदेश के जरिए करना चाहती है। हाल के दिनों में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि चुनावी हार से निराश दल देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष इन आरोपों से असहमत है और अपने विरोध प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक जवाबदेही तथा मतदाताओं के अधिकारों से जोड़कर प्रस्तुत कर रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में आने वाले महीनों के दौरान चुनावी प्रक्रियाओं, लोकतंत्र और सरकारी कामकाज को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
बीजेपी का युवा, महिला और किसान पर फोकस
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने युवाओं, महिलाओं और किसानों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति तैयार की है। पार्टी का विशेष जोर बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों से सीधा संवाद स्थापित करने पर रहेगा। इसके लिए बूथ अध्यक्षों के माध्यम से योजनावार लाभार्थियों की सूची तैयार की जाएगी और कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात करेंगे।
भाजपा ने महिला मोर्चा को महिला मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी है। महिला कार्यकर्ता सरकारी योजनाओं, स्थानीय समस्याओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर संवाद करेंगी। इसके अलावा बूथ स्तर पर छोटी बैठकों का आयोजन किया जाएगा। युवा मतदाताओं को जोड़ने के लिए भी पार्टी ने विशेष कार्यक्रम निर्धारित किए हैं। 18 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए प्रदेश में 200 स्थानों पर युवा सम्मेलन आयोजित करने की योजना है। इसके साथ ही सभी मंडलों में नवमतदाता सम्मेलन भी आयोजित किए जाएंगे।
किसानों से संपर्क बढ़ाने के लिए भाजपा किसान संपर्क अभियान और किसान चौपाल आयोजित करेगी। सहकारी समितियों के सदस्यों के साथ सहभोज कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। वहीं छोटे और सूक्ष्म कारोबारियों से संवाद के लिए अलग अभियान चलाया जाएगा। पार्टी की योजना में पूर्व जनप्रतिनिधियों, पंचायत सदस्यों, पार्षदों, सांसदों और विधायकों को भी संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़ना शामिल है। मंडल, जिला, क्षेत्र और प्रदेश स्तर पर नियमित बैठकों के जरिए इन कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। इस रणनीति के माध्यम से भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न सामाजिक वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ाने और बूथ स्तर पर चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित करने का प्रयास कर रही है।
क्या पदयात्राओं से बीजेपी को चुनावी फायदा मिलेगा?
राजनीतिक विश्लेषण के नजरिए से पदयात्राएं किसी भी दल के लिए संगठनात्मक सक्रियता दिखाने और जनता से सीधे संवाद करने का माध्यम होती हैं। बीजेपी ने इन पदयात्राओं में वरिष्ठ नेताओं को उतारने की योजना बनाई है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर सक्रिय करने और बड़े सार्वजनिक आयोजनों के संचालन का अवसर मिलेगा।
हालांकि बड़ी भीड़ जुटना और चुनाव में समर्थन मिलना अलग-अलग बातें हैं। किसी पदयात्रा की सफलता का आकलन केवल लोगों की उपस्थिति के आधार पर नहीं किया जा सकता। आगामी विधानसभा चुनाव में मतदाताओं के निर्णय पर स्थानीय उम्मीदवारों, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, रोजगार, शिक्षा, किसानों की समस्याओं, महंगाई और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों का भी असर पड़ सकता है। पार्टी के सामने चुनौती यह होगी कि पदयात्राओं के दौरान पैदा हुई संगठनात्मक सक्रियता को अगले कई महीनों तक बनाए रखा जाए।
उत्तर प्रदेश में 2027 चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
उत्तर प्रदेश में बीजेपी की 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्रा 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आई है। 3 से 5 नवंबर तक प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में होने वाली पदयात्राओं में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान और दोनों उपमुख्यमंत्री हिस्सा लेंगे।
पार्टी का लक्ष्य इन आयोजनों के जरिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और नागरिकों को जोड़ना, संगठनात्मक ढांचे को सक्रिय करना तथा विपक्ष के राजनीतिक आरोपों का जवाब देना है। दूसरी ओर विपक्ष भी चुनावी प्रक्रियाओं और सरकारी नीतियों को लेकर अपने अभियान जारी रखे हुए है।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि बीजेपी की इन छह पदयात्राओं का राजनीतिक असर कितना होगा और क्या इससे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की सियासी बहस को नई दिशा मिलेगी?



