
पंजाब में AAP को बड़ा झटका, 3 विधायक BJP में शामिल, मान सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पंजाब में राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत रविवार, 1 नवंबर को हुई, जब आम आदमी पार्टी के दो विधायकों चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दोनों विधायकों के इस्तीफों के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा तेज हो गई थी कि वे बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।

LIVE 24 TV | पंजाब राजनीति | 2 नवंबर 2026
चंडीगढ़/नई दिल्ली। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पिछले दो दिनों के भीतर पार्टी छोड़ने वाले तीन विधायक सोमवार, 2 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। इन विधायकों में अमृतसर उत्तर से कुंवर विजय प्रताप सिंह, समाना से चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर से हरमीत सिंह पठानमाजरा शामिल हैं।
तीनों नेताओं ने नई दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री और पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया, पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बीजेपी में शामिल होने के बाद तीनों नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पंजाब में कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, फिरौती वसूली, गैंगस्टर गतिविधियों और प्रशासनिक कामकाज को लेकर सवाल उठाए।
नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब में फिरौती वसूली एक संगठित उद्योग का रूप ले चुकी है और गैंगस्टरों का प्रभाव बढ़ रहा है। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इनके आधार पर राज्य सरकार या प्रशासन के खिलाफ लगाए गए सभी दावों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता। इस घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि आम आदमी पार्टी ने हाल ही में 2027 विधानसभा चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। इस सूची में पार्टी छोड़ने वाले तीनों विधायकों के नाम शामिल नहीं थे।
कौन हैं बीजेपी में शामिल होने वाले तीनों विधायक?
1. कुंवर विजय प्रताप सिंह: पूर्व IPS अधिकारी से राजनेता बने
कुंवर विजय प्रताप सिंह पंजाब के अमृतसर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के विधायक चुने गए थे। राजनीति में आने से पहले वह भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP के टिकट पर जीत हासिल की थी।
पार्टी नेतृत्व से मतभेदों के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। 2 नवंबर को उन्होंने पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को अपना इस्तीफा भेजा और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने पंजाब में बढ़ते नशे, फिरौती, गैंगस्टर गतिविधियों और राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर भगवंत मान सरकार की आलोचना की।
2. चेतन सिंह जौड़ामाजरा: भगवंत मान सरकार में रह चुके मंत्री
चेतन सिंह जौड़ामाजरा पटियाला जिले की समाना विधानसभा सीट से 2022 में विधायक चुने गए थे। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को हराया था।
जौड़ामाजरा को भगवंत मान सरकार में मंत्री भी बनाया गया था। हालांकि सितंबर 2024 के मंत्रिमंडल फेरबदल में उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया। इसके बाद पार्टी नेतृत्व से उनकी नाराजगी की खबरें सामने आई थीं।
उन्होंने 1 नवंबर को आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया और अगले दिन भाजपा का दामन थाम लिया। उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
3. हरमीत सिंह पठानमाजरा: सनौर सीट से विधायक
हरमीत सिंह पठानमाजरा पटियाला जिले की सनौर विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक चुने गए थे। उन्होंने भी 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया। पठानमाजरा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है। उन्होंने पंजाब में नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और बढ़ते कर्ज को लेकर भी सवाल उठाए। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की बात कही।
तीनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने से पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वहीं, AAP ने भाजपा पर ऐसे नेताओं को पार्टी में शामिल करने का आरोप लगाया है, जिनके खिलाफ गंभीर शिकायतें रही हैं। हालांकि तीनों नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दो दिन में तीन विधायकों के इस्तीफे से बदले राजनीतिक समीकरण
पंजाब में राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत रविवार, 1 नवंबर को हुई, जब आम आदमी पार्टी के दो विधायकों चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दोनों विधायकों के इस्तीफों के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा तेज हो गई थी कि वे बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। इसके अगले दिन सोमवार को पूर्व आईपीएस अधिकारी और अमृतसर उत्तर के विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी।
कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि उन्होंने पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को इस्तीफा भेज दिया है। उनके त्यागपत्र में सदस्यता छोड़ने की प्रभावी तारीख 1 नवंबर 2026 बताई गई। इसी दिन तीनों नेता दिल्ली पहुंचे और बीजेपी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा और विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दो अलग प्रक्रियाएं हैं। कुंवर विजय प्रताप सिंह के मामले में विधानसभा सदस्यता से त्यागपत्र भेजने की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य दो विधायकों के मामले में पार्टी छोड़ने तथा दल बदलने से उत्पन्न संवैधानिक स्थिति विधानसभा अध्यक्ष की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
पंजाब में 'फिरौती इंडस्ट्री' और गैंगस्टरों को लेकर गंभीर आरोप
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए तीन विधायकों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तीनों नेताओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था, बढ़ती आपराधिक गतिविधियों, गैंगस्टरों के कथित प्रभाव और फिरौती वसूली की घटनाओं को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
भाजपा में शामिल होने के बाद नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब में गैंगस्टरों और फिरौती मांगने वाले अपराधियों का डर बढ़ता जा रहा है। उनका दावा है कि राज्य में व्यापारियों, उद्योगपतियों और आम नागरिकों के बीच असुरक्षा का माहौल बन रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि पंजाब में 'फिरौती इंडस्ट्री' विकसित हो गई है, जिसके कारण व्यापार और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
नेताओं का आरोप है कि कई कारोबारियों को कथित तौर पर धमकी भरे फोन कॉल और फिरौती की मांग का सामना करना पड़ रहा है। इससे व्यापारिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ने और निवेशकों का भरोसा कमजोर होने की आशंका जताई गई है। पूर्व आईपीएस अधिकारी और विधायक रहे कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य को अपराध, नशे और आर्थिक समस्याओं से मुक्त करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने प्रदेश के बढ़ते कर्ज, उद्योगों की स्थिति और सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
भाजपा में शामिल हुए नेताओं ने आम आदमी पार्टी पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने पंजाब को नशामुक्त बनाने, गैंगस्टर गतिविधियों पर रोक लगाने और कानून-व्यवस्था मजबूत करने का वादा किया था, लेकिन उनके अनुसार जमीनी स्थिति अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। हालांकि, ये आरोप भाजपा में शामिल हुए नेताओं के राजनीतिक बयान हैं। पंजाब में अपराध, गैंगस्टर गतिविधियों और फिरौती की घटनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड, अपराध के आंकड़ों और जांच रिपोर्टों के आधार पर ही किया जा सकता है।
कुंवर विजय प्रताप सिंह बोले—AAP में मेरी 'इंटर्नशिप' पूरी हुई
पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने बीजेपी में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी के साथ अपने राजनीतिक अनुभव को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी में उनकी राजनीतिक यात्रा एक इंटर्नशिप जैसी थी, जो अब पूरी हो चुकी है।
कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य में उद्योगों की स्थिति कमजोर हो रही है और कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब में बदलाव और बेहतर शासन का वादा किया था, लेकिन उनके अनुसार जनता की अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं।
कुंवर विजय प्रताप सिंह का पुलिस सेवा से राजनीति में आने का सफर भी चर्चा में रहा है। वह पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं और 2022 में अमृतसर उत्तर से आम आदमी पार्टी के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे। पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों के चलते उन्हें जून 2025 में पांच वर्षों के लिए AAP से निलंबित किया गया था। अब उनका बीजेपी में शामिल होना पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
पूर्व मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए हैं।
जौड़ामाजरा ने राज्य में नशे की समस्या को भी बड़ा मुद्दा बताया। उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले पंजाब से नशे की समस्या खत्म करने का भरोसा दिया था, लेकिन जमीनी हालात अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं बदले। उन्होंने सरकार के कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर असंतोष व्यक्त किया।
हालांकि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के संबंध में पंजाब सरकार समय-समय पर अपने कामकाज की उपलब्धियां प्रस्तुत करती रही है। ऐसे में पूर्व मंत्री के आरोपों और सरकार के दावों का आकलन संबंधित विभागों के आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।
वहीं सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने बीजेपी में शामिल होने के बाद कहा कि वह पंजाब में पार्टी के संगठन को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। उन्होंने राज्य में बीजेपी की डबल इंजन सरकार बनाने के लक्ष्य को लेकर कार्यकर्ताओं के साथ काम करने की बात कही। पठानमाजरा ने आम आदमी पार्टी सरकार की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया और कानून-व्यवस्था तथा जनसमस्याओं को लेकर सरकार को घेरा।
उनके बीजेपी में जाने से पटियाला जिले की राजनीति में भी नए समीकरण बनने की चर्चा शुरू हो गई है। समाना और सनौर दोनों विधानसभा क्षेत्र पटियाला जिले में आते हैं। इसलिए एक ही जिले के दो विधायकों का लगभग एक साथ आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होना क्षेत्रीय संगठनात्मक राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार सूची भी है। पार्टी ने हाल ही में पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। इनमें 37 मौजूदा विधायकों को दोबारा चुनाव लड़ने का अवसर दिया गया। लेकिन कुंवर विजय प्रताप सिंह, चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा के नाम सूची में शामिल नहीं थे।
इसके तुरंत बाद तीनों नेताओं के पार्टी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने से टिकट वितरण को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि तीनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से सरकार के कामकाज और पार्टी नेतृत्व के प्रति असंतोष को प्रमुख मुद्दा बनाया है। उनके फैसले को केवल टिकट न मिलने का परिणाम बताना उचित नहीं होगा। पंजाब विधानसभा की 117 सीटों पर 2027 में चुनाव होने हैं। ऐसे में उम्मीदवारों के चयन और मौजूदा विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सभी प्रमुख दलों के भीतर गतिविधियां बढ़ रही हैं।
क्या तीनों विधायकों की विधानसभा सदस्यता जाएगी?
तीनों नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत किसी राजनीतिक दल के टिकट पर निर्वाचित विधायक के दूसरी पार्टी में शामिल होने पर उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है।
हालांकि सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया स्वतः पूरी नहीं होती। इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को संबंधित तथ्यों और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर निर्णय लेना होता है। रिपोर्टों के अनुसार, आम आदमी पार्टी ने चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग करने की बात कही है।
दूसरी ओर, कुंवर विजय प्रताप सिंह अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को भेज चुके हैं। उनके मामले में इस्तीफे की स्वीकृति को लेकर स्पीकर की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। इसलिए तीनों नेताओं के बीजेपी में शामिल होने और उनकी विधानसभा सदस्यता की अंतिम स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।
तीन विधायकों के जाने से भगवंत मान सरकार पर क्या असर पड़ेगा?
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के पास 2022 के विधानसभा चुनाव में हासिल किए गए भारी बहुमत की राजनीतिक पृष्ठभूमि है। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 विधानसभा सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 18, शिरोमणि अकाली दल को 3, बीजेपी को 2, बहुजन समाज पार्टी को 1 और एक निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली थी।
इसलिए तीन विधायकों के बीजेपी में जाने से अपने आप भगवंत मान सरकार के बहुमत पर संकट पैदा नहीं होता। लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इस घटनाक्रम का महत्व अलग है। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे समय में पार्टी के मौजूदा विधायकों और पूर्व मंत्री का बीजेपी में शामिल होना आम आदमी पार्टी के संगठनात्मक अनुशासन और आंतरिक असंतोष को लेकर सवाल खड़े करता है।
इससे बीजेपी को राज्य सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक अभियान में ऐसे नेता मिल गए हैं, जो हाल तक सत्तारूढ़ पार्टी का हिस्सा थे। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के सामने अपने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को यह भरोसा दिलाने की चुनौती होगी कि इन इस्तीफों से पार्टी की चुनावी तैयारियों और सरकार के कामकाज पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
बीजेपी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है तीन नेताओं का शामिल होना?
पंजाब में बीजेपी अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने के लिए लंबे समय से प्रयास कर रही है। पार्टी विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में भी संगठन का विस्तार करना चाहती है। तीनों नेताओं के शामिल होने से बीजेपी को अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय राजनीतिक अनुभव वाले नेता मिले हैं।
कुंवर विजय प्रताप सिंह अमृतसर उत्तर का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं, जबकि चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा पटियाला जिले के विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े हैं। इन नेताओं के पास स्थानीय कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से संपर्क का अनुभव है। बीजेपी के लिए उनकी मौजूदगी संगठनात्मक विस्तार के दृष्टिकोण से उपयोगी हो सकती है। हालांकि नए नेताओं के शामिल होने से चुनावी सफलता सुनिश्चित नहीं होती। यह उनके स्थानीय समर्थन, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
पंजाब में दो दिनों के भीतर आम आदमी पार्टी के तीन नेताओं का इस्तीफा देना और बीजेपी में शामिल होना 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है। पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा और विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने आम आदमी पार्टी के नेतृत्व तथा भगवंत मान सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बीजेपी में शामिल होने के बाद तीनों नेताओं ने कानून-व्यवस्था, गैंगस्टर गतिविधियों, फिरौती, नशे और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सरकार की आलोचना की। हालांकि इन आरोपों पर राज्य सरकार का पक्ष और आधिकारिक आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तीनों नेताओं के जाने से आम आदमी पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़ेगा, या भगवंत मान सरकार विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को एकजुट रखने में सफल होगी? इसका जवाब आने वाले महीनों की राजनीतिक गतिविधियों, उम्मीदवार चयन और मतदाताओं की प्रतिक्रिया से अधिक स्पष्ट होगा।



