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धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ FIR की मांग! माफी के बाद भी क्यों भड़का विवाद?

पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की। 3 नवंबर को पप्पू यादव दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचे और शास्त्री के खिलाफ शिकायत दी।

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धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ FIR की मांग! माफी के बाद भी क्यों भड़का विवाद?

LIVE 24 TV | राष्ट्रीय समाचार | 3 नवंबर 2026

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण पर की गई टिप्पणी को लेकर बड़े विवाद में घिर गए हैं। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में श्रीराम कथा के दौरान भगवान राम और भगवान कृष्ण की तुलना करने वाला उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देश के कई हिस्सों में विरोध शुरू हो गया है। मामला अब धार्मिक संगठनों से निकलकर राजनीतिक और कानूनी स्तर तक पहुंच गया है।

बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि शास्त्री की टिप्पणी से भगवान श्रीकृष्ण के करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

मामला इसलिए भी गंभीर होता जा रहा है क्योंकि विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई देते हुए माफी मांग ली है, लेकिन इसके बावजूद यादव समाज के संगठनों, संतों और कई राजनीतिक नेताओं का विरोध जारी है।

दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे पप्पू यादव, कार्रवाई की मांग

पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की। 3 नवंबर को पप्पू यादव दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचे और शास्त्री के खिलाफ शिकायत दी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की टिप्पणी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है तथा समाज में तनाव पैदा कर सकती है।

इससे पहले 2 नवंबर को समाचार पत्र तहलका से बातचीत में पप्पू यादव ने कहा था कि वह धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ 100 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा भी करेंगे। उनका कहना था कि किसी धार्मिक कथावाचक को भगवान श्रीकृष्ण की मर्यादा और उनके प्रति करोड़ों लोगों की आस्था का सम्मान करना चाहिए।

हालांकि, शिकायत दर्ज होने और पुलिस द्वारा औपचारिक एफआईआर पंजीकृत करने के बीच कानूनी अंतर है। कुछ समाचार रिपोर्टों में एफआईआर दर्ज होने की बात कही गई है, जबकि अन्य में केवल शिकायत और एफआईआर की मांग की पुष्टि हुई है। पुलिस की ओर से एफआईआर संख्या और लगाई गई धाराओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं हुई है।

आखिर धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर क्या कहा था?

पूरा विवाद मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा से शुरू हुआ। 29 अक्टूबर को कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना कर रहे थे। वायरल वीडियो में शास्त्री ने भगवान कृष्ण की त्रिभंग मुद्रा, यानी शरीर के तीन स्थानों से झुके हुए स्वरूप, उनके बांसुरी बजाने के अंदाज और गर्दन की मुद्रा का उल्लेख किया।

उन्होंने भगवान राम के सीधे खड़े रहने वाले स्वरूप की तुलना भगवान कृष्ण के पारंपरिक चित्रण से की। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अयोध्या का स्वरूप सीधा है, जबकि वृंदावन में भगवान कृष्ण का स्वरूप तीन स्थानों से झुका हुआ दिखाई देता है। शास्त्री की टिप्पणी और उसे प्रस्तुत करने के तरीके पर कई श्रद्धालुओं ने आपत्ति जताई। आलोचकों का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का वर्णन करते समय इस्तेमाल की गई भाषा तथा भाव-भंगिमाएं अनुचित थीं।

इसके बाद वीडियो के छोटे-छोटे अंश सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगे। कई लोगों ने इस टिप्पणी को भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच अनावश्यक तुलना बताते हुए इसकी आलोचना की। विवाद बढ़ने के बाद मथुरा और वृंदावन के संतों ने भी कथावाचकों को धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की सलाह दी।

माफी मांगने के बाद भी क्यों बढ़ता जा रहा है विवाद?

सोशल मीडिया पर विरोध तेज होने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनकी बातों को गलत अर्थ में लिया गया और उनका उद्देश्य भगवान राम तथा भगवान कृष्ण के बीच किसी प्रकार का भेद पैदा करना नहीं था। शास्त्री के अनुसार, कथा के दौरान उन्होंने भावपूर्ण और विनोदपूर्ण शैली में भगवान के स्वरूप की चर्चा की थी। उनका किसी श्रद्धालु की आस्था को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और ब्रजभूमि के भक्त हैं। विवाद के बाद उन्होंने अपनी टिप्पणी से आहत लोगों से क्षमा मांगी। लेकिन आलोचकों का कहना है कि किसी बड़े धार्मिक मंच से कही गई बात का असर व्यापक होता है। इसलिए कथावाचकों को भगवान के स्वरूप और धार्मिक मान्यताओं का वर्णन करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यही वजह है कि माफी के बाद भी विरोध पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।

मध्य प्रदेश में सड़कों पर उतरा यादव समाज, पुलिस को सौंपा ज्ञापन

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी का विरोध केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के भिंड, ग्वालियर और शिवपुरी सहित कई क्षेत्रों में यादव समाज तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों ने नाराजगी जताई है। 2 नवंबर को भिंड जिले के मौ थाना क्षेत्र में यदुवंशी संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस को ज्ञापन सौंपकर शास्त्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर की गई टिप्पणी अनुचित है और इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। शिवपुरी में भी प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।

यादव समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण उनके आराध्य हैं, लेकिन उनका महत्व किसी एक जाति या समुदाय तक सीमित नहीं है। देश और दुनिया के करोड़ों लोग भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने स्पष्ट किया कि धार्मिक मंचों से ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए जो श्रद्धालुओं के बीच मतभेद पैदा करे।

अखिलेश यादव ने किया तीखा हमला, कानूनी कार्रवाई की मांग

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। 2 नवंबर को सोशल मीडिया पर जारी बयान में अखिलेश यादव ने इसे धार्मिक आस्था के अपमान से जुड़ा मामला बताते हुए गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण की नकारात्मक तुलना करके सनातन समाज में मतभेद पैदा करना अनुचित है।

अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जब भगवान राम और भगवान कृष्ण दोनों ही हिंदू धर्म में पूजनीय हैं, तो उनके स्वरूपों की ऐसी तुलना करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के सार्वजनिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने इस पूरे घटनाक्रम को धार्मिक एकता से जोड़ते हुए कहा कि सभी धर्मों और उनके आराध्यों का सम्मान किया जाना चाहिए।

तेजस्वी यादव ने भी साधा निशाना, कहा—अब भगवान को बांटने लगे

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने भी इस विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री की कड़ी आलोचना की है। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और शास्त्री की टिप्पणी को अशोभनीय तथा अमर्यादित बताया।

उन्होंने कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पहले समाज को बांटने का प्रयास करते थे और अब धार्मिक आराध्यों के बीच भी भेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। तेजस्वी यादव ने धार्मिक और सामाजिक एकता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए शास्त्री के बयान से असहमति जताई। उनकी प्रतिक्रिया के बाद बिहार की राजनीति में भी इस मामले को लेकर बहस तेज हो गई है।

कांग्रेस नेताओं ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कथावाचक की आलोचना करते हुए धार्मिक विषयों पर जिम्मेदारी से बोलने की आवश्यकता जताई। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और भगवान श्रीकृष्ण पूर्ण योगी हैं। दोनों को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।

उनका कहना था कि दोनों आराध्यों की तुलना करके किसी एक के स्वरूप को कमतर दिखाना उचित नहीं है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सवाल उठाया कि भगवान राम और भगवान कृष्ण को आमने-सामने प्रस्तुत करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। इस प्रकार धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने आपत्ति जताई है।

क्या धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ पुलिस कानूनी कार्रवाई कर सकती है?

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि क्या भगवान श्रीकृष्ण पर की गई टिप्पणी के आधार पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ आपराधिक मामला बन सकता है? भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 में किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से आहत करने से संबंधित प्रावधान मौजूद है। हालांकि किसी भी कथित धार्मिक टिप्पणी पर यह धारा स्वतः लागू नहीं होती। पुलिस को बयान की पूरी परिस्थितियों, उसके वास्तविक आशय, इस्तेमाल किए गए शब्दों और संबंधित कानूनी तत्वों की जांच करनी होती है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, केवल किसी बयान से लोगों की भावनाएं आहत होना और उस बयान का आपराधिक कानून के अंतर्गत दंडनीय होना दो अलग-अलग प्रश्न हैं। यदि पुलिस को शिकायत के आधार पर संज्ञेय अपराध के आवश्यक तत्व मिलते हैं, तो वह कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है। अन्यथा शिकायत की जांच के बाद अलग निर्णय भी लिया जा सकता है। फिलहाल किसी भी कानूनी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

पप्पू यादव का 100 करोड़ की मानहानि का दावा, कितना अहम?

पप्पू यादव ने इस विवाद में धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ 100 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा करने की बात भी कही है। यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पप्पू यादव विवाद को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि कानूनी स्तर पर चुनौती देने का इरादा जता रहे हैं। हालांकि मानहानि के मुकदमे में अदालत के सामने यह स्थापित करना जरूरी होता है कि कथित बयान से कानून के अनुसार किस व्यक्ति या पहचान योग्य समूह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

धार्मिक भावनाओं के आहत होने का प्रश्न और मानहानि का प्रश्न कानूनी रूप से अलग हैं। इसलिए पप्पू यादव की घोषणा के आधार पर किसी मानहानि दावे की सफलता या संभावित मुआवजे का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों में 100 करोड़ रुपये का मुकदमा अदालत में औपचारिक रूप से दाखिल होने की पुष्टि नहीं हुई है।

जिस मुद्रा को लेकर विवाद शुरू हुआ है, वह हिंदू धार्मिक कला और परंपरा में विशेष महत्व रखती है। भगवान श्रीकृष्ण को अनेक चित्रों और मूर्तियों में बांसुरी बजाते हुए त्रिभंग मुद्रा में दिखाया जाता है। इस मुद्रा में शरीर तीन स्थानों पर हल्का झुका हुआ दिखाई देता है। भारतीय मूर्तिकला और नृत्य परंपराओं में त्रिभंग मुद्रा को सौंदर्य, लय और भावपूर्ण अभिव्यक्ति से जोड़ा जाता है।

ब्रज और वैष्णव भक्ति परंपराओं में भगवान श्रीकृष्ण का यह स्वरूप विशेष रूप से पूजनीय है। दूसरी ओर भगवान श्रीराम को सामान्यतः धनुष धारण किए हुए, सीधे और गरिमामय स्वरूप में चित्रित किया जाता है। उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक परंपराओं में दोनों स्वरूपों का अपना महत्व है। इसलिए आलोचकों का कहना है कि इनकी तुलना श्रेष्ठता या हीनता के आधार पर करना आस्था को ठेस पहुंचा सकता है। यही धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि इस विवाद को अधिक संवेदनशील बनाती है।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री लंबे समय से अपनी कथाओं और सार्वजनिक बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में उनके धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनमें भाग लेते हैं। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण पर हालिया टिप्पणी के बाद उन्हें धार्मिक संगठनों, संतों और राजनीतिक नेताओं की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

उनके सामने अब दो प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली, अपनी सफाई के माध्यम से नाराज श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा हासिल करना और दूसरी, पुलिस शिकायतों से संबंधित संभावित कानूनी प्रक्रिया का सामना करना। दूसरी ओर पप्पू यादव और अन्य आलोचक इस मामले में जवाबदेही और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शास्त्री की माफी के बाद विरोध कम होता है या सामाजिक संगठनों की ओर से आगे भी प्रदर्शन किए जाते हैं।

आपको बता दे कि एक ओर धीरेंद्र शास्त्री अपनी टिप्पणी का गलत अर्थ निकाले जाने की बात कहते हुए माफी मांग चुके हैं, तो दूसरी ओर पप्पू यादव, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और विभिन्न सामाजिक संगठन इसे गंभीर मामला मानते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें दिल्ली पुलिस और संबंधित राज्यों में दी गई शिकायतों पर टिकी हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या धीरेंद्र शास्त्री की माफी से यह विवाद समाप्त हो जाएगा या भगवान श्रीकृष्ण पर की गई टिप्पणी उनके लिए बड़ी कानूनी चुनौती बन जाएगी? फिलहाल यह स्पष्ट है कि धार्मिक मंच से कही गई एक टिप्पणी ने संत समाज से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में पुलिस की कार्रवाई और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं ही तय करेंगी कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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