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चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान! 17 राज्यों में अपडेट होगी वोटर लिस्ट, नए मतदाता जुड़वा सकेंगे अपना नाम

भारत निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की घोषणा की है। इस अभियान में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, गलत जानकारियों को सुधारने और मतदाता सूची को अद्यतन करने का अवसर मिलेगा।

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चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान! 17 राज्यों में अपडेट होगी वोटर लिस्ट, नए मतदाता जुड़वा सकेंगे अपना नाम

नई दिल्ली | 16 अक्टूबर 2026

देश की चुनावी व्यवस्था से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को देश के 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराने का आदेश जारी किया।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र नागरिकों का नाम सुनिश्चित करना, त्रुटियों को सुधारना और स्थान बदल चुके या मृत मतदाताओं से संबंधित प्रविष्टियों का नियमों के अनुसार निस्तारण करना है।

निर्वाचन आयोग ने संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्धारित कार्यक्रम के तहत तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के अंतर्गत आयोजित की जाएगी।

किन 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चलेगा अभियान?

निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार इस अभियान में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, गोवा, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और मणिपुर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में भी मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जाएगा।

इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर जैसे राज्य भी शामिल हैं, जहां अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नए मतदाताओं के लिए बड़ी सुविधा

इस अभियान में उन युवाओं को विशेष लाभ मिलेगा, जो 1 जनवरी 2027 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं। पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। जिन लोगों के नाम में गलती है, पता बदल गया है या अन्य जानकारियों में संशोधन की जरूरत है, वे भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकेंगे।

इसके लिए निर्वाचन आयोग के फॉर्म 6, फॉर्म 7 और फॉर्म 8 का उपयोग किया जाएगा। फॉर्म 6 नए मतदाता का नाम जोड़ने, फॉर्म 7 किसी प्रविष्टि को हटाने के लिए आपत्ति प्रस्तुत करने और फॉर्म 8 मौजूदा मतदाता के विवरण में संशोधन जैसी प्रक्रियाओं के लिए है।

SSR और SIR में क्या है अंतर?

निर्वाचन आयोग का यह अभियान विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SSR है। इसे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से अलग समझना जरूरी है। SSR नियमित प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत पहले से उपलब्ध मतदाता सूची को अद्यतन किया जाता है। इसमें नए नाम जोड़ने, गलतियां सुधारने और प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण करने पर जोर दिया जाता है।

इसके विपरीत SIR अधिक विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया है, जिसमें बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी की जांच कर सकते हैं। मतदाता सूची में संशोधन को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच आयोग का नया फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक दलों को भी मिलेगी मतदाता सूची

निर्वाचन आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इसके तहत राजनीतिक दलों को मतदाता सूचियां पढ़ने योग्य पीडीएफ प्रारूप में उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे राजनीतिक दल और उनके प्रतिनिधि मतदाता सूची की जांच कर सकेंगे तथा आवश्यक होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। आयोग ने छूटे हुए पात्र मतदाताओं, युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।

मतदाता सूची की शुद्धता चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार है। निर्वाचन आयोग के इस अभियान से नए पात्र मतदाताओं को पंजीकरण का अवसर मिलेगा और मौजूदा मतदाता अपने विवरण में आवश्यक सुधार करा सकेंगे। हालांकि, सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर उठी चिंताओं के बीच यह भी आवश्यक होगा कि दावों और आपत्तियों का निस्तारण निष्पक्ष तथा पारदर्शी तरीके से किया जाए। अब सभी की नजर 12 नवंबर को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची और उसके बाद होने वाली आपत्ति निस्तारण प्रक्रिया पर रहेगी।

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