
जामिया में भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को हटाने पर हंगामा, AISA ने पुलिस पर लगाए मारपीट के आरोप
जामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव की मांग पर आंदोलन तेज! भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को हटाने पर विवाद, AISA ने पुलिस पर मारपीट के गंभीर आरोप लगाए।

नई दिल्ली | 17 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली। देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस पर लगे मारपीट के आरोपों के कारण गंभीर विवाद में बदल गया है। 12 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में शामिल छात्रों को 17 अक्टूबर की सुबह प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने का मामला सामने आया है। वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस ने छात्रों को जबरन हटाया और उनके साथ मारपीट की।
AISA के अनुसार, यह कार्रवाई शनिवार सुबह करीब 5:30 बजे हुई। संगठन ने कुछ छात्रों के निलंबन और निष्कासन का आरोप भी लगाया है। हिरासत में लिए गए छात्रों को बाद में रिहा कर दिए जाने की खबर है। हालांकि, मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे विवाद की जड़ लगभग दो दशक पुराना सवाल है—जब देश के दूसरे विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव हो सकते हैं, तो जामिया मिल्लिया इस्लामिया में वर्ष 2006 से छात्र संघ क्यों नहीं है?
जामिया में भूख हड़ताल क्यों शुरू हुई?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पिछले करीब 20 वर्षों से विश्वविद्यालय स्तर पर निर्वाचित छात्र संघ नहीं है। छात्रों का कहना है कि इसके कारण उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए प्रभावी लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व उपलब्ध नहीं है।
आंदोलनकारी छात्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय में छात्रावास, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, कक्षाओं, लिफ्ट, शैक्षणिक सुविधाओं और प्रशासनिक फैसलों से संबंधित समस्याएं आती रहती हैं, लेकिन इन मुद्दों को सामूहिक रूप से उठाने के लिए कोई निर्वाचित केंद्रीय छात्र संघ नहीं है।
छात्रों का तर्क है कि दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में नियमित छात्र राजनीति और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था है। ऐसे में जामिया में भी विद्यार्थियों को अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलना चाहिए।
कब शुरू हुआ आंदोलन और कैसे बढ़ा विवाद?
9 अक्टूबर 2026 — अलीगढ़ से मिली प्रेरणाअलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने लंबे आंदोलन और भूख हड़ताल के बाद छात्र संघ चुनाव बहाल करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया। इस घटनाक्रम ने जामिया के छात्रों की पुरानी मांग को नई गति दी।
12 अक्टूबर — अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरूजामिया के गेट संख्या 18 पर शुरुआत में तीन छात्र भूख हड़ताल पर बैठे। बाद में यह संख्या पांच तक पहुंच गई।
13 अक्टूबर — प्रदर्शन स्थल बदलाछात्र मोहम्मद जासिम खान को कथित रूप से उठाकर सुखदेव विहार में छोड़ने के आरोप सामने आए। इसके बाद प्रदर्शनकारी गेट संख्या 7 के पास, मिर्जा गालिब की प्रतिमा के आसपास एकत्र हुए।
14–16 अक्टूबर — आंदोलन जारीछात्रों ने प्रशासन से छात्र संघ चुनावों की घोषणा करने की मांग की। इसी दौरान परिसर में पुलिस की मौजूदगी और पहचान पत्रों की जांच भी रिपोर्ट की गई।
17 अक्टूबर — छात्रों को हटाने पर विवादAISA के मुताबिक सुबह लगभग 5:30 बजे पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई करके छात्रों को हटाया। संगठन ने कथित मारपीट तथा निलंबन और निष्कासन के आदेशों का विरोध किया।
आखिर छात्रों की मांगें क्या हैं?
इस आंदोलन में शुरुआती मांग छात्र संघ की बहाली थी। 17 अक्टूबर की कार्रवाई के बाद AISA ने कुछ अतिरिक्त मांगें भी जोड़ दीं।
पहली माँग है जामिया छात्र संघ की बहाली: पूरे विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने वाली निर्वाचित छात्र संस्था बनाई जाए।
दूसरी मांगें छात्र संघ चुनाव की तारीख: विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित करे।
तीसरी माँग छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस हो: आंदोलन से जुड़े छात्रों के निलंबन और निष्कासन के आदेश बिना शर्त रद्द किए जाएं।
चौथी माँग चीफ प्रॉक्टर का इस्तीफा: AISA ने चीफ प्रॉक्टर असद मलिक से इस्तीफे की मांग की है।
पाँचवी माँग कथित मारपीट की स्वतंत्र जांच: पुलिस और सुरक्षाकर्मियों पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई की जाए।
छठी माँग छात्र समस्याओं के समाधान की व्यवस्था: छात्रावास, पेयजल, पुस्तकालय, कक्षाओं और शैक्षणिक समस्याओं पर चुने हुए प्रतिनिधियों के जरिए संवाद स्थापित हो।
इनमें शुरुआती छात्र संघ संबंधी मांगें और बाद में AISA द्वारा उठाई गई अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित मांगें अलग-अलग चरणों की हैं।
जामिया में छात्र संघ चुनाव कब और क्यों बंद हुए थे?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आखिरी छात्र संघ चुनाव वर्ष 2005 में हुए थे। इसके बाद 31 मार्च 2006 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ को भंग कर दिया। उस समय प्रशासन ने परिसर में हिंसा, अव्यवस्था, अकादमिक माहौल प्रभावित होने और छात्र प्रतिनिधियों द्वारा प्रशासनिक मामलों में कथित हस्तक्षेप जैसी चिंताओं का हवाला दिया था।
इसके बाद विश्वविद्यालय स्तर पर सीधे निर्वाचित छात्र संघ की व्यवस्था बहाल नहीं हुई विश्वविद्यालय ने विभिन्न विभागों में सब्जेक्ट एसोसिएशन जैसी प्रतिनिधित्व व्यवस्थाओं पर जोर दिया। इनमें छात्र अपने विभाग से संबंधित शैक्षणिक और अन्य मुद्दे उठा सकते हैं। लेकिन आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि विभागीय एसोसिएशन पूरे विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने वाले निर्वाचित छात्र संघ का विकल्प नहीं हो सकती।
क्या इससे पहले भी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन हुए हैं?
2005- आखिरी छात्र संघ चुनाव हुए
2006- विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्वाचित छात्र संघ भंग किया
2012- तत्कालीन कुलपति नजीब जंग ने उस शैक्षणिक सत्र में चुनाव कराने से इनकार किया; इसी वर्ष चुनाव की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई
2017- छात्र संघ बहाली की मांग फिर उठी; प्रशासन ने छात्र परिषद का वैकल्पिक प्रस्ताव रखा, जिसका छात्रों ने विरोध किया
2022- दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित याचिका का निस्तारण किया; अदालत ने भविष्य में चुनाव कराने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया
2026- 12 अक्टूबर से छात्र संघ चुनाव की मांग पर नई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू हुई
इस इतिहास से स्पष्ट है कि वर्तमान प्रदर्शन किसी अचानक उत्पन्न हुए विवाद का परिणाम नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित मांग का नया चरण है।
क्या दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया में छात्र संघ चुनावों पर रोक लगाई है?
वर्ष 2012 में दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर करके जामिया प्रशासन को लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप निष्पक्ष छात्र संघ चुनाव कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
वर्ष 2017 में छात्र संघ बहाली की मांग उठने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने लंबित अदालती मामले और कानूनी बाधाओं का हवाला दिया था।
20 दिसंबर 2022 को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले का निस्तारण कर दिया। विश्वविद्यालय का पक्ष था कि छात्र संघ पहले ही भंग किया जा चुका है, इसलिए चुनाव का प्रश्न नहीं उठता।
महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत के आदेश में भविष्य में चुनाव कराने पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि जामिया में छात्र संघ चुनाव हाईकोर्ट की स्थायी रोक के कारण नहीं हो रहे हैं।
पुलिस पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
AISA ने आरोप लगाया है कि 17 अक्टूबर की सुबह विश्वविद्यालय परिसर में कार्रवाई के दौरान छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया। संगठन का दावा है कि कार्रवाई के समय परिसर की लाइटें बंद कर दी गईं। इसके बाद भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को हटाया गया और कुछ के साथ मारपीट तथा दुर्व्यवहार किया गया।
AISA का कहना है कि कुछ छात्रों को चोटें आईं। संगठन के अनुसार, प्रदर्शन से जुड़े कुछ विद्यार्थियों को छह महीने के लिए निलंबित किया गया, जबकि अन्य को पूरे शैक्षणिक वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया। संगठन ने मांग की है कि कार्रवाई से संबंधित अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि ये AISA द्वारा लगाए गए आरोप हैं। उपलब्ध रिपोर्ट्स में घटना की स्वतंत्र जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए पुलिस या विश्वविद्यालय प्रशासन को आरोपों के आधार पर दोषी घोषित नहीं किया जा सकता।
जामिया में पिछले वर्षों में और किन मुद्दों पर प्रदर्शन हुए?
छात्र संघ बहाली की मांग के अलावा जामिया परिसर में दूसरे शैक्षणिक और प्रशासनिक मुद्दों पर भी प्रदर्शन हुए हैं।
फरवरी 2025: छात्रों ने विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का विरोध किया। AISA के अनुसार, कई विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और छात्र अधिकारों की मांग उठाई।
अप्रैल 2026: विश्वविद्यालय में आरएसएस शताब्दी से संबंधित एक कार्यक्रम के विरोध में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। AISA, SFI, NSUI और दूसरे संगठनों की भागीदारी सामने आई। कुछ छात्रों ने दुर्व्यवहार का आरोप लगाया, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शारीरिक नुकसान के आरोपों से इनकार किया।
अगस्त 2026: विश्वविद्यालय की स्पॉट एडमिशन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन हुए। इसके बाद चार छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई थी, जिसका NSUI ने विरोध किया।
अब इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
पहला, विश्वविद्यालय प्रशासन यह स्पष्ट करे कि सीधे निर्वाचित छात्र संघ बहाल करने में वास्तविक कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं क्या हैं।
दूसरा, आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई और कथित मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए, जिससे घटना के वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।
तीसरा, छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच औपचारिक बातचीत हो, जिसमें छात्र प्रतिनिधित्व की वैकल्पिक व्यवस्था, छात्र संघ चुनाव की संभावना और प्रदर्शन से संबंधित नियमों पर चर्चा की जा सके।
छात्र संगठनों का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान में मदद करेगा। दूसरी ओर, प्रशासन की प्रमुख चिंताएं विश्वविद्यालय में अनुशासन और शैक्षणिक गतिविधियों के सुचारु संचालन से जुड़ी रही हैं।
बीस साल पुरानी मांग फिर बनी जामिया में बड़े विवाद की वजह
जामिया मिल्लिया इस्लामिया का वर्तमान आंदोलन केवल पांच छात्रों की भूख हड़ताल तक सीमित नहीं है। यह विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधित्व की लगभग बीस वर्ष पुरानी व्यवस्था से जुड़ा विवाद है।
वर्ष 2005 में आखिरी छात्र संघ चुनाव और 2006 में छात्र संघ भंग होने के बाद कई बार इसकी बहाली की मांग उठी। वर्ष 2012 में मामला अदालत तक पहुंचा, 2017 में छात्र परिषद के प्रस्ताव पर विवाद हुआ और 2022 में अदालती याचिका का निस्तारण भी हो गया।
इसके बावजूद विश्वविद्यालय स्तर पर निर्वाचित छात्र संघ की बहाली नहीं हो सकी। अब 12 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई भूख हड़ताल और 17 अक्टूबर की प्रशासनिक कार्रवाई ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है।




