
IIT-BHU में नए छात्रों का होगा ड्रग टेस्ट: शिक्षा मंत्रालय के निर्देश पर बड़ा फैसला
IIT-BHU में नए छात्रों का ड्रग टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है । केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के निर्देश पर नौ सदस्यीय समिति गठित, प्रो. राजेश कुमार करेंगे निगरानी। जांच से पहले छात्रों की सहमति जरूरी होगी।

नई दिल्ली | 17 अक्टूबर 2026
वाराणसी। देश के प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय), वाराणसी यानी IIT-BHU में नए विद्यार्थियों की नशीले पदार्थों के सेवन संबंधी जांच कराने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के बाद संस्थान ने नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए यूरिन आधारित ड्रग स्क्रीनिंग की व्यवस्था बनाने का फैसला किया है।
इसकी निगरानी के लिए संस्थान ने 8 अक्टूबर 2026 को नौ सदस्यीय समिति के गठन की अधिसूचना जारी की। इसमें संस्थान के वरिष्ठ प्राध्यापकों के साथ चिकित्सा विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। इस फैसले का घोषित उद्देश्य विद्यार्थियों में नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम करना और उच्च शिक्षण संस्थानों में नशामुक्त एवं सुरक्षित वातावरण को बढ़ावा देना है।
UGC का आदेश या शिक्षा मंत्रालय का निर्देश?
इस खबर को समझने के लिए सबसे पहले एक महत्वपूर्ण अंतर जानना जरूरी है।
कई समाचारों में इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्देश के रूप में प्रस्तुत किया गया है। लेकिन IIT-BHU की अधिसूचना पर आधारित रिपोर्ट्स में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का उल्लेख है। संस्थान ने इन्हीं दिशा-निर्देशों के संदर्भ में यूरिन आधारित ड्रग टेस्ट कराने के लिए समिति बनाई है।
आईआईटी जैसे संस्थान संसद के कानूनों के अंतर्गत संचालित होते हैं। इसलिए इस निर्णय को बिना अलग प्रमाण के सभी विश्वविद्यालयों में तत्काल लागू होने वाला सार्वभौमिक UGC आदेश बताना सही नहीं होगा। संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर 8 अक्टूबर की समिति गठन अधिसूचना दर्ज है।
किन छात्रों का होगा ड्रग टेस्ट?
नई व्यवस्था मुख्य रूप से संस्थान में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग के लिए तैयार की जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार निम्नलिखित पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी इसके दायरे में आएंगे। इस लिस्ट में बीटेक (B.Tech) के नए विद्यार्थी, इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री (IDD) के विद्यार्थी, एमटेक (M.Tech) के विद्यार्थी, एमफार्मा (M.Pharm) के विद्यार्थी, पीएचडी में प्रवेश लेने वाले शोधार्थी शामिल है ।
उपलब्ध दाखिला आंकड़ों के अनुसार, IIT-BHU में हर वर्ष लगभग 1,500 विद्यार्थी बीटेक और डुअल डिग्री पाठ्यक्रमों में, करीब 400 एमटेक में और लगभग 300 पीएचडी में प्रवेश लेते हैं।
इस प्रकार करीब 2,200 नए विद्यार्थियों के इस व्यवस्था के दायरे में आने का अनुमान है। यह संभावित संख्या है, वास्तविक परीक्षण करवाने वाले विद्यार्थियों की अंतिम संख्या नहीं।
आखिर क्यों पड़ी ड्रग टेस्ट कराने की जरूरत?
शिक्षा मंत्रालय की इस पहल के पीछे उच्च शिक्षण संस्थानों में नशीले पदार्थों के सेवन को रोकने की व्यापक चिंता बताई गई है। कॉलेज जीवन में विद्यार्थियों पर पढ़ाई, परीक्षा, प्रतिस्पर्धा और करियर से जुड़ा दबाव हो सकता है। ऐसे वातावरण में नशे से जुड़ी समस्याओं की रोकथाम, समय पर पहचान और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। इस पहल के प्रमुख उद्देश्य समझे जा सकते हैं।
नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम: संस्थान परिसर और छात्रावासों में नशे से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को कम करना।
समय रहते पहचान: ऐसे विद्यार्थियों की पहचान करना जिन्हें नशीले पदार्थों के सेवन से संबंधित स्वास्थ्य सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण: विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, पढ़ाई और परिसर की सुरक्षा को बेहतर बनाए रखना।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि IIT-BHU में बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों का सेवन होने का कोई विशिष्ट नया आंकड़ा इस आदेश के आधार के रूप में सामने नहीं आया है। इसलिए इस पहल को संस्थान के सभी या अधिकांश विद्यार्थियों के नशे में शामिल होने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
किसकी देखरेख में होगी छात्रों की ड्रग जांच?
आईआईटी-बीएचयू में नए छात्रों की ड्रग जांच को व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए संस्थान प्रशासन ने नौ सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर राजेश कुमार करेंगे। समिति में शैक्षणिक मामलों के अधिष्ठाता प्रोफेसर देवेंद्र सिंह, सह-अधिष्ठाता प्रोफेसर मेधा झा और प्रोफेसर अभिषेक कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया है।
जांच में चिकित्सकीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों को भी समिति में जगह दी गई है। इनमें फार्माकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर किरण गिरी, जैव रसायन विभाग के डॉ. कमलेश पालंदुरकर और पैथोलॉजी विभाग की डॉ. दीपा रानी शामिल हैं।
यह समिति ड्रग स्क्रीनिंग की प्रक्रिया का समन्वय और निगरानी करेगी। जांच के दौरान छात्रों की सहमति, नमूनों के संग्रह, परीक्षण की विश्वसनीयता और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की गोपनीयता जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे। हालांकि, जांच किस प्रयोगशाला में होगी, परीक्षण कब शुरू होंगे और रिपोर्ट के आधार पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, इसका विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी स्पष्ट नहीं है।
छात्रों की सहमति होगी जरूरी?
ड्रग टेस्ट को लेकर छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि क्या प्रत्येक छात्र को अनिवार्य रूप से जांच करानी होगी। इस संबंध में प्रकाशित रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच से पहले छात्रों की सहमति ली जाएगी। इसके लिए सहमति पत्र भरवाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। यानी उपलब्ध जानकारी के अनुसार परीक्षण स्वैच्छिक सहमति के आधार पर होगा।
इसका अर्थ है कि जांच से पहले विद्यार्थी को प्रक्रिया के बारे में जानकारी देना और उसकी सहमति प्राप्त करना जरूरी होगा। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अस्पष्टता बनी हुई है। यदि कोई विद्यार्थी टेस्ट कराने से इनकार करता है तो क्या उसके प्रवेश, पंजीकरण या छात्रावास आवंटन पर कोई प्रभाव पड़ेगा? इस बारे में संस्थान की विस्तृत आधिकारिक प्रक्रिया अभी सामने नहीं आई है। इसी तरह छात्रों की रिपोर्ट किसके पास सुरक्षित रखी जाएगी, उसे कौन देख सकेगा और कितने समय तक रखा जाएगा, इन मुद्दों पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश अपेक्षित हैं। इसलिए फिलहाल यह दावा करना सही नहीं होगा कि ड्रग टेस्ट से इनकार करने पर किसी छात्र का प्रवेश रद्द हो जाएगा।
क्या पहले भी IIT-BHU में छात्रों का ड्रग टेस्ट हुआ था?
IIT-BHU में नए विद्यार्थियों की व्यवस्थित ड्रग स्क्रीनिंग के लिए पहली बार नौ सदस्यीय समिति गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर 8 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना इसकी पुष्टि करती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि IIT-BHU में इससे पहले कभी किसी विद्यार्थी की नशीले पदार्थों से संबंधित चिकित्सकीय जांच नहीं हुई थी। ऐसी पूर्व जांचों का पूरा सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
फिलहाल यह नई व्यवस्था है, जिसके तहत प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की यूरिन आधारित स्क्रीनिंग की तैयारी की जा रही है। देश के अन्य शैक्षणिक संस्थानों में पहले ऐसी जांच हुई है या नहीं, यह अलग विषय है और इसके आधार पर IIT-BHU में पूर्व में परीक्षण होने का दावा नहीं किया जा सकता।
अगर किसी छात्र की ड्रग टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो क्या होगा?
यह सवाल छात्रों और अभिभावकों के लिए सबसे अधिक चिंता का विषय हो सकता है। अभी तक IIT-BHU की ओर से ऐसी विस्तृत सार्वजनिक प्रक्रिया सामने नहीं आई है जिसमें बताया गया हो कि जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर विद्यार्थी के साथ क्या व्यवहार किया जाएगा। क्या विद्यार्थी की दोबारा जांच होगी, क्या उसे चिकित्सकीय परामर्श दिया जाएगा, क्या रिपोर्ट गोपनीय रखी जाएगी या उस पर किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी—इन सवालों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सामान्य सिद्धांतों के अनुसार, ऐसी जांच का उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिन विद्यार्थियों को सहायता की जरूरत हो, उन्हें परामर्श और उचित उपचार उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। किसी छात्र की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उसके खिलाफ निर्णय लेने से पहले परीक्षण की विश्वसनीयता, चिकित्सकीय कारणों और दोबारा जांच के अवसर पर भी ध्यान देना आवश्यक होगा।
ड्रग टेस्ट को लेकर छात्रों का क्या कहना है?
IIT-BHU के इस फैसले पर छात्रों की प्रतिक्रियाओं को लेकर अभी स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध प्रमुख समाचार रिपोर्ट्स में किसी छात्र संगठन या छात्र प्रतिनिधि की ओर से फैसले के समर्थन अथवा विरोध में विस्तृत, सत्यापित आधिकारिक बयान नहीं मिला है। ऐसे में सभी छात्रों को इस निर्णय का समर्थक या विरोधी बताना उचित नहीं होगा।
हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर छात्रों के हित में कई सवाल उठते हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल जांच की अनिवार्यता का है। यदि परीक्षण स्वैच्छिक है, तो सहमति नहीं देने वाले विद्यार्थियों के लिए क्या नियम होंगे? इसके अलावा विद्यार्थियों की व्यक्तिगत स्वास्थ्य जानकारी की सुरक्षा कैसे होगी और क्या रिपोर्ट को अन्य प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा?
विद्यार्थियों के लिए यह जानना भी आवश्यक होगा कि जांच में कोई असामान्य परिणाम आने पर उन्हें स्पष्टीकरण देने, चिकित्सकीय सलाह लेने और पुनः परीक्षण कराने का अवसर मिलेगा या नहीं। इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आने से छात्रों और उनके अभिभावकों की शंकाएं दूर करने में मदद मिल सकती है।
क्या दूसरे IIT और IIM में भी लागू होगा ऐसा नियम?
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट्स में IIT और IIM जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों का उल्लेख मिलता है। लेकिन IIT-BHU की तरह दूसरे सभी संस्थानों में जांच शुरू हो जाने या नौ सदस्यीय समितियां गठित हो जाने की पुष्टि नहीं है।
IIT-BHU ने फिलहाल समिति गठन करके इस दिशा में औपचारिक कदम उठाया है। आने वाले समय में दूसरे संस्थान भी इस तरह की व्यवस्था अपनाते हैं या नहीं, यह उनके आधिकारिक निर्णयों से स्पष्ट होगा।




