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MLC चुनाव: यूपी में BJP को 5 सीटें, काशी में सपा की जीत; कर्नाटक में NDA का क्लीन स्वीप।

उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषद की कुल 28 सीटों पर हुए चुनावों में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक परिणाम सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की शिक्षक सीट समाजवादी पार्टी ने जीत ली।

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MLC चुनाव: यूपी में BJP को 5 सीटें, काशी में सपा की जीत; कर्नाटक में NDA का क्लीन स्वीप।

LIVE 24 TV | विशेष रिपोर्ट | 28 अक्टूबर 2026

उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनावों ने देश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की शिक्षक सीट समाजवादी पार्टी ने अपने पास बरकरार रखी है। कांग्रेस शासित कर्नाटक में भाजपा और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के गठबंधन ने सभी चार सीटें जीत ली हैं। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल ने भाजपा के पांच बार के विधान परिषद सदस्य को हराया और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने विधान परिषद में पहली जीत दर्ज की। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास आघाड़ी के बीच मुकाबले में दोनों गठबंधनों को सफलता मिली है। इन चुनावों के परिणामों और रुझानों का उत्तर प्रदेश के 2027 तथा कर्नाटक के 2028 विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक विश्लेषण किया जा रहा है।

चार राज्यों की 28 सीटों पर चुनाव

देश के चार राज्यों में विधान परिषद की कुल 28 सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान हुआ था। इनमें उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की 8, महाराष्ट्र की 5 और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल हैं। मतगणना 27 अक्टूबर को शुरू हुई और 28 अक्टूबर को भी कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में जारी रही। उत्तर प्रदेश में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान हुआ। बिहार में चार स्नातक और चार शिक्षक सीटों पर चुनाव कराए गए। महाराष्ट्र में तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र थे, जबकि कर्नाटक में दो स्नातक और दो शिक्षक सीटों पर मुकाबला हुआ।

इन चुनावों की विशेषता यह है कि इनमें सामान्य विधानसभा चुनावों की तरह सभी मतदाता भाग नहीं लेते। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित योग्यता वाले पंजीकृत शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पात्र पंजीकृत स्नातक मतदान करते हैं। यही वजह है कि इन चुनावों के परिणाम राजनीतिक दलों की संगठनात्मक पकड़ और विशेष मतदाता समूहों के बीच उनकी स्थिति के संकेत देते हैं।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में 11 सीटों पर चुनाव हुए, जिनमें छह शिक्षक और पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। शुरुआती घोषित नतीजों में भाजपा ने पांच सीटें जीतीं, जबकि वाराणसी शिक्षक सीट पर समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव विजयी हुए। बिहार की आठ सीटों में चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र हैं। पटना शिक्षक सीट पर राजद के डॉ. संजीव ने भाजपा उम्मीदवार को हराया। दरभंगा शिक्षक सीट पर जन सुराज को सफलता मिली, जबकि तिरहुत में भाजपा और सारण में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।

कर्नाटक की चारों सीटों पर भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने जीत दर्ज की। भाजपा को तीन और जेडीएस को एक सीट मिली। महाराष्ट्र की पांच सीटों पर भी मतगणना जारी है। इनमें तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। चारों राज्यों के नतीजों पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है। शेष सीटों के अंतिम परिणाम आने के बाद पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

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मेरठ की दोनों सीटों पर भाजपा की जीत

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ-सहारनपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार दिनेश कुमार गोयल ने जीत दर्ज की। उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार प्रमोद सिंह भाटी को हराया।

मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के श्रीचंद शर्मा विजयी रहे। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नितिन तोमर को पराजित किया। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा ने अपने मौजूदा प्रतिनिधित्व को बरकरार रखा। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन शिक्षक और स्नातक मतदाता समूहों में पार्टी के संगठनात्मक संपर्क की निरंतरता सामने आई।

बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी भाजपा के डॉ. हरी सिंह ढिल्लों ने जीत दर्ज की। उन्हें 21,672 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के हाजी मोहम्मद दानिश अख्तर को 3,996 मत प्राप्त हुए। ढिल्लों ने 17,676 मतों के अंतर से चुनाव जीता।

आपको बता दें कि लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के उमेश द्विवेदी ने जीत दर्ज की। उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सुशील कुमार को हराया। इस सीट पर शिक्षक संगठनों और उम्मीदवारों के व्यक्तिगत संपर्क की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उमेश द्विवेदी पहले से इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और उन्हें दोबारा सफलता मिली। लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला जारी रहा।

प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भाजपा को हार

उत्तर प्रदेश के विधान परिषद चुनाव की सबसे चर्चित सीटों में वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल रहा। यहां समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को हराकर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। लाल बिहारी यादव को लगभग 10,958 मत मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 6,060 वोट प्राप्त हुए। जीत का अंतर करीब 4,898 मत रहा।

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। इसी वजह से यहां भाजपा की हार ने राजनीतिक चर्चा को बढ़ा दिया। हालांकि यह समझना जरूरी है कि वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और वाराणसी लोकसभा क्षेत्र का मतदाता आधार अलग है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के परिणाम को पूरे संसदीय क्षेत्र की राजनीतिक पसंद में बदलाव का प्रमाण नहीं माना जा सकता।समाजवादी पार्टी ने इसे अपनी संगठनात्मक सफलता के रूप में देखा, जबकि भाजपा के लिए यह परिणाम शिक्षक मतदाताओं के बीच अपनी रणनीति की समीक्षा का विषय हो सकता है।

आगरा शिक्षक सीट पर सपा की सफलता, मतगणना को लेकर क्यों हुआ विवाद?

आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के डॉ. आकाश अग्रवाल की जीत की खबर सामने आई। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी उनकी सफलता का दावा करते हुए प्रशासन से तत्काल जीत का प्रमाणपत्र देने की मांग की। आकाश अग्रवाल 2020 में इसी सीट से निर्दलीय चुनाव जीते थे। इस बार उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।

मतगणना के दौरान भाजपा और सपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी हुए। सपा ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

आपको बता दें कि विवाद की मुख्य वजह मतपत्रों की वैधता और मतगणना प्रक्रिया पर उठे सवाल थे। कुछ मतपत्रों पर दो निशान, पीठासीन अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने और अलग-अलग पेन के इस्तेमाल को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। इसके चलते करीब तीन घंटे तक मतगणना प्रभावित रही। समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि उसके उम्मीदवार की बढ़त के बावजूद जानबूझकर मतगणना रोकी गई। हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी मतपत्रों की जांच नियमों के अनुसार की जा रही थी।

इस दौरान भाजपा और सपा समर्थकों के बीच कहासुनी और झड़प की खबरें भी सामने आईं। आकाश अग्रवाल ने मारपीट का आरोप लगाया, जबकि भाजपा प्रत्याशी ने भी विरोध जताया।

इससे पहले मतदान में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद तीन केंद्रों पर दोबारा मतदान कराया गया था। विवाद के बीच अंतिम परिणाम में सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल को विजयी घोषित किया गया।

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गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर मतगणना में हंगामा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक क्षेत्र गोरखपुर से जुड़ी गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन सीट पर भी मुकाबला बेहद करीबी रहा। भाजपा उम्मीदवार ध्रुव कुमार त्रिपाठी और निर्दलीय राजीव यादव के बीच वोटों का अंतर काफी कम था। एक मतगणना अपडेट के अनुसार, ध्रुव कुमार त्रिपाठी को 11,881 मत और राजीव यादव को 11,415 वोट मिले थे। मतगणना के दौरान मऊ के एक मतदान केंद्र की मतपेटी में दर्ज आंकड़ों से 52 अधिक मतपत्र मिलने की शिकायत सामने आई। उम्मीदवारों ने आपत्ति दर्ज कराई और मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

शिकायत के बाद एक अधिकारी को हटाए जाने की खबर भी सामने आई। प्रशासन ने मतगणना नियमानुसार कराने की बात कही। यह विवाद चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बना, हालांकि किसी भी आरोप को जांच के निष्कर्ष के बिना प्रमाणित गड़बड़ी नहीं कहा जा सकता।

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में विधान परिषद की इन 11 सीटों के नतीजों को राजनीतिक दल अपने संगठनात्मक प्रदर्शन के आकलन में इस्तेमाल कर सकते हैं।

भाजपा ने मेरठ, बरेली और लखनऊ जैसे क्षेत्रों में जीत दर्ज की है। वहीं समाजवादी पार्टी ने वाराणसी और आगरा जैसे महत्वपूर्ण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सफलता हासिल की। लेकिन विधान परिषद का यह चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग है। इसका मतदाता समूह सीमित और विशेष होता है। ऐसे में इन परिणामों से 2027 के विधानसभा चुनाव का सीधा अनुमान नहीं निकाला जा सकता।

कर्नाटक: कांग्रेस सरकार के बीच भाजपा-जेडीएस ने चारों सीटें जीतीं

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा और जनता दल सेक्युलर के गठबंधन ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की है। भाजपा को तीन और जेडीएस को एक सीट मिली। सत्तारूढ़ कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। इन चुनावों में भाजपा ने अपने तीन उम्मीदवार उतारे थे, जबकि बेंगलुरु शिक्षक सीट गठबंधन की सहयोगी जेडीएस के हिस्से में थी। भाजपा के एस.वी. संकनूर ने पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज की। दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट पर भाजपा के के.एम. सुरेश विजयी रहे। उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के शशिल जी. नमोशी ने जीत हासिल की, जबकि बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस उम्मीदवार ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के उम्मीदवार को हराया।

कर्नाटक के चुनाव में बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का नतीजा विशेष रूप से चर्चा में रहा। यहां जेडीएस के ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के अनुभवी नेता और पांच बार के एमएलसी पुट्टन्ना को पराजित किया। पुट्टन्ना लंबे समय से शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उनकी हार कांग्रेस के लिए इसलिए उल्लेखनीय रही क्योंकि राज्य में पार्टी की सरकार होने के बावजूद वह अपनी इस सीट को बरकरार नहीं रख सकी। दूसरी ओर उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के शशिल जी. नमोशी ने लगातार पांचवीं जीत दर्ज की। उन्हें 15,596 प्रथम वरीयता वोट मिले, जबकि कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर को 12,299 मत मिले। जीत का अंतर 3,297 मत रहा।

क्या 2028 विधानसभा चुनाव में दिखेगा असर?

कर्नाटक में विधान परिषद की चारों सीटों पर भाजपा-जेडीएस गठबंधन की जीत ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। साल 2028 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले इन नतीजों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद विपक्षी गठबंधन ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की है।

23 अक्टूबर को हुए चुनाव में भाजपा ने तीन और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने एक सीट जीती। भाजपा ने उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सफलता हासिल की। वहीं, जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने बेंगलुरु शिक्षक सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी पुट्टन्ना को 908 मतों से हराया। इन नतीजों से स्पष्ट हुआ कि दोनों सहयोगी दल चारों निर्वाचन क्षेत्रों में मिलकर चुनाव लड़ने और अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाने में सफल रहे।

राजनीतिक दृष्टि से भाजपा-जेडीएस गठबंधन के लिए यह चुनाव संगठनात्मक तालमेल की एक महत्वपूर्ण परीक्षा था। दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा और संयुक्त चुनावी रणनीति इन चार क्षेत्रों में सफल रही। लेकिन विधान परिषद और विधानसभा चुनाव की प्रकृति अलग है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सीमित संख्या में पंजीकृत मतदाता मतदान करते हैं, जबकि विधानसभा चुनाव में व्यापक मतदाता वर्ग भाग लेता है। इसलिए चार विधान परिषद सीटों के परिणामों को पूरे कर्नाटक के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले रोजगार, शिक्षा, महंगाई, किसानों की समस्याएं, विकास योजनाएं और राज्य सरकार की नीतियां राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे हो सकते हैं।

बिहार: आठ सीटों पर मुकाबला, राजद ने भाजपा के पुराने गढ़ में जीत दर्ज की

बिहार विधान परिषद चुनाव में आठ सीटों के लिए मतदान हुआ। इनमें पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी की स्नातक सीटें तथा पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण की शिक्षक सीटें शामिल थीं। बिहार में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चारों परिणाम सामने आए। इनमें भाजपा, राजद, जन सुराज और एक निर्दलीय उम्मीदवार को एक-एक सीट मिली। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जदयू और भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी मुकाबले को दिलचस्प बनाया।

बिहार विधान परिषद चुनाव में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम सबसे चर्चित घटनाओं में रहा। इस सीट पर राष्ट्रीय जनता दल के डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा के वरिष्ठ नेता नवल किशोर यादव को हराया। नवल किशोर यादव लगातार पांच बार इस सीट से चुनाव जीत चुके थे। लगभग तीन दशक से उनका इस निर्वाचन क्षेत्र में प्रभाव रहा था। इस चुनाव में राजद उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार को 4,487 वोट मिले, जबकि भाजपा के नवल किशोर यादव को 3,430 मत प्राप्त हुए। इस तरह राजद उम्मीदवार ने 1,057 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।

राजद के लिए यह सफलता महत्वपूर्ण रही, क्योंकि पार्टी ने एक लंबे समय से स्थापित भाजपा उम्मीदवार को पराजित किया। पटना शिक्षक सीट पर जन सुराज की डॉ. दिव्या ज्योति भी चुनाव मैदान में थीं, लेकिन मुख्य मुकाबला राजद और भाजपा के बीच रहा।

बिहार के दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को पहली बड़ी सफलता मिली। जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा को हराया। सुरेश प्रसाद राय ने 324 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। इस परिणाम के साथ जन सुराज को बिहार विधान परिषद में अपना पहला निर्वाचित प्रतिनिधि मिला।

प्रशांत किशोर की पार्टी के लिए यह संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। खासकर इसलिए कि पार्टी को एक ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में जीत मिली, जहां शिक्षक मतदाताओं के बीच उम्मीदवारों का व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय मुद्दे अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि जन सुराज की एक सीट पर जीत को पूरे बिहार के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद में व्यापक परिवर्तन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

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बिहार की चार स्नातक सीटों पर क्या रहा हाल?

बिहार में चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम शिक्षक सीटों की तुलना में देर से स्पष्ट हो रहे थे।

पटना स्नातक सीट: जनता दल यूनाइटेड के नीरज कुमार के विजयी होने की रिपोर्ट सामने आई। उन्होंने अपना मुकाबला राजद और जन सुराज के उम्मीदवारों के बीच लड़ा। हालांकि कुछ समाचार रिपोर्टों में अंतिम प्रमाणपत्र की स्थिति अलग-अलग समय पर अपडेट हुई।

दरभंगा स्नातक सीट: भाजपा के सर्वेश कुमार ने बढ़त बनाई। पांचवें दौर की मतगणना में उन्हें 8,930 मत मिले थे, जबकि राजद के अनिल कुमार झा को 7,545 वोट मिले। बाद की कुछ रिपोर्टों में उनकी जीत की भी जानकारी दी गई।

तिरहुत स्नातक सीट: निर्दलीय वंशीधर ब्रजवासी और जदयू के अभिषेक झा के बीच मुकाबला रहा। एक अपडेट में ब्रजवासी को 11,510 और अभिषेक झा को 9,943 मत मिले थे। हालांकि वह बढ़त थी, अंतिम परिणाम नहीं।

कोसी स्नातक सीट: भाजपा के डॉ. एन.के. यादव प्रथम वरीयता के मतों में आगे रहे। उन्हें 24,075 मत मिले, जबकि राजद के उम्मीदवार को 18,535 वोट प्राप्त हुए। चुनाव में आवश्यक मतों का कोटा पूरा न होने के कारण आगे की वरीयता के मतों की गिनती महत्वपूर्ण बनी रही। इस प्रकार बिहार की चार शिक्षक सीटों के परिणाम स्पष्ट थे, जबकि स्नातक सीटों पर उपलब्ध रिपोर्टों में अंतिम घोषणा और मतगणना की स्थिति अलग-अलग थी।

महाराष्ट्र: पांच सीटों पर महायुति और महाविकास आघाड़ी के बीच मुकाबला

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास आघाड़ी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। यहां पुणे स्नातक, नागपुर स्नातक, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक, पुणे शिक्षक और अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ था। इन पांच सीटों के लिए कुल 182 उम्मीदवार मैदान में थे। मतदान का औसत प्रतिशत 72.96 रहा।

सत्तारूढ़ महायुति में भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल हैं। दूसरी ओर महाविकास आघाड़ी में कांग्रेस, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना शामिल हैं। 28 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, महायुति को तीन और महाविकास आघाड़ी को दो सीटों पर सफलता मिली।

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के सुधाकर कोहले ने सफलता हासिल की। उनके सामने कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी थे। इसके अलावा निर्दलीय नितेश कराले भी चुनाव मैदान में थे। नागपुर लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे में इस निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए संगठनात्मक दृष्टि से अहम रहा।

पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख-जाधव को सफलता मिली। उनके सामने भाजपा की स्मिता जाधव थीं। इस निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। शरद पवार की पार्टी के लिए यह सफलता इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि महाराष्ट्र में एनसीपी के विभाजन के बाद दोनों गुटों के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।

छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में एनसीपी के शरद पवार गुट के प्रतापसिंह पाटिल ने जीत दर्ज की। उनका मुकाबला दूसरे एनसीपी गुट के उम्मीदवार सतीश चव्हाण से था। इस चुनाव ने महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के बीच जारी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को उजागर किया। पुणे और छत्रपति संभाजीनगर की दोनों स्नातक सीटों पर मिली सफलता महाविकास आघाड़ी के लिए महत्वपूर्ण रही।

अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किरण सरनाइक को सफलता मिली। इस सीट पर कांग्रेस की अदिति पोहारे सहित कई उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान प्रतिशत काफी अधिक रहा। चुनाव में लगभग 92 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया था।

पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार कौस्तुभ गावड़े विजयी रहे। यहां कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी जयंत आसगांवकर भी चुनाव मैदान में थे। वहीं महायुति के भीतर स्थानीय स्तर पर मतभेद देखने को मिले, क्योंकि शिवसेना ने भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के मुकाबले एक निर्दलीय प्रत्याशी का समर्थन किया था। इसके बावजूद भाजपा ने सीट जीत ली। इस तरह महाराष्ट्र में भाजपा को दो, शिंदे गुट की शिवसेना को एक और शरद पवार की एनसीपी को दो सीटें मिलीं।

क्या इन चुनावों का विधानसभा की राजनीति पर असर पड़ेगा?

उत्तर प्रदेश में 2027 और कर्नाटक में 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले इन परिणामों पर राजनीतिक चर्चा स्वाभाविक है। विधान परिषद की सीटों पर मिली सफलता किसी दल के लिए संगठनात्मक उपलब्धि हो सकती है। इससे पार्टी को विशेष मतदाता वर्गों के बीच अपनी स्थिति समझने में मदद मिलती है। लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या और पात्रता सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होती है।इसलिए इन परिणामों से भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनावों के विजेता का निर्धारण नहीं किया जा सकता।

चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव ने अलग-अलग राजनीतिक तस्वीर प्रस्तुत की है। उत्तर प्रदेश में भाजपा को पांच सीटों पर जीत की रिपोर्ट मिली, जबकि समाजवादी पार्टी ने वाराणसी सहित महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों में सफलता हासिल की। कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने चारों सीटें जीतकर कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिलने दी। बिहार में राजद ने पटना शिक्षक सीट पर भाजपा के पुराने प्रतिनिधित्व को समाप्त किया। जन सुराज ने पहली बार विधान परिषद में प्रवेश किया और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।महाराष्ट्र में महायुति और महाविकास आघाड़ी दोनों को सफलता मिली। शरद पवार की एनसीपी ने दो स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की।

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