
कर्नाटक में SIR से बड़ा उलटफेर! करीब 1 करोड़ नाम गायब होने का दावा, कहीं आपका वोट भी तो नहीं कटा?
कर्नाटक में चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। अगस्त की ड्राफ्ट लिस्ट से करीब 1.08 करोड़ नाम बाहर थे। दावे-आपत्तियों और सत्यापन के बाद अंतिम सूची में लगभग 4.55 करोड़ मतदाता बचे हैं।

LIVE 24 TV | विशेष रिपोर्ट | 27 अक्टूबर 2026
बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद चुनाव आयोग ने मंगलवार को अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी। इस प्रक्रिया में प्रदेश की मतदाता संख्या करीब 5.54 करोड़ से घटकर लगभग 4.55 करोड़ रह गई है। यानी पुनरीक्षण से पहले की तुलना में करीब 99.32 लाख मतदाताओं की शुद्ध कमी दर्ज हुई है।
24 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में लगभग 1.08 करोड़ नाम शामिल नहीं किए गए थे। हालांकि, दावे-आपत्तियों और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद कुछ मतदाताओं के नाम जोड़े गए। इसलिए 1.08 करोड़ नाम हटने का आंकड़ा ड्राफ्ट सूची से संबंधित है, अंतिम सूची से नहीं।
आखिर इतने मतदाताओं के नाम क्यों हटाए गए?
SIR प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया। जिन लोगों के गणना फॉर्म नहीं मिले या जिनके विवरण में समस्याएं थीं, उनकी अलग-अलग श्रेणियों में पहचान की गई।
इनमें अनुपस्थित मतदाता, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए लोग, मृत व्यक्ति, एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाता और अन्य कारणों से सत्यापित नहीं हो सके नाम शामिल थे।
ड्राफ्ट सूची में बाहर हुए करीब 1.08 करोड़ नामों में 65.46 लाख लोगों को स्थायी रूप से स्थानांतरित, 19.01 लाख को अनुपस्थित, 16.40 लाख को मृत और करीब 7.10 लाख को डुप्लीकेट या अन्यत्र पंजीकृत बताया गया।
61,867 मतदाताओं पर चुनाव आयोग की कार्रवाई
चुनाव आयोग ने सत्यापन के दौरान लगभग 43.83 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए थे। इनके दस्तावेजों और विवरण की जांच के बाद 61,867 मतदाताओं को अयोग्य पाया गया।
बाकी अधिकांश मतदाता सत्यापन के बाद सूची में बने रहे। आयोग का कहना है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम छूटना नहीं चाहिए और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में नहीं रहना चाहिए। नाम हटाने से प्रभावित नागरिकों के पास निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपील करने और दोबारा पंजीकरण के लिए आवेदन करने का विकल्प है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल, राजनीतिक विवाद तेज
कर्नाटक में SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है। कांग्रेस ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और फॉर्म-7 के माध्यम से सामूहिक आपत्तियां दर्ज कराने पर सवाल उठाए हैं।
22 अक्टूबर तक नाम हटाने की मांग वाले फॉर्म-7 आवेदनों की संख्या लगभग 2.28 लाख पहुंच गई थी। इनमें कुछ आवेदनों को लेकर फर्जीवाड़े के आरोप भी लगे। चुनाव अधिकारियों ने संदिग्ध मामलों की जांच के निर्देश दिए। वहीं, चुनाव आयोग ने दोहराया कि पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना SIR का उद्देश्य है।
SIR क्या है और इसे क्यों कराया गया?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना, गलत और दोहरी प्रविष्टियों की पहचान करना तथा पात्र नागरिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करना है।
कर्नाटक की सभी 224 विधानसभा सीटों पर यह प्रक्रिया संचालित हुई। इसमें बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर गणना फॉर्म और मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया।
कर्नाटक में SIR विवाद पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी की सफाई
कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे सवालों पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार ने स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि केवल फॉर्म-7 के आधार पर किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाता। प्रत्येक आपत्ति की जांच और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, जिन मतदाताओं के पुराने रिकॉर्ड से विवरण नहीं मिले या जिनकी जानकारी में विसंगतियां थीं, उन्हें सत्यापन के लिए नोटिस जारी किए गए। राज्य में 43.82 लाख से अधिक नोटिसों पर सुनवाई पूरी की गई।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और गलत विवरण सुधरवाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है।
फॉर्म-6 के जरिए दोबारा वोटर लिस्ट में जुड़ सकेंगे नाम
कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के बाद जिन पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में नहीं हैं, वे फॉर्म-6 के जरिए नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए चुनाव आयोग के वोटर सर्विस पोर्टल पर ऑनलाइन या बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के माध्यम से ऑफलाइन आवेदन किया जा सकता है। जरूरी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए जाएंगे। वहीं, गलत तरीके से नाम हटाए जाने पर नियमानुसार अपील का विकल्प भी उपलब्ध है।
कर्नाटक में पुरुषों से 4 लाख अधिक महिला मतदाता
कर्नाटक की मतदाता सूची में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं के मुकाबले लगभग चार लाख अधिक बताई गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत 24 अगस्त से शुरू हुई दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया करीब दो महीने तक चली।
इस दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल लगभग 4.4 करोड़ मतदाताओं में से करीब 43.8 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए। अधिकारियों के अनुसार, दस्तावेजों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया के बाद लगभग 60 हजार मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से हटा दिए गए।
हालांकि, सूची से नाम हटाए जाने के कारणों और आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
SIR से पहले कर्नाटक में थे 5.5 करोड़ मतदाता
कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया शुरू होने से पहले मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 5.5 करोड़ थी। 16 जून 2026 को SIR के लिए मतदाता सूची स्थिर (फ्रीज) किए जाने के बाद मतदाताओं के विवरण की जांच और सत्यापन प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद 24 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में लगभग 1.08 करोड़ नाम शामिल नहीं किए गए। यह पहले दर्ज कुल मतदाताओं का करीब 19.48 प्रतिशत है।
इन मतदाताओं को ASDDO (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट और अन्य) श्रेणियों में रखा गया। हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम हटाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सभी संबंधित व्यक्ति स्थायी रूप से मतदान के लिए अयोग्य घोषित कर दिए गए हैं। पात्र मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 16 जून को कर्नाटक में कुल 5,54,32,314 मतदाता पंजीकृत थे, जबकि 24 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में लगभग 4.46 करोड़ मतदाता शामिल थे। शेष 1,07,96,339 मतदाताओं को ASDDO श्रेणी में चिह्नित किया गया था। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना नोटिस और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के किसी मतदाता का नाम अंतिम रूप से नहीं हटाया जा सकता।
अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी पात्र नागरिक नए पंजीकरण और विवरण सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की कमी ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है कि कहीं सत्यापन प्रक्रिया में योग्य मतदाता तो सूची से बाहर नहीं हो गए।
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