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रामलीला मैदान से INDIA गठबंधन की हुंकार, SIR और ‘वोट चोरी’ पर आर-पार की तैयारी; आखिर कौन-कौन सी पार्टियां दिखाएंगी ताकत?

दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली प्रस्तावित है। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं की मौजूदगी की संभावना है।

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रामलीला मैदान से INDIA गठबंधन की हुंकार, SIR और ‘वोट चोरी’ पर आर-पार की तैयारी; आखिर कौन-कौन सी पार्टियां दिखाएंगी ताकत?

LIVE 24 TV | विशेष रिपोर्ट | 27 अक्टूबर 2026

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर बड़े राजनीतिक प्रदर्शन का केंद्र बनने जा रही है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में महारैली आयोजित करने की तैयारी की है। रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की मांगें हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस अभियान को व्यापक जनआंदोलन का रूप देने की पहल की है। कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और दूसरे विपक्षी दलों को भी शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने रैली के लिए अनुमति जारी कर दी है।

हालांकि, रैली से पहले ही सियासी विवाद गहरा गया है। दिल्ली के व्यापारियों ने त्योहारों के मद्देनजर रैली टालने की मांग की है, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने साफ संकेत दिया है कि विपक्ष फिलहाल आंदोलन से पीछे हटने को तैयार नहीं है। राहुल गांधी के एक बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटा दें तो आंदोलन 30 सेकंड में समाप्त हो सकता है।

आखिर क्यों हो रही है INDIA गठबंधन की महारैली?

रैली का सबसे बड़ा कारण मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को लेकर उठे सवाल हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और इससे पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। राहुल गांधी ने 25 अक्टूबर को छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों से 'चलो दिल्ली' अभियान में शामिल होने की अपील की थी।

विपक्ष की प्रमुख मांगों में मतदाता सूची की पारदर्शी समीक्षा, कथित अनियमितताओं की जांच, मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल है। हालांकि, चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात और अनियमितताओं के आरोपों को खारिज किया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लोकतंत्र और मतदान के अधिकार से जोड़ते हुए देशव्यापी अभियान शुरू किया है। पार्टी की ओर से 'वोट बचाओ, देश बचाओ' और 'वोट चोर गद्दी छोड़' जैसे नारों के साथ विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पहले घोषणा की थी कि 10 से 20 अक्टूबर के बीच विभिन्न स्तरों पर मार्च और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। इसके बाद 1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ी रैली और नवंबर के अंतिम सप्ताह में 'चलो दिल्ली' अभियान को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई।

राहुल गांधी और खरगे की रणनीति क्या है?

कांग्रेस इस प्रदर्शन को 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव बना रही है। पार्टी ने अक्टूबर में विभिन्न राज्यों में मार्च, जनसभाएं और मतदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी। राहुल गांधी का जोर मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता पर है। वहीं खरगे विपक्षी दलों को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय स्तर पर साझा आंदोलन को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' कार्यक्रम तथा 1 नवंबर को महारैली आयोजित करने की घोषणा की है। 'जन महाभियोग' कोई औपचारिक संवैधानिक महाभियोग प्रक्रिया नहीं, बल्कि विपक्ष का प्रस्तावित राजनीतिक विरोध कार्यक्रम है।

SIR क्या है और चुनाव आयोग पर क्यों उठ रहे सवाल?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची का सत्यापन करना, मृत व्यक्तियों, स्थानांतरित मतदाताओं और डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान करना तथा पात्र मतदाताओं का विवरण सही रखना है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की गई है और पात्र नागरिकों के लिए दावा-आपत्ति का प्रावधान मौजूद है। 26 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर SIR से संबंधित निर्णयों को सामूहिक बताया और विपक्ष के आरोपों का विरोध किया।

अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव की भूमिका क्यों अहम?

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और बिहार में तेजस्वी यादव की राष्ट्रीय जनता दल, विपक्षी राजनीति के प्रमुख घटक हैं। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का मुद्दा समाजवादी पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। वहीं राजद बिहार से कार्यकर्ताओं की भागीदारी के जरिए इस अभियान को समर्थन देने की तैयारी कर रही है। रैली में दोनों दलों की सक्रियता विपक्षी एकजुटता के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

भाजपा ने भी तैयार किया जवाबी अभियान

INDIA गठबंधन के प्रदर्शन के जवाब में भाजपा ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान की घोषणा की है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी चुनाव आयोग को लेकर भ्रामक धारणाएं फैला रहे हैं। पार्टी देशभर में पदयात्राएं आयोजित करने की योजना बना रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2 नवंबर को तेलंगाना में प्रस्तावित पदयात्रा में भाग लेने की खबर है।

दिल्ली पुलिस ने दी अनुमति, 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक मैदान उपलब्ध

दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर की रैली के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किया है। आयोजकों को 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक मैदान के उपयोग की अनुमति दी गई है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। रैली में छात्र संगठनों और नागरिक समाज समूहों की भागीदारी भी प्रस्तावित है।

10 हजार करोड़ के नुकसान की आशंका, व्यापारियों ने रखी बड़ी मांग

CTI ने दावा किया है कि पिछले 25 दिनों में विभिन्न प्रदर्शनों और यातायात संबंधी बाधाओं के कारण दिल्ली के व्यापार को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। संगठन ने आशंका जताई है कि आगामी रैली और उससे जुड़ी संभावित बाधाओं से त्योहारों के दौरान 10,000 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित हो सकता है। हालांकि, ये व्यापारी संगठन के अनुमान हैं, किसी स्वतंत्र आर्थिक आकलन से प्रमाणित वास्तविक नुकसान के आंकड़े नहीं।

CTI के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर रामलीला मैदान को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की मांग भी की है। उनका तर्क है कि मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में लगभग 20 प्रमुख थोक बाजार मौजूद हैं, जिनकी गतिविधियां बड़ी रैलियों से प्रभावित हो सकती हैं। संगठन ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए राजधानी के बाहरी हिस्सों में वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए जाने चाहिए, ताकि राजनीतिक गतिविधियों के साथ व्यापारियों के हितों की भी रक्षा हो सके।

राहुल गांधी ने कहा ज्ञानेश कुमार को हटाएं, 30 सेकंड में रुक जाएगा आंदोलन

व्यापारियों की अपील के बाद राहुल गांधी ने 26 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली के व्यापारियों की चिंताओं को समझते हैं, लेकिन यातायात और सार्वजनिक परिवहन पर लगी पाबंदियों के लिए सरकार जिम्मेदार है। राहुल गांधी ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को व्यापारियों और आम नागरिकों के अधिकारों से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।

उनका कहना था कि ऐसा होने पर आंदोलन 30 सेकंड में रुक सकता है। इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। जहां कांग्रेस इसे चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग बता रही है, वहीं व्यापारियों का कहना है कि उनकी प्राथमिक चिंता दिवाली से पहले कारोबार और ग्राहकों की आवाजाही को सामान्य बनाए रखना है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या कहा?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी प्रस्तावित रैली को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा से जुड़ा आंदोलन बताया है। उन्होंने लोगों से रैली में भाग लेने और अभियान को सफल बनाने की अपील की है। कांग्रेस नेतृत्व का रुख है कि मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक जवाबदेही आवश्यक है।

व्यापारियों की अपील ने पार्टी के सामने एक नई चुनौती खड़ी की है। एक तरफ कांग्रेस अपने राजनीतिक अभियान को आगे बढ़ाना चाहती है, जबकि दूसरी तरफ त्योहारों के मौसम में व्यापार प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

INDIA गठबंधन की रैली में कौन-कौन सी पार्टियां होंगी शामिल?

कांग्रेस ने इस आयोजन को INDIA गठबंधन की बड़ी रैली के रूप में प्रस्तुत किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार, विपक्षी दलों के नेताओं को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। हालांकि, 27 अक्टूबर तक उपलब्ध पुष्ट जानकारी के आधार पर सभी आमंत्रित दलों और मंच साझा करने वाले नेताओं की अंतिम सूची स्पष्ट नहीं है।

ऐसे में समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, वामपंथी दलों या अन्य विपक्षी पार्टियों की भागीदारी को उनके अलग-अलग आधिकारिक पुष्टिकरण के बिना निश्चित नहीं माना जा सकता। यह रैली INDIA गठबंधन के भीतर राजनीतिक समन्वय और चुनावी मुद्दों पर विपक्ष की एकजुटता की भी परीक्षा होगी।

क्या 2027 के चुनावों से पहले बदलेगा सियासी समीकरण?

रामलीला मैदान की प्रस्तावित महारैली सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसके जरिए विपक्ष चुनावी पारदर्शिता के सवाल को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का मुद्दा बनाना चाहता है।

रैली में कितने दलों के नेता मंच साझा करते हैं, कौन-सी संयुक्त घोषणाएं होती हैं और आंदोलन को आगे बढ़ाने की क्या योजना सामने आती है, इन बातों पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।

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