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मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा, 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बाद अदालत का बड़ा फैसला

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई। जानिए सौरभ राजपूत की हत्या कैसे हुई, पुलिस को क्या सबूत मिले, 22 गवाहों और 126 सुनवाइयों के बाद अदालत ने क्या फैसला सुनाया और आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी।

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मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा, 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बाद अदालत का बड़ा फैसला

लाइव 24 टीवी | विशेष समाचार | 15 अक्टूबर 2026

मेरठ, उत्तर प्रदेश। देशभर में चर्चा का विषय बने मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में 14 अक्टूबर 2026 को जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। दोनों को 30 सितंबर 2026 को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराया गया था।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सजा का निर्णय दिया। इस मामले में 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह प्रस्तुत किए।

क्या था मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड?

यह घटना मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र से जुड़ी है। मृतक सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे थे और विदेश में काम करने के बाद फरवरी 2025 में मेरठ लौटे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ की पत्नी मुस्कान और साहिल शुक्ला के बीच संबंध थे। दोनों ने मिलकर सौरभ को रास्ते से हटाने की साजिश रची।

मार्च 2025 के शुरुआती दिनों में सौरभ की हत्या कर दी गई। अभियोजन के अनुसार, उन्हें पहले नशीली दवा देकर अचेत किया गया और बाद में चाकू से हमला किया गया।हत्या के बाद शव के टुकड़े करके उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखा गया। इसके बाद शव को छिपाने के उद्देश्य से ड्रम में सीमेंट और रेत भर दी गई। यही नीला ड्रम इस मामले की पहचान बन गया।

हत्या के बाद हिमाचल प्रदेश की यात्रा

जांच में सामने आया कि सौरभ की हत्या के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश घूमने चले गए थे। पुलिस के अनुसार, हत्या को छिपाने और परिवार का संदेह दूर करने के लिए सौरभ के मोबाइल फोन से संदेश भेजे जाने की बात भी सामने आई।

जब सौरभ से संपर्क नहीं हो पाया तो परिवार को संदेह हुआ। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। मार्च 2025 में पुलिस ने घर के भीतर रखे नीले ड्रम से शव के अवशेष बरामद किए। जांच के बाद 18 मार्च को मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया। अगले दिन दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस ने करीब एक हजार पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया

पुलिस ने इस मामले में कई स्तरों पर जांच की। घटनास्थल से मिले सामान, चिकित्सकीय परीक्षण, वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को जांच में शामिल किया गया। 12 मई 2025 को पुलिस ने अदालत में लगभग एक हजार पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया। इसमें हत्या की कथित साजिश, अपराध को अंजाम देने के तरीके और साक्ष्य छिपाने से संबंधित विवरण शामिल थे।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए दोनों की भूमिका स्थापित करने का प्रयास किया। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने दोनों को हत्या तथा अपराध के प्रमाण मिटाने का दोषी पाया।

126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बाद दोष सिद्ध

अदालत में इस मुकदमे की सुनवाई लगभग 13 महीने चली। इस दौरान 126 सुनवाइयां हुईं और 22 अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 17 सितंबर 2026 को अंतिम बहस पूरी हुई। इसके बाद 30 सितंबर को अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी घोषित किया और सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की।

अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों को मृत्युदंड दिए जाने की मांग की थी।

अदालत ने सुनाई मौत की सजा

14 अक्टूबर को सजा पर सुनवाई के दौरान मुस्कान और साहिल को जेल से दृश्य-श्रव्य माध्यम के जरिए अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष ने हत्या की पूर्वनियोजित प्रकृति और शव को छिपाने के प्रयास का उल्लेख किया।

वहीं, बचाव पक्ष ने नरमी बरतने की अपील की और मुस्कान की बेटियों के भविष्य का प्रश्न उठाया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मृत्युदंड सुनाया। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया गया।

सौरभ के परिवार ने फैसले का किया स्वागत

अदालत का फैसला आने के बाद सौरभ राजपूत के परिवार ने संतोष व्यक्त किया। परिवार लंबे समय से दोषियों के लिए कठोरतम दंड की मांग कर रहा था। सौरभ की मां ने पहले भी कहा था कि उन्हें मृत्युदंड से कम सजा स्वीकार नहीं होगी। परिजनों के लिए यह फैसला लंबी न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

क्या मृत्युदंड के बाद तत्काल फांसी होगी?

जिला अदालत से मृत्युदंड मिलने का अर्थ तत्काल फांसी होना नहीं है। भारतीय न्यायिक व्यवस्था में सत्र न्यायालय द्वारा सुनाए गए मृत्युदंड की उच्च न्यायालय से पुष्टि आवश्यक है। इस मामले में भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पुष्टि के बाद ही सजा के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। दोषियों को फैसले और सजा के विरुद्ध अपील करने तथा अन्य उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार है।

मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड आपराधिक साजिश, पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मामला है। करीब 19 महीने पहले हुई इस हत्या में जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया है। फिलहाल जिला अदालत की कार्यवाही का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है, लेकिन उच्च न्यायालय में पुष्टि और संभावित अपील की प्रक्रिया अभी बाकी है।

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