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अब हाई-स्पीड हाईवे पर नहीं होंगे मनमाने कट, NHAI ने तय किए नए सुरक्षा मानक

21 सितंबर 2026 को जारी इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य हाई-स्पीड कॉरिडोर की DPR तैयार करने में एकरूपता लाना, सड़क सुरक्षा मजबूत करना और तेज रफ्तार यातायात को अनियोजित कट, क्रॉसिंग और स्थानीय अवरोधों से अलग रखना है। ये मानक आगामी 4 और 6 लेन के ग्रीनफील्ड तथा ब्राउनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट

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अब हाई-स्पीड हाईवे पर नहीं होंगे मनमाने कट, NHAI ने तय किए नए सुरक्षा मानक

अब हाई-स्पीड हाईवे पर नहीं होंगे मनमाने कट, NHAI ने तय किए नए सुरक्षा मानक

नई दिल्ली। देश में हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर को अधिक सुरक्षित और निर्बाध बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक्सप्रेसवे के अलावा बनने वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड नेशनल हाईवे के लिए नए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका असर सिर्फ सड़क निर्माण की तकनीक पर नहीं, बल्कि रोजाना इन मार्गों से गुजरने वाले वाहन चालकों, आसपास के गांवों-कस्बों और माल परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ेगा।

21 सितंबर 2026 को जारी इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य हाई-स्पीड कॉरिडोर की DPR तैयार करने में एकरूपता लाना, सड़क सुरक्षा मजबूत करना और तेज रफ्तार यातायात को अनियोजित कट, क्रॉसिंग और स्थानीय अवरोधों से अलग रखना है। ये मानक आगामी 4 और 6 लेन के ग्रीनफील्ड तथा ब्राउनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू होंगे।

50 हजार किमी हाई-स्पीड नेटवर्क की तैयारी

सरकार ने ‘विकसित भारत 2047’ के दीर्घकालीन रोडमैप के तहत देश में करीब 50,000 किलोमीटर का एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा है। NHAI के अनुसार नए दिशा-निर्देश इसी बड़े नेटवर्क के लिए सड़क डिजाइन और सुरक्षा के एक समान मानक तैयार करने की दिशा में कदम हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 तक देश में कुल 10,389 किलोमीटर राष्ट्रीय हाई-स्पीड कॉरिडोर परियोजनाएं अवॉर्ड की जा चुकी थीं। इनमें से 4,809 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका था और 5,580 किलोमीटर पर काम चल रहा था।

ट्रैफिक के हिसाब से तय होगी सड़क की चौड़ाई

नई व्यवस्था में सड़क की लेन और उसके लिए जरूरी भूमि की चौड़ाई ट्रैफिक आकलन के आधार पर तय की जाएगी।

प्रतिदिन 15,000 वाहनों तक के यातायात वाले मार्ग पर चार लेन का हाईवे और चार लेन के स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे तथा कुल राइट ऑफ वे 60 मीटर रखा जाएगा।

15,000 से 25,000 वाहनों वाले मार्ग पर सड़क चार लेन की होगी, लेकिन भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए पुल, फ्लाईओवर और अन्य स्ट्रक्चर छह लेन क्षमता के बनाए जाएंगे। ऐसे कॉरिडोर के लिए 70 मीटर चौड़ाई निर्धारित की गई है।

वहीं 25,000 से 40,000 वाहनों के यातायात वाले कॉरिडोर को छह लेन का बनाया जाएगा और उसके स्ट्रक्चर भी छह लेन के होंगे। इसके लिए भी 70 मीटर राइट ऑफ वे निर्धारित किया गया है।

हाईवे के किनारे एक मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल

आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान हाई-स्पीड कॉरिडोर के बाहरी किनारे पर एक मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल का है।

NHAI के मुताबिक इसका उद्देश्य हाईवे पर अनधिकृत प्रवेश, अतिक्रमण और आवारा पशुओं के प्रवेश को रोकना है। हाई-स्पीड मार्ग पर अचानक किसी व्यक्ति, वाहन या पशु के सामने आ जाने से गंभीर दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है; इसलिए एक्सेस कंट्रोल को सड़क के डिजाइन का अनिवार्य हिस्सा बनाया जा रहा है।

सीधे कट नहीं, रैंप और इंटरचेंज से होगी आवाजाही

नए हाई-स्पीड कॉरिडोर पर प्रमुख सड़कों और बड़े यातायात केंद्रों से संपर्क के लिए व्यवस्थित इंटरचेंज और रैंप बनाए जाएंगे।

एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और अधिक ट्रैफिक वाले प्रमुख मार्गों के अलावा बंदरगाह, एयरपोर्ट, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक क्षेत्र और प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच के लिए भी ग्रेड-सेपरेटेड कनेक्टिविटी का प्रावधान किया गया है।

इस व्यवस्था का मतलब है कि हाई-स्पीड मुख्य लेन में स्थानीय वाहनों के लिए मनमाने कट खोलने के बजाय उनका प्रवेश और निकास निर्धारित स्थानों से कराया जाएगा। इससे तेज रफ्तार मुख्य यातायात और स्थानीय आवाजाही के बीच टकराव कम करने में मदद मिल सकती है।

एग्जिट से पहले मिलेगा स्पष्ट संकेत

तेज गति से चल रहे वाहन चालक को अचानक लेन बदलने या ब्रेक लगाने की जरूरत न पड़े, इसके लिए एंट्री और एग्जिट की अग्रिम सूचना देने का विशेष प्रावधान किया गया है। NHAI ने इसे हाई-स्पीड परिस्थितियों के अनुरूप अतिरिक्त सुरक्षा उपायों में शामिल किया है।

गांवों और स्थानीय आबादी के लिए भी अहम सवाल

हाई-स्पीड सड़कें तभी व्यावहारिक होंगी जब उनके दोनों ओर रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही—खेत, स्कूल, बाजार, अस्पताल और गांवों के बीच संपर्क—भी सुरक्षित तरीके से बनी रहे।

इसी कारण परियोजनाओं की DPR बनाते समय स्थानीय यातायात की जरूरत, इंटरचेंज की उचित दूरी और आवश्यक ग्रेड-सेपरेटेड क्रॉसिंग का सही आकलन महत्वपूर्ण होगा। जहां मुख्य हाईवे को पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड किया जाएगा, वहां स्थानीय आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था परियोजना के सामाजिक प्रभाव का अहम हिस्सा बनेगी।

यात्रियों और अर्थव्यवस्था के लिए क्या बदल सकता है?

एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर का उद्देश्य लंबी दूरी के यातायात को बार-बार रुकने, स्थानीय जंक्शन और अनियंत्रित प्रवेश से बचाना है। सरकार हाई-स्पीड कॉरिडोर विकास को बेहतर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता से जोड़ती रही है। 50,000 किलोमीटर के प्रस्तावित नेटवर्क की पहचान भी एक व्यापक कॉरिडोर-आधारित राष्ट्रीय राजमार्ग रणनीति के तहत की गई है।

जनसरोकार

NHAI की नई गाइडलाइन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि हाईवे निर्माण को केवल “अधिक लेन” तक सीमित न रखकर सुरक्षित प्रवेश, नियंत्रित निकास, पशुओं और अतिक्रमण से सुरक्षा तथा एक समान इंजीनियरिंग मानकों से जोड़ा गया है।

लेकिन जमीन पर इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि परियोजना बनाते समय आसपास की आबादी की आवाजाही के लिए पर्याप्त और सुविधाजनक व्यवस्था हो, इंटरचेंज सही स्थानों पर बनाए जाएं और बाउंड्री वॉल व एक्सेस-कंट्रोल जैसे सुरक्षा प्रावधान निर्माण के बाद भी प्रभावी रूप से कायम रखे जाएं।

यानी नई नीति का लक्ष्य सिर्फ तेज सड़क बनाना नहीं, बल्कि ऐसी सड़क बनाना है जिस पर लंबी दूरी का यातायात तेज चले और स्थानीय आबादी की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे।

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