
धर्म परिवर्तन पर आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! तमिलनाडु सरकार की अपील खारिज
यह विवाद तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के आदेश से जुड़ा था। इसके तहत हिंदू धर्म से इस्लाम अपनाने वाले कुछ व्यक्तियों को निर्धारित मुस्लिम पिछड़ा वर्ग समुदायों के अंतर्गत प्रमाणपत्र देने की व्यवस्था की गई थी।

नई दिल्ली | 15 अक्टूबर 2026
देश में धर्म परिवर्तन और जाति आधारित आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म से इस्लाम अपनाने वाला व्यक्ति अपनी पुरानी जातिगत पहचान के आधार पर स्वतः पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की अपील खारिज करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के आदेश से जुड़ा था। इसके तहत हिंदू धर्म से इस्लाम अपनाने वाले कुछ व्यक्तियों को निर्धारित मुस्लिम पिछड़ा वर्ग समुदायों के अंतर्गत प्रमाणपत्र देने की व्यवस्था की गई थी।
मद्रास हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को रद्द कर दिया था। तमिलनाडु सरकार ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के निर्णय को सही ठहराया।
फैसले की प्रमुख बातें
धर्म परिवर्तन के बाद पुरानी जाति के आधार पर आरक्षण का अधिकार स्वतः नहीं मिलेगा।
केवल इस्लाम अपनाने से किसी व्यक्ति को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में आरक्षण का अधिकार नहीं मिल जाता।
आरक्षण की पात्रता संबंधित समुदाय की कानूनी मान्यता और सामाजिक पिछड़ेपन के निर्धारित मानदंडों पर निर्भर करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की अपील खारिज कर दी।
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण: इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि हर धर्म परिवर्तन करने वाला व्यक्ति सभी प्रकार के आरक्षण से वंचित हो जाएगा। मामला विशेष रूप से धर्म परिवर्तन के बाद पूर्व जातिगत स्थिति के आधार पर पिछड़ा वर्ग आरक्षण के दावे से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला धर्म परिवर्तन, सामाजिक पिछड़ेपन और आरक्षण की कानूनी पात्रता को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे तमिलनाडु सरकार की संबंधित आरक्षण व्यवस्था को न्यायिक स्तर पर बड़ा झटका लगा है।




